सास के निधन पर पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की जमानत अर्जी खारिज, SIT ने 12 घंटे तक दागे 125 सवाल
News In Short
- रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल की जमानत अर्जी खारिज।
- सुबोध ने सास के निधन पर अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।
- पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल तीन दिन के रिमांड पर एसीबी कस्टडी में।
- एसीबी की एसआईटी टीम ने सुबोध अग्रवाल से करीब 12 घंटे तक पूछताछ की।
- सुबोध अग्रवाल के लिए 125 सवालों की एक विस्तृत सूची तैयार की गई।
News In Detali
जयपुर। राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार किए गए पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष जांच टीम ने उनके खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा दिया है। हाल ही में सुबोध अग्रवाल ने अपनी सास के निधन पर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शिमला जाने की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
कोर्ट ने क्यों ठुकराई अर्जी?
सुबोध अग्रवाल के वकील द्वारा अदालत में एक प्रार्थना पत्र पेश किया गया था। इसमें मानवीय आधार पर पैरोल या अस्थाई राहत की मांग की गई थी। अर्जी में कहा गया था कि उनकी सास का शिमला में निधन हो गया है। वे उनके अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहते हैं।
हालांकि, जांच अधिकारी ने इस अर्जी का पुरजोर विरोध किया। जांच टीम ने तर्क दिया कि वर्तमान में सुबोध अग्रवाल रिमांड पर हैं और घोटाले की तह तक पहुंचने के लिए उनसे पूछताछ बेहद अनिवार्य है। जांच एजेंसी ने आशंका जताई कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर यदि आरोपी को राज्य से बाहर जाने की अनुमति दी गई, तो वह सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं या जांच की कड़ियों को जोड़ने में बाधा आ सकती है। कोर्ट ने जांच एजेंसी के तर्कों को स्वीकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
12 घंटे की मैराथन पूछताछ
एसीबी की एसआईटी टीम ने सुबोध अग्रवाल से करीब 12 घंटे तक कड़ी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने सुबोध अग्रवाल के लिए 125 सवालों की एक विस्तृत सूची तैयार की थी। यह सवाल मुख्य रूप से जल जीवन मिशन के तहत निविदाओं के आवंटन, फर्मों को अवैध लाभ पहुंचाने और रिश्वत के लेनदेन से संबंधित थे।
पूछताछ के दौरान सुबोध अग्रवाल का रवैया मिला-जुला रहा। उन्होंने बार-बार इस घोटाले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया। जब जांच दल ने कुछ विशिष्ट दस्तावेजी सबूत उनके सामने रखे, तो कई मौकों पर उन्होंने चुप्पी साध ली और सवालों के जवाब नहीं दिए।
कुछ तीखे सवालों पर वह काफी असहज नजर आए और संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला राजस्थान में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन के दौरान हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़ा है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ठेके दिए गए और विभागीय मिलीभगत से घटिया पाइपों का उपयोग किया गया।
सुबोध अग्रवाल घोटाले के समय जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव थे। उन पर आरोप है कि उनकी देखरेख और अनुमति से ही इन अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।
आगे क्या?
अग्रवाल फिलहाल 13 अप्रैल तक एसीबी की रिमांड पर हैं। एसआईटी की टीम अब उन ठेकेदारों और बिचौलियों से भी उनके संबंधों की कड़ियां जोड़ रही है, जिनका नाम इस घोटाले में सामने आया है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है, क्योंकि एसआईटी अब उनके बैंक खातों और अघोषित संपत्तियों के विवरण भी खंगाल रही है।
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