राजस्थान की साप्ताहिक चिट्ठी: न्याय की मुहर, सदन में संग्राम और सादगी की मिसाल

यह सप्ताह राजस्थान के लिए आत्ममंथन का रहा है। भ्रष्टाचार के बड़े मामले और अवैध पटाखा फैक्ट्री में सात मजदूरों की मौत हमारी विकास की दास्तां पर सवालिया निशान लगाती है।

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Jinesh Jain
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राजस्थान के लिए यह सप्ताह बदलाव, विवाद और विमर्श का मिला-जुला केंद्र रहा। एक तरफ जहां लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई पंचायत के चुनावों का रास्ता साफ हुआ, वहीं राज्य विधानसभा में मर्यादा की सीमाएं लांघती तस्वीरें भी सामने आईं।

प्रशासनिक हलकों में जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हुए, वहीं दो युवा अफसरों ने अपनी शादी से समाज को एक नया आईना दिखाया। आइए, विस्तार से जानते हैं मरूधरा की इस सप्ताह की बड़ी हलचलें।

पंचायत चुनावों पर 'सुप्रीम' मुहर

राजस्थान के ग्रामीण अंचलों के लिए सबसे बड़ी खबर देश की शीर्ष अदालत से आई। पिछले काफी समय से परिसीमन के फेर में उलझे पंचायत चुनावों पर अब कानूनी बादल छंट गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राज्य की लोकतांत्रिक गतिविधियों में न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। यह टिप्पणी भविष्य के लिए एक बड़ा नजीर है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव समय पर होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पहली प्राथमिकता है।

कोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस बार राज्य चुनाव आयोग ने तय किया है कि सरपंच और पंचों के चुनाव पुराने ढर्रे यानी बैलेट पेपर से होंगे।

वहीं, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मध्य प्रदेश से ईवीएम मंगवाई जा रही हैं। होली के तुरंत बाद पंचायत चुनाव की घोषणा होने की पूरी संभावना है।

विधानसभा में 'गौवंश' पर घमासान: जब मर्यादा भूल बैठे माननीय

इस सप्ताह राजस्थान विधानसभा ने वह मंजर देखा, जिसने संसदीय गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए। मुद्दा था- गौवंश की रक्षा और जयपुर की हिंगोनिया गौशाला की कथित घटना।

हंगामे की चिंगारी भाजपा विधायक बालमुकंदाचार्य के उस सवाल से भड़की, जिसमें उन्होंने गाय को 'राज्य पशु' घोषित करने की मंशा पूछी थी। लेकिन सदन तब 'अखाड़ा' बन गया, जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हिंगोनिया गौशाला में एक बछड़े के कटे सिर का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने पोस्टर लहराए और सीधा आरोप भाजपा विधायक गोपाल शर्मा पर मढ़ दिया।

आरोपों से बिफरे गोपाल शर्मा और कांग्रेस के गोविंद सिंह डोटासरा के बीच बात इतनी बिगड़ी कि सदन स्थगित होने के बाद दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की और बाहें चढ़ाने तक की नौबत आ गई। हालांकि बाद में गोपाल शर्मा ने 'आवेश में मर्यादा भूलने' के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली, लेकिन इस घटना ने सदन की कार्यप्रणाली पर एक गहरा दाग छोड़ दिया है।

भ्रष्टाचार बनाम सादगी: दो अलग तस्वीरें

प्रशासनिक गलियारे से इस सप्ताह दो ऐसी खबरें आईं, जो सिस्टम के दो विपरीत चेहरों को दिखाती हैं।

भ्रष्टाचार का 'लुकआउट' नोटिस:

जल जीवन मिशन घोटाले में अब आंच पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल तक पहुंच गई है। लगभग 900 करोड़ रुपये के इस महाघोटाले में एसीबी इतनी मुस्तैद है कि अग्रवाल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है।

एक तरफ जहां सरकार घर-घर पानी पहुंचाने का दावा कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ विभाग के बड़े साहबों के ठिकानों पर छापेमारी और 10 अधिकारियों की गिरफ्तारी की खबरें सिस्टम की खोखली जड़ों को उजागर कर रही हैं।

सादगी का 'आईएएस' मॉडल:

भ्रष्टाचार की खबरों के बीच अलवर से एक सुखद तस्वीर आई। 2023 बैच के दो युवा आईएएस माधव भारद्वाज और अदिति वासने ने बिना किसी तामझाम, दहेज या वीआईपी प्रोटोकॉल के कोर्ट मैरिज की।

जहां शादियों में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं, वहां इन दो अफसरों ने बेहद सादगी माहौल में कलेक्टर (आईएएस अर्तिका शुक्ला) के सामने एक-दूसरे को माला पहनाकर समाज को यह संदेश दिया कि संस्कार और प्रेम दिखावे के मोहताज नहीं होते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे हिंदू रीति-रिवाजों का सम्मान करते हैं और जल्द ही मंदिर में फेरे लेंगे।

निजी क्षेत्र से बिजली खरीदी पर सरकार की व्याकुलता

राजस्थान सरकार इन दिनों बिजली की कमी को पूरा करने के लिए 'निजी क्षेत्र' से 3200 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए जिस तरह व्याकुल दिख रही है, उसने सवाल खड़े होते दिखे। यह तथ्य उजागर हुआ कि सरकार चाहती है कि इस बिजली खरीद के लिए कोटा और सूरतगढ़ की सरकारी इकाइयों को बंद कर दिया जाए।

तर्क दिया जा रहा है कि ये प्लांट पुराने हो गए हैं। लेकिन, आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। ये प्लांट अभी 30-40 साल के ही हुए हैं, जबकि देश में कई प्लांट 50 साल से अधिक समय से सफलतापूर्वक चल रहे हैं। राजस्थान विद्युत नियामक आयोग इस प्रस्ताव को पहले ही खारिज कर चुका है, फिर भी सरकार 'पुनर्विचार याचिका' लेकर फिर इस प्रस्ताव को लेकर आई है।

भिवाड़ी अग्निकांड: 'खाकी' के साये में बारूद का काला खेल

औद्योगिक नगरी भिवाड़ी के खुशखेड़ा से आई खबर ने रूह कंपा दी। एक गारमेंट फैक्ट्री के नाम पर रजिस्टर्ड प्लॉट में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे, जहां हुए धमाके ने 7 मजदूरों को जिंदा जला दिया।

जांच में सामने आया कि फैक्ट्री संचालक हेमंत शर्मा एक पुलिसकर्मी का भाई है। इसी 'खाकी' के रसूख के कारण रीको के अधिकारी आंखों पर पट्टी बांधे रहे। यह हादसा सिर्फ एक आगजनी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और अवैध कारोबार के गठजोड़ का नतीजा है। हड्डियां कोयला बन गईं, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिस्टम की अंतरात्मा अभी भी जागेगी?

हल्का-फुल्का: डोटासरा को मिला 'धर्म का भाई'

सियासी तनाव के बीच एक मजेदार वाकया भी चर्चा में रहा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को उनका 'हमशक्ल' मिल गया। लाडनूं के नरेश सिंधी की शक्ल डोटासरा से इतनी मिलती है कि खुद डोटासरा ने उन्हें विधानसभा बुला लिया।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यह मेरा "धर्म का भाई" है और आने वाले चुनावों में इस 'हमशक्ल' का बखूबी इस्तेमाल किया जाएगा।

अगले सप्ताह फिर मिलेंगे राजस्थान की चिट्ठी के साथ।

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