महाराजा और महारानी कॉलेज की जमीन पर फिर मिला हक, कलेक्टर कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
News In Short
- जयपुर जिला कलेक्टर न्यायालय का बड़ा आदेश।
- महाराजा और महारानी कॉलेज को मिली जमीन।
- यह जमीन जेडीए व निगम के नाम हो गई थी।
- राजस्थान विश्वविद्यालय ने दर्ज कराई थी आपत्ति।
- जमीन का मामला विधानसभा व सिंडीकेट में भी गूंजा।
News In Short
Jaipur: राजस्थान विश्वविद्यालय के लिए राहत भरी खबर है। जिला कलेक्टर न्यायालय ने लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के अनुसार जेडीए और नगर निगम के नाम दर्ज की गई जयपुर के महाराजा एवं महारानी कॉलेज की बेशकीमती जमीन फिर से राजस्थान विश्वविद्यालय के स्वामित्व में आएगी।
विवाद की जड़ में राजस्व रिकॉर्ड
मामला तब शुरू हुआ, जब राजस्व रिकॉर्ड में एक तकनीकी खामी के कारण विश्वविद्यालय की जमीन जेडीए और नगर निगम के नाम हस्तांतरित हो गई। इस विसंगति को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय निकायों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। रिकॉर्ड के अनुसार जयपुर में महारानी कॉलेज 29 बीघा 17 बिस्वा और महाराजा कॉलेज 48 बीघा 10 बिस्वा जमीन पर स्थित है। यानी लगभग 78 बीघा 07 बिस्वा भूमि वर्ष 2015 में राजस्व रिकॉर्ड में विश्वविद्यालय के नाम दर्ज की गई थी।
मजार विवाद से खुला राज
इस पूरे भूमि विवाद का खुलासा तब हुआ, जब महारानी कॉलेज परिसर में स्थित मजारों को लेकर विवाद खड़ा हुआ। पिछले वर्ष जब कॉलेज के राजस्व रिकॉर्ड की जांच की गई तो चौंकाने वाला यह तथ्य सामने आया कि कॉलेज की जमीन का स्वामित्व कागजों में नगर निगम के पास चला गया है।
यूनिवर्सिटी की कुलगुरु अल्पना कटेजा ने बताया कि मई 2025 में यह मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ। इसके बाद जिला कलेक्टर के यहां अपील दायर की गई और विश्वविद्यालय के पक्ष में सभी पुख्ता साक्ष्य पेश किए गए।
विधानसभा और सिंडिकेट में गूंजा मुद्दा
यह मामला केवल कानूनी गलियारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर भी इसे लेकर काफी गहमागहमी रही। हाल ही में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया गया था। विश्वविद्यालय के पेंशनर्स, शिक्षकों, पूर्व विद्यार्थियों और वर्तमान छात्रों ने अपनी विरासत बचाने के लिए बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया था। विश्वविद्यालय की सिंडिकेट और सीनेट बैठकों में गलत नामांतरण का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। कुलगुरु ने आश्वासन दिया था कि प्रशासन अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
संशय पर लगा विराम
इस जीत पर खुशी जाहिर करते हुए कुलगुरु अल्पना कटेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी संपत्ति और विरासत की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह हमारी सामूहिक जीत है।
इस फैसले से न केवल राजस्थान विश्वविद्यालय की करोड़ों की भूमि सुरक्षित हुई है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता और उनकी विरासत को लेकर चल रहे संशय पर भी विराम लग गया है। प्रशासन अब इन जमीनों के उचित रखरखाव और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।
ये भी पढे़:-
सचिन पायलट और टीना डाबी 'डिजिटल धमक' में किसी से कम नहीं, जानिए किसकी कितनी 'रीच'
एसआई भर्ती परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट से आरपीएससी को राहत, 2.25 लाख अभ्यर्थियों का सपना टूटा