कांग्रेस कार्यालय बना अखाड़ा, धारीवाल और गुंजल समर्थकों के बीच जमकर धक्का-मुक्की

Mukesh Sharma | Apr 11, 2026, 17:39 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के कोटा में कांग्रेस की बैठक में शांति धारीवाल और प्रहलाद गुंज के समर्थकों के बीच जमकर धक्का—मुक्की हुई। भारी हंगामे के बाद बैठक खत्म कर दी गई।

News In Short

  • कोटा में कांग्रेस की बैठक हंगामे और आपसी धक्का-मुक्की की भेंट चढ़ी।
  • शांति धारीवाल और प्रहलाद गुंजल के समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की।
  • बैठक कांग्रस को कोटा में अधिक मजबूत करने पर मंथन के लिए बुलाई थी।
  • विवाद स्वागत भाषण में प्रहलाद गुंजल का नाम नहीं लेने से भड़का।
  • हंगामे के कारण बैठक को आनन-फानन में किया समाप्त।

News In Detail

Kota: राजस्थान के कोटा में कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी उस समय चरम पर पहुंच गई, जब संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ अभियान के तहत बुलाई बैठक हंगामे और आपसी धक्का-मुक्की की भेंट चढ़ गई। शहर और देहात कांग्रेस की इस संयुक्त बैठक में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल के समर्थकों के बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई।



​क्यों हुआ विवाद

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई, जब शहर जिला अध्यक्ष राखी गौतम मंच से संबोधन दे रही थीं। उन्होंने अग्रिम पंक्ति में बैठे वरिष्ठ नेताओं का स्वागत किया, लेकिन कोटा के दिग्गज कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल का नाम नहीं लिया। इसे अपनी उपेक्षा मानते हुए गुंजल समर्थक भड़क गए। उन्होंने मौके पर ही विरोध जताना शुरू कर दिया।



जवाब में शांति धारीवाल के समर्थकों ने भी नारेबाजी शुरू कर दी। दोनों गुटों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि बैठक के मुख्य अतिथि, जिला प्रभारी एवं पीसीसी महासचिव पुष्पेंद्र भारद्वाज के सामने ही कार्यकर्ता एक-दूसरे से उलझ गए। हंगामे के कारण प्रभारी को अपना संबोधन बीच में ही रोकना पड़ा और बैठक को आनन-फानन में समाप्त कर दिया गया।



​भीतर की लड़ाई सड़क तक पहुंची

​कांग्रेस कार्यालय के अंदर शुरू हुआ यह विवाद शांत होने के बजाय बाहर तक फैल गया। स्थिति इतनी भयावह थी कि वहां मौजूद महिला कार्यकर्ता और महिला नेता डर के मारे एक कमरे के अंदर बंद हो गईं और काफी देर तक बाहर नहीं निकलीं।


वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामले को शांत करने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ताओं का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।



बाद में जब अतिथियों को माला पहनाने का कार्यक्रम शुरू हुआ तो प्रहलाद गुंजल को फिर से बुलाया गया, लेकिन उन्होंने यह कहकर इनकार कर दिया कि वे पहले ही माला पहन चुके हैं। इस बात पर फिर नारेबाजी और गर्मागर्मी का माहौल बन गया।



​गुटबाजी पर चिंता

​इस पूरी घटना पर पार्टी के भीतर अलग-अलग सुर देखने को मिले। कांग्रेस के कोटा प्रभारी ​पुष्पेंद्र भारद्वाज ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि गुटबाजी की वजह से ही पूरे देश में पार्टी कमजोर हो रही है। हम संगठन को मजबूत करने आए थे, लेकिन यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है।



कांग्रेस नेता ​प्रहलाद गुंजल ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करते हुए कहा कि कोई गुटबाजी नहीं है, बस कुछ कार्यकर्ताओं के बीच गलतफहमी हो गई थी।



शहर जिला अध्यक्ष ​राखी गौतम ने स्पष्ट किया कि सब साथ मिलकर सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। छोटी-मोटी बातों को तूल नहीं दिया जाना चाहिए।



​संगठन की मजबूती पर सवाल

यह बैठक आगामी निकाय और पंचायत चुनावों के मद्देनजर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए बुलाई गई थी। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देशानुसार अप्रैल महीने के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जानी थी, लेकिन आपसी कलह ने पार्टी की रणनीतियों पर पानी फेर दिया।



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