हाई कोर्ट ने रोडवेज आदेश को बताया बौद्धिक शून्यता का उदाहरण, अधिकारी को ट्रेनिंग लेने के दिए आदेश
News In Short
- राजस्थान हाई कोर्ट की टिप्पणी, स्बौद्धिक शून्यता से ग्रस्त है रोडवेज।
- निदेशक की कार्यशैली पर सवाल, कहा-पहले कानून सीखें, फिर करें फैसला।
- रोडवेज में मानव संसाधन प्रबंधन का काम करने पर लगाई रोक।
- कोर्ट ने अधिकारी की कानून व प्रक्रिया की ट्रेनिंग करवाने के दिए निर्देश।
- कोर्ट की तल्ख टिप्पणी से राजस्थान रोडवेज निगम में हलचल मची।
News In Detail
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में राजस्थान रोडवेज को बौद्धिक शून्यता से ग्रस्त बताया है। जस्टिस अशोक जैन ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में गंभीर खामी पर रोडवेज की कार्यकारी निदेशक डॉ. ज्योति चौहान को प्रक्रिया और कानूनी मामलों का अनिवार्य प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया है।
निलंबन को दी थी चुनौती
याचिकाकर्ता के एडवोकेट संजय जोशी ने बताया कि रोडवेज प्रशासन ने याचिकाकर्ता सुभाष गुप्ता को निलंबित कर दिया था। गुप्ता ने निलंबन को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने 27 नवंबर, 2025 के आदेश से याचिकाकर्ता को रोडवेज प्रशासन को एक रिप्रेजेंटेशन देने और रोडवेज प्रशासन को आदेश में उल्लेखित अदालती आदेशों के प्रकाश में रिप्रेजेंटेशन केा तय करने के निर्देश दिए थे।
सिर्फ सही है कहकर खारिज किया रिप्रेजेंटेशन
रोडवेज की कार्यकारी निदेशक (यातायात) डॉ. ज्योति चौहान ने 16 जनवरी,2026 को निलंबन को सही बताते हुए याचिकाकर्ता के रिप्रेजेंटेशन को खारिज कर दिया। चौहान ने यह नहीं लिखा कि निलंबन किस आधार पर सही है। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देकर कहा कि निलंबन को सही ठहराने के लिए ना तो सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का ध्यान रखा है और ना ही निलंबन को सही ठहराने के लिए कोई कानूनी तर्क दिया है।
रोडवेज में बौद्धिक शून्यता का नमूना है यह
अदालत ने कार्यकारी निदेशक के याचिकाकर्ता के रिप्रेजेंटेशन को तय करने के तरीके पर टिप्पणी की और कहा कि यह राजस्थान रोडवेज में बौद्धिक शून्यता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। अदालत ने कहा है कि किसी भी निर्णय में कारण वह कड़ी होते हैं जो निर्णय लेने वाले के दिमाग और विवाद के बीच संबंध स्थापित करते हैं।
फिर से करो तय
अदालत ने याचिकाकर्ता के रिप्रेजेंटेशन को खारिज करने के 16 जनवरी,2026 के आदेश को रद्ध कर दिया है। अदालत रोडवेज के एमडी को हाईकेार्ट के 27 नवंबर,2025 के आदेश के प्रकाश में रिप्रेजेंटेशन केा नए सिरे से तय करने को कहा है। अदालत ने कहा है कि जब भी कोई निर्णय किसी पक्ष को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है तो निर्णय लेने वाले अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह उस निर्णय के पीछे के स्पष्ट कारण बताए।
और इनकी करवाओ ट्रेनिंग
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को डॉ. ज्योति चौहान (यातायात) को उचित कानूनी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिलवाने को कहा है। अदालत ने यह ट्रेनिंग पूरी होने तक चौहान के रोडवेज में मानव संसाधन के प्रबंधन से संबंधित किसी भी काम करने पर भी रोक लगा दी है।
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