राजस्थान की साप्ताहिक कोर्ट डायरी: न्याय का कड़ा संदेश, कोर्ट ने थामी जनहित की कमान

Mukesh Sharma | Mar 15, 2026, 15:06 IST
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इस सप्ताह राजस्थान हाईकोर्ट ने कई अहम मामलों की सुनवाई कर ऐसे फैसले दिए हैं, जिनका सीधा असर किसानों, कर्मचारियों और आम नागरिकों पर पड़ेगा। कोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही, अधिकारों के दुरुपयोग और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों में कड़ा रुख अपनाया है।

कोर्ट डायरी: इस सप्ताह राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक सक्रियता का परिचय देते हुए कई अहम फैसले सुनाए हैं। ये सीधे तौर पर सुशासन, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों को मजबूत करते हैं। किसानों के बीमा क्लेम से लेकर बैंक खाते फ्रीज करने जैसी प्रशासनिक मनमानी पर अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सिस्टम की खामियों का खामियाजा आम आदमी नहीं भुगतेगा।



इन फैसलों के जरिए हाईकोर्ट ने न केवल सरकारी तंत्र की सुस्ती पर नाराजगी जताई है, बल्कि राइट टू एजुकेशन और राइट टू लाइफ जैसे संवैधानिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा है। चाहे वह फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच का संवेदनशील मुद्दा हो या शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था, अदालत का सख्त चेहरा दिखाई दिया।



किसानों के हक में फैसला

एक अहम मामले में हाईकोर्ट ने नागौर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक को पीएम फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बीमा राशि जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल पर अधिकारियों की डेटा एंट्री में हुई गलती के कारण किसानों को लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस कुलदीप माथुर ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन डेटा एंट्री प्रक्रिया में किसानों की कोई भूमिका नहीं होती, इसलिए उनकी हानि स्वीकार्य नहीं है।



दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच संभव

पीडब्ल्यूडी (दिव्यांग) में आरक्षण से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने कहा कि नियुक्त कर्मचारियों के दिव्यांगता प्रमाणपत्रों का पुनर्मूल्यांकन कराया जा सकता है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने कहा कि फर्जी दावों को रोकने और आरक्षण नीति के निष्पक्ष क्रियान्वयन के लिए ऐसे प्रमाणपत्रों का सत्यापन आवश्यक है।



अनुकंपा नियुक्ति पर अहम टिप्पणी

अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि माता-पिता के तलाक या पिता की दूसरी पत्नी को नौकरी मिलने के आधार पर बेटे को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजीत सिंह संधू की बेंच ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए याचिकाकर्ता के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है।



डॉक्टर की पढ़ाई में बाधा नहीं

एक मेडिकल ऑफिसर को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को उसे सीनियर रेजिडेंसी कोर्स जॉइन करने के लिए पद से मुक्त करने का आदेश दिया है। जस्टिस नूपुर भाटी ने कहा कि केवल प्रशासनिक असुविधा या अस्थायी स्टाफ की कमी के आधार पर किसी डॉक्टर को उच्च शिक्षा से नहीं रोका जा सकता है।



सरकारी अनुमति के बिना कार्रवाई अमान्य

जयपुर विकास प्राधिकरण से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने प्रवर्तन अधिकारी के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने कहा कि किसी लोक सेवक के खिलाफ कार्रवाई से पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत सरकारी अनुमति आवश्यक होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई थी।



सफाई व्यवस्था पर कोर्ट की नाराजगी

जयपुर शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर भी अदालत ने नगर निगम के कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की पीठ ने कहा कि हजारों सफाई कर्मचारियों की भर्ती के बावजूद जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। कोर्ट ने नगर निगम से वार्ड-वार जानकारी पेश करने के निर्देश दिए और कचरे का सही निपटान नहीं करने वाले नागरिकों पर जुर्माना लगाने का सुझाव दिया है।



कोर्ट स्टाफ पर अवमानना कार्यवाही समाप्त

मामलों की लिस्टिंग को लेकर कोर्ट स्टाफ के खिलाफ स्वत:प्रेरित अवमानना कार्यवाही भी हाईकोर्ट ने समाप्त कर दी। जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की बेंच ने कहा कि केवल किसी मामले की लिस्टिंग नहीं होने से अवमानना का मामला नहीं बनता।



बैंक खाते फ्रीज करने पर सख्त टिप्पणी

एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक के बैंक खाते को बिना पर्याप्त कारण और कथित अपराध से उसका प्रथम दृष्टया संबंध स्थापित किए बिना फ्रीज करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि ऐसी कार्रवाई व्यक्ति के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) तथा पेशा करने की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(g)) को प्रभावित करती है।



इस सप्ताह इन फैसलों के जरिए हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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