गहलोत ने पीसीआई को भेजा जवाब, पत्रकार झालानी को हिरासत में लेने का है मामला
News In Short
- पत्रकार महेश झालानी को हिरासत में लेने के मामले में अशोक गहलोत ने दिया जवाब।
- भारतीय प्रेस परिषद ने इस मामले में गहलोत और कई अधिकारियों से मांगा था जवाब।
- गहलोत ने किया खुद का बचाव, बोले-वे प्रेस की स्वतंत्रता के रहे हैं पक्षधर।
- जांच में पुलिस की कार्रवाई को माना गया था अमानवीय कृत्य।
- पत्रकार झालानी बोले, वे गहलोत के स्पष्टीकरण से पूरी तरह असहमत।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय प्रेस परिषद (PCI) को तीन पेज का अपना स्पष्टीकरण भेजा है। मामला जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने से जुड़ा है। इस मामले में पीसीआई ने अशोक गहलोत, तत्कालीन जनसंपर्क निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा, तत्कालीन एसपी राजन दुष्यंत और संबंधित पुलिस अधिकारियों से व्यक्तिगत जवाब मांगा था।
क्या है पूरा मामला?
घटनाक्रम के अनुसार चित्तौड़गढ़ से आए पुलिस दल ने जयपुर स्थित महेश झालानी के निवास पर देर रात छापेमारी की थी। परिजनों और पत्रकार का आरोप है कि पुलिस ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर झालानी को उनके घर से अर्धनग्न अवस्था में जबरन उठाया।
महेश झालानी लंबे समय से मधुमेह (डायबिटीज) जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ रहे हैं। आरोप है कि हिरासत के दौरान उन्हें न तो आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं दी गईं और न ही भोजन उपलब्ध कराया गया। इस क्रूरता के कारण उनकी स्थिति काफी नाजुक हो गई थी, जिसे लेकर मानवाधिकार संगठनों और पत्रकार बिरादरी ने गहरी नाराजगी दिखाई थी।
प्रेस काउंसिल की सख्ती और पूर्व मुख्यमंत्री का जवाब
इस मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने कड़ा रुख अपनाया था। परिषद ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, तत्कालीन जनसंपर्क निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा, तत्कालीन एसपी राजन दुष्यंत और संबंधित पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
हाल ही में पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने प्रेस काउंसिल को भेजे जवाब में अपना बचाव किया है। उन्होंने तीन पेज के पत्र में कहा है कि उन्होंने दशकों तक राजस्थान की जनता की सेवा की है। हमेशा प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र के लिए अपरिहार्य माना है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी पत्रकार या मीडिया संस्थान ने कभी भी सरकार द्वारा सेंसरशिप या संपादकीय स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का आरोप नहीं लगाया।
हालांकि, इस जवाब को लेकर पत्रकार महेश झालानी ने अपनी कड़ी असहमति व्यक्त की है। झालानी का कहना है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में एक वरिष्ठ पत्रकार को दी गई मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। वे इस स्पष्टीकरण से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं।
जांच रिपोर्ट में अवैध करार दी गिरफ्तारी
इस मामले में सबसे अहम मोड़ वर्तमान मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर हुई उच्चस्तरीय जांच के बाद आया। सूत्रों के अनुसार इस जांच रिपोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को अमानवीय कृत्य करार दिया।
जांच में कहा गया कि पुलिस की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी तरह से गैरकानूनी थी। वरिष्ठ नागरिक और पत्रकार के स्वास्थ्य अधिकारों का उल्लंघन किया गया। रात के समय घर में घुसकर की गई इस कार्रवाई में उचित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
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