BJP बोर्ड बनाने में आगे, कांग्रेस से वोट शेयर का अंतर सिर्फ 0.94%; दिल्ली गई रिपोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- कांग्रेस से महज 0.94% का अंतर सत्ताधारी दल के लिए बड़ी चेतावनी।
- 2,273 वार्डों में जीत और बागियों का दबदबा टिकट वितरण पर सवाल।
- 7 मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी विफल।
- निकाय नतीजों के बाद मंत्रिमंडल फेरबदल और रिपोर्ट कार्ड पर गाज की सुगबुगाहट।
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में सत्तारुढ़ भाजपा ने भले ही बोर्ड गठन के आंकड़ों में बढ़त हासिल की हो, लेकिन चुनाव नतीजों के विश्लेषण के बाद पार्टी के अंदर जश्न से ज्यादा चिंता और मंथन का माहौल बन गया।
वोट शेयर के कड़े मुकाबले, कांग्रेस के प्रदर्शन और निर्दलीयों के उभार ने सत्ताधारी दल के रणनीतिकारों को समीक्षा के लिए मजबूर कर दिया। पार्टी इस संबंध में एक रिपोर्ट जल्दी ही केंद्रीय नेतृत्व को भेजने वाली है। हालांकि पार्टी के कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि रिपोर्ट भेज दी गई है।
निकाय चुनाव जीतकर भी भाजपा टेंशन में?
भाजपा ने निकाय चुनाव में 10244 वार्ड में से 4182,कांग्रेस ने 3619 तथा निर्दलीयों ने 2273 वार्ड जीते हैं। भाजपा को कुल वोट के 35.18, कांग्रेस को 34.25 तथा 27.38 फीसदी वोट मिले हैं।
भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले 0.94 फीसदी ही वोट ज्यादा मिले। भाजपा ने अब तक 309 में से 200 बोर्ड पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस महज 94 पर ही निपट गई। एक-एक बोर्ड पर आप और रालोपा ने कब्जा जमाया है।
भाजपा के सूत्रों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने भाजपा के समान ही आक्रामक प्रचार किया होता तो यह अंतर ज्यादा भी हो सकता था। इसलिए वोटों का कम अंतर गंभीर चिंता का विषय है।
सीएम ने स्थानीय नहीं बल्कि राज्य के मुद्दों पर किया प्रचार
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव अभियान की कमान खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संभाली थी। उन्होंने अपनी सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों, विशेष रूप से ईआरसीपी परियोजना और हरियाणा-राजस्थान यमुना जल समझौते जैसे फैसलों को चुनावी मुद्दा बनाया। जबकि,स्थानीय और जिलों के मुद्दे गायब रहे। सीएम के आक्रामक प्रचार और विकास के दावों के बावजूद वोट शेयर और वार्ड स्तर पर नतीजों ने भाजपा नेतृत्व की नींद उड़ा दी है।
वोट शेयर और निर्दलीयों की बढ़त ने बढ़ाई चिंता
भले ही भाजपा ने 70% निकायों में अपने प्रमुख बैठाने में कामयाबी हासिल की हो, लेकिन आंकड़ों का दूसरा पहलू भाजपा सरकार के लिए बेहद असहज करने वाला है। विशेष रूप से वोट शेयर का 0.94 फीसदी का मामूली अंतर पार्टी के लिए चिंता का विषय है।
कांग्रेस पार्टी लगातार भाजपा को कड़ी टक्कर देने में सफल रही है। दोनों दलों के कुल वोट शेयर में एक फीसदी से भी कम का अंतर रहा है। इससे यह साफ है कि शहरी मतदाता पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में लामबंद नहीं हुए हैं।
तीसरी ताकत बने निर्दलीय
2273 से अधिक वार्डों में निर्दलीयों की जीत और उनका वोट शेयर में लगातार इजाफा होना सत्तारूढ़ दल के लिए बड़ा झटका है। कई जगहों पर निर्दलीयों की बदौलत ही भाजपा को बोर्ड बनाने पड़े हैं। स्थानीय स्तर पर बागियों और निर्दलीयों का बढ़ा दबदबा यह दिखाता है कि भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेतृत्व में टिकट वितरण को लेकर भारी असंतोष था।
टिकट बंटवारे में मनमर्जी से नाराज पार्टी
राजस्थान भाजपा के उच्चस्तरीय सूत्रों के अनुसार पार्टी के प्रदर्शन के लिए टिकटों में विधायकों व मंत्रियों की मनमर्जी और अड़ियल रवैए का बड़ा योगदान रहा है। पार्टी में इससे नाराजगी है। सूत्रों के अनुसार विधायकों और मंत्रियों के साथ ही पार्टी बूथ लेवल तक सरकार के कार्यों को मतदाताओं तक पहुंचाने में विफल रही है।
भाजपा के सूत्र नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों को चौंकाने वाला नहीं मान रहे। उनका कहना है कि पहली बार राज्य में एक साथ निकाय चुनाव होने से ऐसा लग रहा है कि भाजपा के वोट कम हुए हैं। जबकि पिछले चुनावों में भी करीब-करीब ऐसे ही नतीजे रहे हैं। लेकिन, टिकट बंटवारे में विधायकों व मंत्रियों की हठधर्मिता से फर्क जरूर पड़ा है। लेकिन,पार्टी का कहना है कि अधिकांश निर्दलीय भाजपा के बागी ही हैं और पार्टी विचारधारा से जुड़े हुए हैं।
मंत्रियों पर गाज गिरने के आसार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भले ही निर्दलीयों के सहयोग से बोर्ड बन गया हो, लेकिन सरकार के 7 प्रमुख मंत्री और वरिष्ठ नेता अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का निकाय प्रमुख बनाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व सीएम वसुधंरा राजे झालावाड़ में, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल बीकानेर में असफल रहे।
इनमें अतिरिक्त डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा दूदू में, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग जालौर में, सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक बड़ी सादड़ी में, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा प्रतापगढ़ में, ग्रामीण विकास मंत्री ओटाराम देवासी सिरोही में, महिला बाल विकास मंत्री मंजू बाघमार जायल में और राज्यमंत्री विजय सिंह चौधरी नांवा में बोर्ड व सभापति बनाने में नाकाम रहे।
हालांकि सीएम भजनलाल जयपुर के सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और यहां पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पाली में निगम सहित जिले की सभी पालिकाओं में भाजपा जीती है। कृषि मंत्री डॉ.किरोड़ीलाल मीणा के क्षेत्र सवाईमाधोपुर में भाजपा ने बाजी मारी है।
जयपुर निगम के नतीजों पर टिकीं निगाहें
जयपुर नगर निगम क्षेत्र के तहत आने वाली सीटों के परिणाम 25 सितंबर तक पूरी तरह साफ होंगे। हालांकि, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (सांगनेर), डिप्टी सीएम दीया कुमारी (विद्याधर नगर) और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (झोटवाड़ा) के क्षेत्रों के बहुमत गणित से भाजपा अपना महापौर बनाने की स्थिति में दिख रही। लेकिन, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयपुर में बोर्ड भले ही भाजपा का बन रहा हो, लेकिन झोटवाड़ा जैसे परंपरागत गढ़ वाले विधानसभा के कई वार्डों सहित जयपुर में कांग्रेस का उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन यह साबित करती है कि जमीनी स्तर पर असंतोष गहरा है।
संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने साफ किया है कि पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र का विस्तृत विश्लेषण, बागियों का प्रभाव, और टिकट वितरण की कमियों की रिपोर्ट तैयार कर रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भजनलाल सरकार के ढाई साल बाद भी अगर मंत्री अपने गृह क्षेत्रों में पार्टी को साफ जनादेश नहीं दिला पा रहे तो यह सीधे तौर पर जनता के बीच उनकी घटती साख का संकेत है। इस रिपोर्ट कार्ड का सीधा असर आगामी पंचायत चुनावों की रणनीति और मंत्रिमंडल फेरबदल में मंत्रियों की छुट्टी या विभाग बदलने के रूप में देखने को मिल सकता है।
ये भी पढ़ें:-
पेपर से पहले सेंटर का ‘टेस्ट’ कौन करता है? जयपुर में बार-बार फेल हो रहे इंतजाम
25 सितंबर को जयपुर आएंगे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, दादिया में बड़ा कार्यक्रम
जयपुर में ग्रामीण सत्ता का आरक्षण तय: 57 जिला परिषद, 386 पंचायत समिति वार्डों की तस्वीर साफ
निकाय चुनाव पर गहलोत बोले- भजनलाल को भला आदमी समझा था, जीत के लिए क्या-क्या नहीं किया