साइबर अपराधियों के निशाने पर वन मंत्री, बनाया फर्जी अकाउंट, ठगने की कोशिश
ऐसे समझें पूरा मामला
- राजस्थान में साइबर ठगों के निशाने पर आए वन मंत्री संजय शर्मा।
- इनके नाम और फोटो का इस्तेमाल कर बना लिया फर्जी अकाउंट।
- लोगों को मैसेज भेजकर जाल में फंसाने का शुरू कर दिया खेल।
- मैसेज में साइबर ठग निवेश और ग्रुप से जोड़ने का दे रहे थे झांसा।
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान में साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे मंत्रियों को अपना शिकार बनाने से नहीं चूक रहे हैं।
ताजा मामला राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा का है। इनके नाम और फोटो का इस्तेमाल कर साइबर ठगों ने सोशल मीडिया पर एक फर्जी अकाउंट तैयार कर लिया है।
इस फर्जी प्रोफाइल के जरिए लोगों को ठगने और जाल में फंसाने का खेल शुरू कर दिया गया। जैसे ही यह मामला मंत्री के संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए जनता के लिए एक अपील जारी की है।
निवेश और ग्रुप से जोड़ने का झांसा
साइबर ठगों ने वन मंत्री संजय शर्मा की हूबहू दिखने वाली सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाई। इस फर्जी अकाउंट से लोगों को सीधे मैसेज भेजे जा रहे थे।
ठगों का मुख्य मकसद लोगों को विभिन्न संदिग्ध ग्रुप्स, फर्जी निवेश योजनाओं और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जोड़ना था।
अक्सर लोग सोचते हैं कि किसी मंत्री या रसूखदार व्यक्ति की तरफ से मैसेज आया है तो योजना सही ही होगी। साइबर अपराधी जनता के इसी भरोसे और मनोविज्ञान का फायदा उठाकर मोटी रकम ऐंठने की फिराक में थे।
वन मंत्री की जनता से सीधी अपील
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन मंत्री संजय शर्मा ने बिना देर किए सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि मेरे संज्ञान में आया है कि सोशल मीडिया पर मेरे नाम और फोटो का दुरुपयोग कर फर्जी अकाउंट बनाया गया है।
यह अकाउंट लोगों को मैसेज भेजकर विभिन्न ग्रुप, निवेश योजनाओं एवं अन्य गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि इस अकाउंट का मुझसे कोई संबंध नहीं है।
मंत्री ने जनता से आग्रह किया कि वे ऐसे किसी भी संदेश, लिंक या निवेश संबंधी प्रस्ताव पर विश्वास न करें और न ही अपनी कोई व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा करें। साइबर अपराधों के विरुद्ध सबसे बड़ी शक्ति है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
ब्लू टिक या वेरिफिकेशन देखें: किसी भी वीआईपी, मंत्री या अधिकारी के संदेश पर भरोसा करने से पहले देखें कि अकाउंट वेरीफाइड है या नहीं।
पैसे या निवेश की मांग पर शक करें: कोई भी जनप्रतिनिधि सोशल मीडिया के पर्सनल मैसेज में निवेश करने या पैसे ट्रांसफर करने की बात नहीं करता।
लिंक पर क्लिक न करें: अनजान अकाउंट्स से भेजे गए किसी भी लिंक या ग्रुप इनविटेशन को स्वीकार न करें।
तुरंत रिपोर्ट करें: संदिग्ध अकाउंट दिखने पर प्लेटफॉर्म को रिपोर्ट करने के साथ-साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर भी शिकायत दर्ज कराएं।
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