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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान के झालावाड़ में 'ऑपरेशन शटरडाउन' के तहत पुलिस ने 51 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया।
- गिरोह ने सरकारी योजनाओं को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की फर्जीवाड़ा की।
- गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य सरगना और मास्टरमाइंड भी शामिल हैं।
- पुलिस ने अपराध में प्रयुक्त सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
- मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को सौंपी गई है।
News In Detail
राजस्थान के झालावाड़ जिले में चलाए गए 'ऑपरेशन शटरडाउन' के तहत पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी गिरोह को इंटरनेट एक्सेस और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे थे। अब तक इस मामले में गिरफ्तार अभियुक्तों की कुल संख्या 51 हो गई है।
ऑपरेशन शटरडाउन की शुरुआत
यह ऑपरेशन एक छोटी सी शिकायत से शुरू हुआ। इसमें 'आशिक अली' नामक व्यक्ति के खिलाफ शिकायत मिली थी। शिकायत में PM किसान योजना और सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की बात सामने आई थी। पुलिस ने जांच की और इसके बाद देश में पहली बार एक विशाल संगठित साइबर धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया। इसने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को निशाना बनाया था।
सरकारी पोर्टल को करते थे हैक
जांच में यह सामने आया कि गिरोह के मुख्य सरगना रामावतार सैनी और मास्टरमाइंड विक्रम सैनी ने सरकारी आईडी के पासवर्ड तोड़ने के लिए सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल किया। ओटीपी बाइपास करके इन दोनों ने सरकारी सिस्टम में लॉगिन किया और लाखों अपात्र लाभार्थियों को पात्र सूची में जोड़ दिया। इसके द्वारा सरकारी राजकोष से करोड़ों रुपये की राशि का गबन किया गया।
कैसे करते थे मदद
ताजा कार्रवाई के तहत पुलिस ने गिरोह को इंटरनेट एक्सेस देने वाले तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी गिरोह को तकनीकी बैकअप और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में मदद कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इनका इस्तेमाल अपराध में किया गया था। तीनों आरोपी फिलहाल तीन दिन के पुलिस रिमांड पर हैं।
अब तक 51 गिरफ्तारी
अब तक इस ऑपरेशन में 51 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें गिरोह के सरगना और मास्टरमाइंड शामिल हैं। करोड़ों रुपये की राशि और हजारों फर्जी बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। 48 आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं।
आगे की जांच
मामले की गंभीरता और इसके अंतर्राज्यीय नेटवर्क को देखते हुए, पुलिस महानिदेशक (DGP) ने यह मामला स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को सौंप दिया है। इस ऑपरेशन में झालावाड़ पुलिस की साइबर कंट्रोल रूम टीम, थाना खानपुर, थाना सुनेल और दौसा पुलिस की जिला स्पेशल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक ने टीम के साइबर विशेषज्ञों की तकनीकी दक्षता की सराहना की है।
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