बहू भी बेटी समान, राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति की बाधाएं हटाईं

Mukesh Sharma | Apr 17, 2026, 14:14 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाईकोर्ट ने बहू को भी अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार दिया है। हाई कोर्ट ने बहू और बेटी को माना एक समान। कोर्ट ने विभाग को 30 दिनों में नियुक्ति देने का दिया आदेश।

News In Short

  • राजस्थान हाईकोर्ट ने बहू को अनुकंपा नियुक्ति का दिया अधिकार ।
  • कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी विभाग को 30 दिनों में नियुक्ति देने का दिया आदेश।
  • जस्टिस रवि चिरानिया ने विभाग के बार-बार तकनीकी आपत्तियां उठाने को बताया गैरकानूनी।
  • हाईकोर्ट ने कहा कि बहू की स्थिति बेटी से कमतर नहीं है, विशेषकर जब परिवार पर आश्रित हो।
  • हाईकोर्ट ने विभाग को अगले 45 दिनों में अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के दिए निर्देश।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बहू भी परिवार का अभिन्न हिस्सा है। वह अनुकंपा नियुक्ति की पूर्ण हकदार है। जस्टिस रवि चिरानिया ने सुंदरी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।



अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि जब वर्ष 2023 में ही हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच यह तय कर चुकी है कि बहू को बेटी के समान ही अधिकार प्राप्त हैं, तो विभाग द्वारा बार-बार तकनीकी आपत्तियां उठाना पूरी तरह गैर कानूनी और अनुचित है।



न्यायिक स्पष्टता और बहू के अधिकार

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि परिवार में बहू की स्थिति किसी भी तरह से बेटी से कमतर नहीं हैl विशेषकर तब जब परिवार के अन्य सदस्य उस पर आश्रित हों।



याचिकाकर्ता के ससुर की मृत्यु 2016 में हुई थी और पति की मृत्यु 2020 में हो गई, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी सुंदरी देवी पर आ गई। कोर्ट ने माना कि ऐसे संवेदनशील मामलों में विभाग का अड़ियल रवैया आश्रित परिवार की मुश्किलों को और बढ़ाने वाला है।



विभाग की लापरवाही पर फटकार

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि स्थापित कानूनों की जानकारी होने के बावजूद विभाग ने वही पुरानी आपत्तियां दोहराईं जिन्हें हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। जस्टिस चिरानिया ने चेतावनी दी कि प्रशासन को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है और न्यायिक मिसालों का सम्मान करना चाहिए। विभाग की इस देरी को अदालत ने न्याय की राह में एक अनावश्यक बाधा के रूप में देखा।



नियुक्ति के लिए समय-सीमा का निर्धारण

अदालत ने पीडब्ल्यूडी विभाग को सख्त निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को बिना किसी तकनीकी अड़चन के 30 दिनों के भीतर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रक्रिया में एक दिन की भी देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि विभाग नियुक्ति देने में विफल रहता है या जानबूझकर देरी करता है, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही की जाएगी।



जवाबदेही और अनुपालना रिपोर्ट

प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने विभाग को अगले 45 दिनों के भीतर अदालत में पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि जिम्मेदार अधिकारियों को अब व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस फैसले से राज्य में उन कई महिलाओं को राहत मिलेगी जो समान परिस्थितियों में तकनीकी आधार पर अपने हक से वंचित हैं l



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