हम दो हमारा एक की सोच पर भड़के बालमुकुंदाचार्य, कहा- ऐसे ही रहा तो चच्चा हो जाएंगे बहुसंख्यक
News In Short
- बालमुकुंदाचार्य ने हम दो हमारा एक की सोच पर जताई आपत्ति।
- कहा, यही रहा तो हम अल्पसंख्यक और चच्चा बहुसंख्यक हो जाएंगे।
- भाजपा विधायक ने हम दो हमारे दो-चार होने दो का दिया नारा।
- आचार्य ने चीन का उदाहरण देते हुए जनसंख्या वृद्धि का समर्थन किया।
- युवाओं को सरकारी नौकरी की बजाय आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी।
News In Detail
Ajmer: राजस्थान में भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने जनसंख्या नीति और परिवार व्यवस्था को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने अजमेर के दक्षिणमुखी बालाजी हनुमान धाम में धार्मिक कार्यक्रम में समाज को सचेत करते हुए कहा कि हम दो हमारा एक की मानसिकता भविष्य में देश की संस्कृति और सामाजिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
हम चच्चा बहुसंख्यक हो जाएंगे
अपने संबोधन में बालमुकुंदाचार्य ने जनसंख्या असंतुलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि हम हम दो हमारा एक की सोच तक ही सीमित रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब हम खुद अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे और चच्चा (विशेष समुदाय के प्रति संकेत) बहुसंख्यक हो जाएंगे। उन्होंने युवाओं और परिवारों से अपील करते हुए एक नया नारा दिया और कहा, हम दो हमारे दो-चार होने दो।
चीन का उदाहरण और आत्मनिर्भरता का तर्क
विधायक ने जनसंख्या बढ़ने से बेरोजगारी और संसाधनों की कमी जैसे तर्कों को खारिज करते हुए चीन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि चीन में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद वहां व्यापार मजबूत है और देश आत्मनिर्भर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर तो बन रहा है, लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि परिवार बड़े हों।
एक बच्चे की सोच से टूट रहे रिश्ते
हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने पुरानी परंपराओं को याद दिलाते हुए कहा कि पहले 10-12 बच्चों वाले बड़े परिवार होते थे, जिससे चाचा, ताऊ, भाई-बहन जैसे रिश्ते मजबूत बने रहते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक ही बच्चा होगा और वह करियर के लिए बाहर चला गया, तो पीछे बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल कौन करेगा?
उन्होंने आगे कहा कि अगर परिवार में सदस्य अधिक होंगे, तभी कोई फौज में जाएगा, कोई पुलिस में भर्ती होगा, कोई व्यापार संभालेगा और कोई खेती-किसानी करेगा। कुछ बच्चे राष्ट्र और संस्कृति की सेवा के लिए भी आगे आएंगे।
सिर्फ सरकारी नौकरी के पीछे न भागें युवा
कार्यक्रम के दौरान विधायक ने युवाओं को केवल सरकारी नौकरी की सोच तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को खुद रोजगार देने वाला बनने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब परिवार बड़े होंगे, तो संसाधनों का सृजन भी उतना ही अधिक होगा।
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