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Photograph: (the sootr)
New Delhi.आजकल सोशल मीडिया पर वायरल होना बहुत ही आसान काम हो गया है। टी20 वर्ल्ड कप के दौरान स्टैंड्स में बैठी एक लड़की ने सबका ध्यान खींचा है। नीली टी-शर्ट में उसकी मुस्कान देखकर इंटरनेट पर जैसे फैंस की बाढ़ आ गई थी। लोग उसे 'नेशनल क्रश' और 'क्रिकेट की क्यूटी' कहने लगे और चर्चा शुरू हो गई।
देखते ही देखते इंस्टाग्राम पर उसके फॉलोअर्स की गिनती रॉकेट की तरह ऊपर भागने लगी। लेकिन जैसे-जैसे तस्वीरें वायरल हुईं, वैसे-वैसे लोगों के मन में बड़े सवाल भी आए।
क्या आयरा रावत वाकई में एक जीती-जागती इंसान हैं?
भारत और अमेरिका के मैच के बाद आयरा की तस्वीरें हर जगह दिखने लगी थीं। उनकी स्किन इतनी साफ और चमक इतनी ज्यादा थी कि लोगों को शक हुआ। कई टेक एक्सपर्ट्स ने दावा किया कि ये तस्वीरें किसी कैमरे से नहीं ली गईं। उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें दरअसल एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI द्वारा बनाई गई हैं। अगर आप ध्यान से देखें, तो उनकी आंखों और बैकग्राउंड में कुछ अजीब सा परफेक्शन है। सोशल मीडिया पर अब ये बहस छिड़ गई है कि आयरा असली हैं या वर्चुअल।
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AI डिटेक्टर्स ने खोली इस चमक-धमक की पोल
जब आयरा की तस्वीरों को AI डिटेक्टर टूल्स के जरिए चेक किया गया, तो चौंकाने वाली बात आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन तस्वीरों में AI जेनरेटेड होने के काफी ज्यादा संकेत मिले हैं। चेहरे पर कोई भी पसीना, दाग या नेचुरल स्किन टेक्सचर नहीं दिख रहा था।
इंटरनेट पर लोग अब पूछ रहे है कि क्या हमें बेवकूफ बनाया जा रहा है? क्या कोई असली इंसान स्टेडियम में बैठा ही नहीं था और बस सॉफ्टवेयर का खेल था? यह मामला अब केवल एक फोटो का नहीं, बल्कि डिजिटल धोखे का तरीका बन गया है।
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वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स की दुनिया और करोड़ों का कारोबार
आपको बता दें कि आयरा रावत अकेली ऐसी मिस्ट्री या वर्चुअल चेहरा नहीं हैं। दुनिया भर में अब 'वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स' का एक बहुत बड़ा और तगड़ा मार्केट बन चुका है। ये डिजिटल किरदार 3D मॉडलिंग और ग्राफिक सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार किए जाते हैं। ये सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हैं और बड़े-बड़े ब्रांड्स का प्रमोशन भी करते हैं।
ताज्जुब की बात ये है कि ये कभी असल दुनिया में मौजूद ही नहीं होते। फिर भी इनके पास लाखों फॉलोअर्स और करोड़ों रुपए की कमाई करने की ताकत है।
कैसे चलता है AI इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का ये बड़ा बिजनेस?
मार्केट रिपोर्ट्स की मानें तो इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का बाजार साल दर साल बढ़ता जा रहा है। साल 2026 तक यह मार्केट लगभग 40 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। बड़ी कंपनियां अब असली सेलिब्रिटीज के बजाय इन वर्चुअल किरदारों पर पैसा लगा रही हैं। इसका कारण यह है कि इन्हें मैनेज करना आसान है और ये कभी थकते नहीं। Lil Miquela जैसी वर्चुअल इन्फ्लुएंसर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो करोड़ों रुपए कमाती है। आयरा रावत का मामला भी इसी ट्रेंड की तरफ इशारा करता हुआ लग रहा है।
क्या आयरा रावत का कोई आधिकारिक वजूद या सोर्स है?
अभी तक किसी भी बड़े न्यूज पोर्टल या ऑफिशियल क्रिकेट बोर्ड ने इसकी पुष्टि नहीं की। आयरा के अकाउंट से शेयर की गई लोकेशन और तस्वीरें काफी ज्यादा सस्पेंस पैदा करती हैं। कुछ लोग इसे केवल एक एक्सपेरिमेंट मान रहे हैं, तो कुछ इसे मार्केटिंग का तरीका।
लेकिन एक बात साफ है कि तकनीक ने अब सच और झूठ का फर्क मिटा दिया है। अगर आप भी ऐसी तस्वीरों पर दिल हार रहे हैं, तो जरा संभल कर रहें। हो सकता है कि जिसे आप असली समझ रहे हों, वो महज कोड्स हों।
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