खाने को नहीं थे पैसे फिर भी जिद पर अड़े रहे संजू सैमसन, जानें कैसे केरल का लड़का बना भारत का सितारा

केरल के एक साधारण परिवार से निकले संजू सैमसन आज क्रिकेट जगत का बड़ा नाम हैं। बचपन में गरीबी और भूख का सामना करने वाले संजू ने कभी हार नहीं मानी। संजू सैमसन का राजस्थान से भी खास कनेक्शन है।

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Aman Vaishnav
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केरल के तिरुवनंतपुरम शहर में 11 नवंबर 1994 को संजीत सैमसन जन्म का एक साधारण परिवार में हुआ था। संजीत को दुनिया अब संजू सैमसन के नाम से जानती है। संजू के पिता सुनील कुमार केरल पुलिस में कांस्टेबल थे और मां सोनी एक गृहिणी थीं। ESPNcricinfo (क्रिकेट वेबसाइट) के मुताबिक संजू का परिवार असल में राजस्थान के उदयपुर से था। पिता की नौकरी के चलते वे केरल में बस गए थे।

बचपन से ही संजू को क्रिकेट का बहुत शौक था। उनके पिता बताते हैं कि संजू ने तीन साल की उम्र से ही गली क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। संजू घर की बालकनी से गेंद फेंककर प्रैक्टिस करते थे। हालांकि जीवन ने उन्हें जल्द ही संघर्ष भी सिखाया।

संजू- भूखा भी रहा तो भी मैदान पर खेलता था

संजू के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। The Hindu की एक रिपोर्ट में संजू ने बताया था कि बचपन में वे अक्सर भूखे सोते थे। जब वे 10 साल के थे तो एक दिन केरल के क्लब में क्रिकेट प्रैक्टिस के बाद उनके पास खाने के पैसे नहीं थे। कोच ने उन्हें रोटी दी थी लेकिन संजू ने उसे अपने दोस्तों के साथ बांट दिया था। ये घटना उनकी इंसानियत को दिखाती है कि हमेशा दूसरों की मदद करना चाहिए।

संजू ने Indian Express को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि, मैंने कभी हार नहीं मानी। क्रिकेट मेरी जिंदगी थी। में भूखा भी रहा तो मैदान पर खेलता था। परिवार ने कर्ज लेकर संजू की ट्रेनिंग जारी रखी थी। उनके पिता सुनील ने अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा बेटे के क्रिकेट गियर पर खर्च किया।

2010 से शुरु हुआ संजू का सफर

संजू को 13 साल की उम्र में केरल की अंडर-13 टीम में जगह मिल गई थी। यही वह समय था जब उनकी असली प्रतिभा उभरकर सामने आई थी। वो विकेटकीपर बल्लेबाज थे और बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज भी थे। 2008 में उन्होंने केरल अंडर-13 टीम की कप्तानी की और टीम ने जीत हासिल की।

संजू की असली सफलता 2010 में आई, जब 15 साल की उम्र में उन्हें भारतीय अंडर-19 टीम में चुना गया था। ESPNcricinfo के आंकड़ों के अनुसार, संजू ने 2010-11 रणजी ट्रॉफी में केरल के लिए डेब्यू किया था। संजू ने अपने पहले मैच में 32 रन बनाए थे। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने स्काउट्स का ध्यान आकर्षित किया था।

संजू में विराट कोहली जैसा जुनून

2013 संजू सैमसन के लिए बहुत ही खास साल था। आईपीएल 2013 की नीलामी में राजस्थान रॉयल्स (RR) ने उन्हें 10 लाख रुपए में खरीदा था। उससे पहले उसी साल फरवरी में संजू ने इंग्लैंड के खिलाफ भारत ए टीम के लिए डेब्यू किया था। संजू ने पहले ही मैच में शतक जड़ दिया था। आईपीएल में अपने डेब्यू मैच में 63 रन बनाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वो पूरी तरह से तैयार हैं।

Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान रॉयल्स के कोच ने कहा था कि, संजू में विराट कोहली जैसा जुनून है। साल 2013 में संजू को भारतीय टेस्ट टीम में भी जगह मिली थी। 2014 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए उन्हें चुना गया था। हालांकि वे खेल नहीं पाए थे। साल 2013 में ही केरल का लड़का पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चमका था।

लाइफ का टर्निंग पॉइंट, पिता बोले क्रिकेट लंबी दौड़ है

संजू की सफलता आसान नहीं थी। IPL 2015-16 में उन्हें चोट लगी और फॉर्म भी गिरने लगा था। इस वजह से सिलेक्टर्स ने उन्हें टीम से बाहर कर दिया था। संजू ने The Times of India से बातचीत में बताया, मैंने सोचा कि अब सब खत्म हो गया है। घर वापस लौटने पर मेरे पिता ने कहा संजू क्रिकेट एक लंबी दौड़ है एक मैराथन है।

इसके बाद संजू ने अपनी तकनीक पर काम किया था। विकेटकीपिंग में सुधार किया और फिटनेस पर ध्यान दिया था। 2018 में उन्हें एशिया कप के लिए वनडे टीम में वापस बुलाया गया था। 2020 में संजू ने IPL में शानदार प्रदर्शन किया था। संजू ने 14 मैचों में 375 रन बनाए थे। संजू का औसत 41.66 रहा था। 

सबसे बड़ा पल 2021 में आया

17 नवंबर 2021 को न्यूजीलैंड के खिलाफ T20I सीरीज हुई थी। तीसरे T20I मैच में संजू सैमसन ने भारतीय टीम के लिए अपनी पहली पारी खेली थी। इस मैच में उन्होंने सिर्फ 40 गेंदों पर 82 रन बनाकर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई थी। इस पारी में उन्होंने 6 छक्के और 7 चौके भी मारे थे। आईपीएल की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक यह भारतीय विकेटकीपर का T20I में सबसे तेज अर्धशतक था।

संजू ने खुद कहा यह मेरे लिए एक सपना था। बचपन में मैं टीवी पर ऐसे शॉट्स देखा करता था। इसके बाद 2022 में श्रीलंका के खिलाफ T20I सीरीज में उन्होंने टीम की कप्तानी की थी। तीन मैचों में संजू ने 74 रन बनाए थे। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी वे भारतीय स्क्वाड का हिस्सा थे।

वही बनना चाहता हूं जो मेरे कोच मेरे लिए बने: संजू

संजू की कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है। वो समाजिक कार्यों में भी बहुत सक्रिय रहते हैं। 2018 के केरल फ्लड्स में उन्होंने राजस्थान रॉयल्स की तरफ से लाखों रुपए दान किए थे। COVID-19 के दौरान उन्होंने ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर भी बांटे थे।

Indian Express की एक रिपोर्ट में बताया गया कि संजू ने अपने गांव में एक क्रिकेट एकेडमी भी खोली है। यहां गरीब बच्चों को मुफ्त में ट्रेनिंग दी जाती है। वे कहते हैं मैं वही बनना चाहता हूं जो मेरे कोच मेरे लिए बने। साल 2024 में संजू सैमसन की शादी बचपन की दोस्त चारुलता रमेश के साथ हुई। इसके बाद IPL में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान बने।

सिलेक्ट होने पर घबराए नहीं

आज संजू सैमसन IPL के टॉप स्कोरर्स में शुमार हैं। 2024 IPL में शानदार 531 रन बनाए थे। संजू अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 T20I, 6 ODI खेले हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत धैर्य है। सिलेक्ट न होने पर भी वे रणजी, डोमेस्टिक क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाते रहे थे। ESPNcricinfo के आंकड़ों के मुताबिक संजू के नाम लिस्ट A क्रिकेट में सबसे तेज शतक (48 गेंद) है।

क्रिकेट एक खेल नहीं, जिंदगी जीने का जज्बा है

संजू की कहानी सिखाती है कि जड़ें मजबूत हों, मेहनत सच्ची हो, तो कोई सपना बड़ा नहीं होता। केरल की गलियों से उठकर वे भारत के स्टार बने। इससे युवा पीढ़ी के लिए संदेश है कि  हार मत मानो मैदान पर डटे रहो। संजू सैमसन साबित करते हैं कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, जिंदगी जीने का जज्बा है।

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