राजस्थान हाईकोर्ट का कड़ा रुख: डिस्कॉम चेयरमैन आरती डोगरा के खिलाफ ACB जांच के आदेश

Mukesh Sharma | Apr 23, 2026, 20:46 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाईकोर्ट ने डिस्कॉम चेयरमैन आरती डोगरा के खिलाफ एसीबी जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि एक अधिकारी की पदोन्नति रोकने के लिए जानबूझकर जांच लंबित रखी गई, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। रोस्टर संधारण में विफलता को भी गंभीर माना गया है।

News In Short

  • अदालत ने कहा-जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी निर्णय न लेना गंभीर संकेत।
  • याचिकाकर्ता को प्रमोट होने से रोकने के लिए DPC से ठीक पहले थमाई गई चार्जशीट।
  • हाईकोर्ट ने कहा-CMD रोस्टर रजिस्टर संधारण और अदालती निर्देशों के पालन में रहीं विफल।
  • भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश।

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने एसीबी को डिस्कॉम चैयरमेन आईएएस आरती डोगरा के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस रवि चिरानिया ने यह आदेश आरके मीणा की याचिका पर दिए।



अदालत ने कहा है कि डिस्कॉम चैयरमेन ने याचिकाकर्ता के खिलाफ जानबूझकर महीनों तक जांच पर निर्णय नहीं लिया। इससे मामले में भ्रष्टाचार की आशंका नजर आती है। एसीबी मामले में तीन माह में जांच करके रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने कहा है कि लगता है कि सीएमडी अपने कर्त्तव्यों की पालना करने में विफल रही हैं।



याचिका दायर करने के बाद थमाई तीन चार्जशीट

याचिकाकर्ता के एडवोकेट अजातशत्रु मीणा और मोविल जीनवाल ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने साल 2022-23 की डीपीसी को चुनौती देते हुए दिसंबर 2023 में कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि विभाग सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और डीओपी के सर्कुलर के बावजूद बिना रोस्टर संधारण किए ही डीपीसी कर रहा हैं।



इस कारण उन्हें एक्सईन से सुपरीडेंट इंजीनियर के पद पर पदोन्नति नहीं मिल सकी। याचिका दायर करने के बाद याचिकाकर्ता को अलग-अलग कारणों से तीन चार्जशीट दे दी गई।



जानबूझकर नहीं लिया फैसला

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा है कि ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता को पदोन्नति से वंचित रखने के लिए डीसीपी से 20 दिन पहले चार्जशीट जारी की गई। वहीं जब अनुशासनात्मक अधिकारी ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी तो भी कई महीनों तक सीएमडी ने उस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया। जबकि डीसीपी चैयरमेन और अनुशासनात्मक प्राधिकारी, दोनों ही सीएमडी स्वयं हैं। ऐसे में चार्जशीट पर अंतिम निर्णय नहीं होने पर याचिकाकर्ता को आगामी डीपीसी में प्रमोशन नहीं मिल सका। जांच पूरी होने के बाद भी इतने महीनों तक फाइनल निर्णय नहीं लेना, भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता हैं। ऐसे में एसीबी इस मामले में जांच करके तीन माह में रिपोर्ट पेश करे।



रोस्टर संधारण पर मांगा शपथपत्र

सुनवाई के दौरान अदालत ने सीएमडी को निर्देश दिया था कि वे अतिरिक्त हलफनामा पेश करके यह स्पष्ट करें कि क्या रोस्टर रजिस्टर संधारित किया जा रहा है। सीएमडी के हलफनामे में रोस्टर रजिस्टर प्रस्तुत नहीं किया गया, बल्कि केवल सारणीबद्ध डेटा ही दिया गया है। इस पर कोर्ट ने मंगलवार को फिर से रोस्टर रजिस्टर सहित अतिरिक्त हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। लेकिन गुरुवार को भी सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि सीएमडी ने रोस्टर संधारण से संबंधित जानकारी नहीं दी। इस पर कोर्ट ने कहा कि लगता है कि सीएमडी अपने कर्त्तव्यों की पालना करने में विफल रही हैं।



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