राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी, क्या कांग्रेस अपनी सीट सुरक्षित रख पाएगी?
News In Short
- राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं जून में।
- अभी भाजपा के दो और कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद।
- सब कुछ ठीक रहा तो चुनाव में कुछ ऐसे ही नतीजे आएंगे।
- भाजपा ने किसी निर्दलीय को समर्थन दिया तो बिगड़ सकते हैं समीकरण।
- राजनीतिक विशेषज्ञों की भाजपा की चुनाव रणनीति पर टिकी है नजर।
News In Detail
राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई है। जून महीने में राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटें खाली होने वाली हैं। इनमें दो सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पास है। सब कुछ ठीक रहा तो मौजूदा विधायकों की संख्या के अनुसार इस बार भी यही स्थिति रहने की संभावना है। लेकिन, तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों पर आए चौकाने वाले परिणामों के बाद सभी की नजरें राजस्थान पर टिकी है। वर्तमान में राजस्थान में राज्यसभा की कुल 10 सीटों में से 5 सीट पर भाजपा और 5 पर कांग्रेस काबिज है।
क्या रवनीत को दुबारा मिलेगा टिकट
कांग्रेस के नीरज डांगी, भाजपा से राजेंद्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून 2026 को पूरा हो रहा है। रवनीत का अगस्त 2024 में निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल का केरल से लोकसभा चुनाव जीतने के कारण सीट रिक्त हुई थी।
रवनीत फिलहाल केंद्र में रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री हैं। रवनीत कांग्रेस नेता और पंजाब के पूर्व सीएम दिवंगत बेअंत सिंह के पोते हैं। वह मार्च 2024 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। रवनीत को पिछले दिनों राहुल गांधी ने संसद में प्रदर्शन के दौरान गद्धार दोस्त कह दिया था। इसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा हर हाल में उन्हें राजस्थान से ही राज्यसभा में भेजेगी।
उम्मीदवारों ने शुरु की भागदौड़
जून में खाली होने वाली तीन सीट के लिए मई में चुनाव होंगे। दोनों ही पार्टियों में उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी गणित बैठाना शुरू कर दिया है। भाजपा में उम्मीदवारों का फैसला पीएम और गृहमंत्री ही करेंगे, यह तय है। हालांकि इसमें आरएसएस की भूमिका भी रहेगी। कांग्रेस में उम्मीदवार के सलेक्शन में आलाकमान विशेषकर राहुल गांधी की भूमिका प्रमुख रहेगी। हालांकि, उम्मीदवार चयन में कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की पसंद चल सकती है।
यह होगा जीतने की गणित
राजस्थान में राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए प्रत्याशी को प्रथम वरीयता के कम से कम 51 वोट की आवश्यकता होगी। राजस्थान विधानसभा में अभी भाजपा के 118 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 67 विधायक हैं। इन आंकडों के अनुसार भाजपा दो सीट और कांग्रेस एक सीट जीत लेगी। तीसरा उम्मीदवार नहीं होने की स्थिति में तीनों निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं।
भाजपा के लिए तीसरी सीट दूर की कौड़ी
राजस्थान विधानसभा में भाजपा के 118 और कांग्रेस के 67 विधायक हैं। चुनाव होने की स्थिति में दोनों की पार्टी के पास अपने-अपने उम्मीदवारों को प्रथम वरीयता के वोट देने के बाद 16-16 अतिरिक्त वोट बचेंगे। यदि भाजपा ने किसी निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देकर मैदान में उतार दिया तो इस उम्मीदवार को जीतने के लिए 20 वोट चाहिए होंगे। क्यों कि भाजपा ने अपने प्रथम वरीयता के 16 वोट के साथ ही निर्दलीयों के 08,बीएसपी के 02,भारत आदिवासी पार्टी के 04 और आरएलपी के एक उम्मीवार को भी वोट देने को राजी कर लिया तो भी कुल 31 वोट होंगे जो जीत के लिए जरुरी 51 में से 20 वोट कम होंगे। यह 20 वोट उसे कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग से मिल सकते हैं ,लेकिन यह दूर की कौड़ी लगता है। भाजपा किसी भी स्थिति में कांग्रेस के 20 विधायकों को फिलहाल तो नहीं तोड़ सकती। वैसे भी अन्य राज्यों के मुकाबले राजस्थान में कांग्रेस की स्थिति बेहतर है। ऐसे में राजस्थान में भाजपा के लिए तीसरी सीट जीतना दूर की कौड़ी ही है।
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