अजमेर में खामेनेई के लिए मातम, शिया समुदाय ने किया तीन दिन का शोक घोषित

Ashish Bhardwaj | Mar 02, 2026, 14:22 IST
Photograph: (the sootr)
ईरान में अमेरिकी और इजरायली हमले में धार्मिक नेता ख़ामेनेई की मौत पर राजस्थान में शिया समुदाय ने तीन दिन का मातम घोषित किया हैं। खामेनेई की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन हुए।

News In Short

  • अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के धार्मिक नेता खामेनेई की मौत हो गई।
  • राजस्थान में शिया समुदाय ने खामेनेई की मौत पर तीन दिन के शोक का ऐलान किया।
  • अजमेर समेत कई शहरों में शिया समुदाय ने कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन किए।
  • शिया धर्मगुरु ने कुरान पाठ और श्रद्धांजलि अर्पित करने का आयोजन किया।
  • विरोध प्रदर्शन के दौरान ट्रंप और नेतन्याहू के पुतलों को जलाया गया।

News In Detail

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान में किए गए संयुक्त सैन्य हमले के बाद राजस्थान में भी गहरी प्रतिक्रिया हो रही है। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु हो गई। खामेनेई की मौत को लेकर अजमेर में शिया समुदाय ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है। इसके तहत कई विरोध प्रदर्शन और शोक सभाओं का आयोजन किया गया।



राजस्थान में शोक की अवधि

राजस्थान के अजमेर और अन्य शहरों में शिया समुदाय के लोग हाथों में मोमबत्तियाँ लेकर कैंडल मार्च में शामिल हुए। इन मार्चों का उद्देश्य खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित करना और उन्हें याद करना था। शिया धर्मगुरु मौलाना काजिम अली जैदी ने तीन दिन के शोक का ऐलान करते हुए कहा कि इस दौरान खामेनेई और उनके अनुयायियों की शहादत को याद किया जाएगा। साथ ही कुरान का पाठ किया जाएगा और श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।





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अमेरिका और इजरायल के विरोध में प्रदर्शन

इस शोक के दौरान शिया समुदाय ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां थामकर और नारे लगाकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अपना विरोध प्रकट किया। न केवल नारेबाजी की गई, बल्कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पुतले भी फूंके। इस विरोध प्रदर्शन को लेकर आयोजकों ने कहा कि यह शांतिपूर्ण और संयमित तरीके से हुआ है और प्रशासन से अनुमति लेकर ही कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।



तीन दिन के शोक का महत्व



खामेनेई की मौत शिया समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। उनकी मौत के बाद उनके समर्थकों का कहना है कि यह एक अपूरणीय शोक है। यह शहादत हमेशा याद रखी जाएगी। रमजान के महीने में हुई इस शहादत ने धार्मिक समुदाय को और भी अधिक प्रभावित किया है।



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