हाईवे किनारे निर्माण को लेकर अब नए नियम लागू, जानिए कहां क्या नहीं बनेगा
ऐसे समझें पूरा मामला
- राजस्थान में नेशनल हाईवे के आसपास निर्माण को लेकर लागू किए नए नियम।
- हाईवे के सेंटर पॉइंट से 40 मीटर में मकान व 75 मीटर में नए कमर्शियल काम बैन।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागू की व्यवस्था, राजस्व विभाग ने जारी किए निर्देश।
- हादसे से जागा सुप्रीम कोर्ट, फलौदी में हुए भीषण सड़क हादसे परलिया था संज्ञान।
- सीकर सांसद अमराराम की आपत्ति पर केंद्रीय मंत्री ने दिया लिखित जवाब।
राजस्थान सरकार ने अब नेशनल हाईवे के आसपास निर्माण को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। राजस्व विभाग ने यह नई व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के 13 अप्रैल,2026 को दिए आदेश की पालना में की है। इसके अनुसार अब हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर में नई कमर्शियल गतिविधि व 40 मीटर में मकान बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
आदेश में कहा है कि नेशनल हाईवे के सेंटर पाइंट से 40 मीटर में किसी भी प्रकार का आवासीय निर्माण, संचालन या उपयोग व भू-उपयोग परिवर्तन पर बैन रहेगा। इसके अलावा सेंटर पॉइंट से 75 मीटर के दायरे में नए ढ़ाबे, भोजनशाला, वाणिज्यक निर्माण, संचालन तथा भू-उपयोग परिवर्तन पर प्रतिबंध होगा।
पुराने ढ़ाबे चलते रहेंगे
राजस्व विभाग के अनुसार नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर के दायरे में पहले से चल रहे ढ़ाबे व कमर्शियल गतिविधियां तो चलती रहेंगी, लेकिन नई अनुमति नहीं मिलेगी।
आदेश में पहले से बने मकानों के लिए ऐसा कोई स्पष्टीकरण नहीं है। इससे यह भ्रम बन रहा है कि पहले से बने हुए मकानों को तोड़ा जाएगा या नहीं!
फलौदी एक्सीडेंट के बाद लिया था प्रसंज्ञान
राजस्थान के फलौदी में पिछले साल दो नवंबर को हुए भीषण सड़क हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था।
इस हादसे में एक टेंपो ट्रैवलर भारतमाला हाईवे पर एक ढाबे के सामने खड़े ट्रक से टकरा गया था। इस दुर्घटना में ड्राइवर समेत 15 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस हादसे के आधार पर नेशनल हाईवे पर सुरक्षा के संबंध में स्व:प्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी।
सीकर सांसद उठाया था मुद्दा
राजस्थान में नेशनल हाईवे के नजदीक बने मकानों व कमर्शियल निर्माणों को हटाने के नोटिस दिए गए थे। राजस्थान हाई कोर्ट ने नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर के दायरे में सभी प्रकार की कमर्शियल निर्माण हटाने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश की पालना में पीडब्ल्यूडी ने नोटिस जारी कर दिए थे।
इस मामले पर सीकर से सांसद अमराराम ने एक अप्रैल, 2026 को संसद के बजट सत्र में शून्यकाल में यह मामला उठाया था। अमराराम ने इसे लाखों किसानों के हितों के विरुद्ध बताया था।
इस पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री अजय टम्टा ने 13 जुलाई 2026 को सांसद अमराराम को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसके कारणों की जानकारी दी है।
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