हाई कोर्ट ने की पोक्सो की एफआईआर निरस्त, कहा-इस एक्ट में रोमियो-जूलियट का प्रावधान जरूरी

Mukesh Sharma | Feb 03, 2026, 14:45 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने पोक्सो का एक मामला रद्द कर दिया। कोर्ट ने सरकार से कहा कि पोक्सो एक्ट में रोमियो—जूनियट का प्रावधान जोड़ने की आवश्यकता है।

News In Short

  • राजस्थान हाई कोर्ट का सुझाव, पोक्सो एक्ट में रोमियो-जूलियट के प्रावधान जोड़ें
  • हाई कोर्ट ने इस सुझाव के साथ पोक्सो के एक मामलों को किया निरस्त
  • कोर्ट ने कहा, पोक्सो के अधिकतर मामले रोमियो-जूलियट नेचर के
  • कोर्ट ने कहा, मौजूदा कानून यौन शोषण और सहमति से बने किशोर संबंधों में फर्क करने में नाकाम
  • रोमियो और जूलियट प्रावधान सहमति से बने संंबंधों में करता है बचाव

News In Detail

जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को पोक्सो (नाबालिग से यौन अपराध) एक्ट में रोमियो— जूलियट का प्रावधान जोड़ने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने यह सुझाव पोक्सो से जुड़े एक मामले को रद्द करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा, देशभर में पोक्सो के तहत दर्ज मामलों का बड़ा हिस्सा रोमियो-जूलियट प्रकृति का है। जहां दो किशोर अथवा किशोर-युवा आपसी सहमति से संबंध में होते हैं, लेकिन उम्र के तकनीकी अंतर और सामाजिक-पारिवारिक असहमति के कारण पूरा मामला गंभीर आपराधिक मुकदमे में बदल दिया जाता है।



नहीं कर सकते आंकड़ों को नजरअंदाज

जस्टिस अनिल उपमन की अदालत ने यह आदेश 19 साल के युवक की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचा यौन शोषण और सहमति से बने किशोर संबंधों के बीच फर्क करने में नाकाम रहता है। उसने अदालत ने कहा, हम उन आकड़ों को नजरअंदाज नहीं कर सकते है, जो पोक्सो कानून लागू होने के बाद सामने आए हैं। इसमें एक बड़ा प्रतिशत उन स्थितियों से जुड़ा है, जहां 16 से 18 साल की उम्र के बीच किशोर-युवा एक कमिटेड रिलेशनशिप में है।



रोमियो-जूलियट के प्रावधान जरूरी

कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले 2012 से पहले अपराध की श्रेणी में नहीं आते थे। लेकिन, पोक्सो कानून लागू होने के बाद अब लड़की की सहमति की परवाह किए बिना इन्हें एक दंडनीय अपराध मान लिया जाता हैं। कानून की बाध्यता होने से अदालतों के पास ऐसे मामलों में वास्तविक न्याय देने की गुंजाइश कम बचती है। ऐसे में जरूरी है कि अब इस कानून में रोमियो-जूलियट का प्रावधान जोड़ने पर विचार किया जाए।



कोर्ट ने मशीनरी काम किया

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एक 19 साल के युवा के खिलाफ 17 साल की किशोरी का अपहरण करके उसके साथ यौन शोषण करने का मामला पोक्सो कानून के तहत दर्ज किया गया। लेकिन यहां पुलिस और ट्रायल कोर्ट ने एक मशीनरी की तरह काम किया। इसके विपरीत किशोरी पुलिस और ट्रायल के कोर्ट को दिए बयानों में साफ कह रही है कि वह अपनी मर्जी से अपने घर से गई थी। युवक ने उसके साथ कोई जबरदस्ती नहीं की ना ही दोनों के बीच कोई संबंध सहमति अथवा जबरन बना। वहीं, मेडिकल रिपोर्ट में भी यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन उसके बाद भी पुलिस ने अपहण और बलात्कार की धाराओं में चालान पेश किया, वहीं ट्रायल कोर्ट ने युवक पर चार्ज भी फ्रेम कर दिए।



कोर्ट ऐसे मामलों में नहीं रह सकती चुप

पोक्सो कोर्ट ने कहा कि यह कानून बच्चों को सेक्सअुल शिकारियों और शोषण करने वालों से बचाने के लिए बनाया गया था। यह नहीं कहा जा सकता कि कानून बनाने वालों का इरादा इस सख्त कानून का इस्तेमाल उन युवा वयस्कों को परेशान करने के लिए करना था जो आपसी सहमति से, भले ही सामाजिक रूप से अस्वीकार्य, रिश्तों में शामिल हैं। जब पीड़िता खुद आरोपी को बेगुनाह बता रही है और मेडिकल रिपोर्ट भी उसका समर्थन करती है तो यह कोर्ट आंखे नहीं मूंद सकता हैं। हम युवक के खिलाफ दर्ज एफआईआऱ और ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई को रद्द करने का आदेश देते हैं।



क्या हैं रोमियो-जूलियट प्रावधान

"रोमियो और जूलियट" प्रावधान कानूनी नियम हैं। यह उन किशोरों को यौन अपराध के कठोर दंड से बचाते हैं, जो एक-दूसरे की सहमति से यौन संबंध बनाते हैं और जिनकी उम्र में बहुत कम अंतर होता है। ​यह नाम विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक से लिया गया है, जिसमें दो किशोर एक-दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं।



​यह प्रावधान क्यों जरूरी

​अधिकतर देशों में "सहमति की आयु" तय होती है। अगर देश में 18 वर्ष से कम आयु वाले के साथ कोई भी व्यक्ति शारीरिक संबंध बनाता है, तो कानूनन उसे 'बलात्कार' या 'यौन शोषण' माना जाता है, भले ही वह आपसी सहमति से हो। ​ऐसे में, अगर एक 19 साल का लड़का अपनी 17 साल की प्रेमिका के साथ सहमति से संबंध बनाता है, तो लड़के पर गंभीर यौन अपराधी का ठप्पा लग सकता है। रोमियो-जूलियट कानून इसी "तकनीकी अपराध" को रोकने के लिए बनाए गए हैं।



​इसकी मुख्य शर्तें

​यह कानून हर मामले में लागू नहीं होता। इसके लिए आमतौर पर तीन शर्तें देखी जाती हैं:



​सहमति: संबंध पूरी तरह से आपसी रजामंदी से होने चाहिए।



​उम्र का कम अंतर: दोनों के बीच उम्र का अंतर बहुत कम होना चाहिए (आमतौर पर 2 से 4 साल)।



​कोई शोषण नहीं: इसमें कोई डराना, धमकाना या शक्ति का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।



भारत में पोक्सो एक्ट की स्थिति

भारत में पोक्सो एक्ट के तहत सहमति की उम्र 18 वर्ष है। भारतीय कानून में स्पष्ट रूप से "रोमियो-जूलियट" जैसा कोई लिखित प्रावधान नहीं है, जिसके कारण अक्सर किशोर प्रेमियों को जेल जाना पड़ता है। ​हालांकि, हाल के बरसों में भारतीय न्यायपालिका ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।



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