राजस्थान निकाय चुनाव: ज्यादा वोट के बावजूद कांग्रेस पिछड़ी, भाजपा को क्यों मिली बढ़त?

Mukesh Sharma | Sept 15, 2026, 16:23 IST
रणनीति में कौन किससे आगे
राजस्थान निकाय चुनावों में नए परिसीमन, निर्दलीयों की सेंधमारी और वोटों के असंतुलित वितरण के कारण कांग्रेस जयपुर सहित कई क्षेत्रों में अधिक वोट पाकर भी पिछड़ गई, जबकि भाजपा ने कम अंतर से अधिक वार्ड जीतकर बोर्ड बनाने में बढ़त हासिल कर ली।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जयपुर में परिसीमन से कांग्रेस की रणनीति पर पड़ा असर।
  • भाजपा ने कम अंतर से अधिक वार्ड अपने नाम किए।
  • 27.38% वोट बटोरकर निर्दलीयों ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ा।
  • SC/ST क्षेत्रों में कांग्रेस के कुल वोट तो बढ़े, सीटें नहीं।

राजस्थान के हालिया 309 शहरी निकायों और जयपुर जिले के चुनाव नतीजों ने एक दिलचस्प और अनूठा सियासी विरोधाभास सामने रखा। जहां एक ओर राज्यभर के ओवरऑल आंकड़ों में भाजपा ने मामूली वोट शेयर बढ़त के दम पर वार्डों में बड़ी बढ़त हासिल की, वहीं जयपुर जिले में कांग्रेस ने भाजपा से अधिक वोट हासिल किए, फिर भी भाजपा यहां बहुमत के साथ अपना बोर्ड बनाने में कामयाब रही।



कांग्रेस को जयपुर में भाजपा से ज्यादा वोट मिले

जयपुर जिले के निकाय चुनाव नतीजों का गहरा विश्लेषण करने पर यह साफ होता है कि कांग्रेस को भाजपा की तुलना में अधिक जनसमर्थन मिला, लेकिन पार्टी इसे भुना नहीं पाई और बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई।



राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार दोनों मुख्य दलों के बीच कुल वोट शेयर का अंतर मात्र 0.94% (भाजपा 35.18% और कांग्रेस 34.24%) का रहा। इसके बावजूद जीती गई सीटों में दोनों दलों के बीच लगभग 566 वार्ड का बड़ा अंतर पैदा रहा।



वोट मार्जिन और जीत-हार के अंतर की क्या है वजह?

राजस्थान निकाय चुनाव में सीटों और वोटों के अंतर का सबसे अहम कारण वार्ड परिसीमन में वोटर्स का असमान विभाजन रहा। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वार्डों की सीमाओं के नए परिसीमन के कारण मतदाता घनत्व पूरी तरह बदल गया। उदाहरण के लिए, जयपुर में कांग्रेस को कुल मिलाकर भाजपा से 10 हजार से भी अधिक अधिक वोट मिले, लेकिन फिर भी पार्टी भाजपा के मुकाबले कम सीट पाई।



कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या मात्र 13000 से 16000 है। जबकि कुछ वार्ड में 23000 से 35000 तक मतदाता शामिल थे। इसका नतीजा यह हुआ कि अत्यधिक आबादी वाले वार्डों में कांग्रेस ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इससे उसके कुल वोटों की संख्या तो तेजी से बढ़ी, लेकिन पार्टी कम वार्ड जीत पाई। इसके उलट, भाजपा ने कम आबादी वाले कई छोटे वार्ड में कम वोटों के साथ भी कई सीटें अपने नाम कर लीं।



विशाल अंतर की जीत बनाम कम अंतर से ज्यादा सीटें जीतना

सीटों में वोट बदलने की क्षमता के मामले में भाजपा का प्रदर्शन कांग्रेस से अधिक प्रभावी रहा। भाजपा ने अपने बड़े हिस्से के वार्ड बेहद कम अंतर से जीते हैं। भाजपा के जीते गए वार्ड में से 1316 वार्ड ऐसे हैं जहां जीत का अंतर 100 वोटों से भी कम रहा। 772 वार्डों में भाजपा की जीत का अंतर 50 वोटों से कम है।



भाजपा के वोट कम वोटों वाले वार्डों में समान रूप से बिखरे हुए थे। इसलिए भाजपा अपने वोटों को सीटों में बेहतर तरीके से बदल पाई। दूसरी ओर, कांग्रेस के बड़े वोट बैंक कुछ खास शहरी क्षेत्रों और आरक्षित वार्ड में भारी अंतर से जीत दर्ज करने में बर्बाद हो गए।



-कांग्रेस को अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित वार्ड में भारी जनसमर्थन मिला। पार्टी ने 542 SC वार्डों पर जीत हासिल की (जबकि भाजपा को 350 सीटें मिलीं)। इन क्षेत्रों में भारी मतदान और बड़े चुनावी अंतर ने कांग्रेस के कुल वोटों की संख्या में तो भारी बढ़ोतरी की। लेकिन इनसे उन क्षेत्रों के बाहर अतिरिक्त सीटें नहीं बढ़ सकीं।



निर्दलीयों और NOTA का खेल बिगाड़ने वाला प्रभाव

राजस्थान के निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 27.38 फीसदी वोट पर कब्जा जमाया और 2273 वार्ड जीते हैं । कई कड़े त्रिकोणीय मुकाबलों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने कांग्रेस के वोटों में बड़ी सेंध लगाई। इससे भाजपा उम्मीदवार बेहद कम अंतर के बावजूद सीट निकालने में सफल रहे।



जयपुर का पूरा गणित...

जयपुर जिले में कांग्रेस को 6,76,815 और भाजपा को 6,75,929 वोट मिले (कांग्रेस 886 वोट आगे रही)। जयपुर शहर में कांग्रेस को भाजपा से 13,135 वोट ज्यादा मिले,लेकिन वार्ड कम जीते हैं।



जयपुर में सीटें घटने का असली कारण

इस उलटफेर की सबसे बड़ी वजह नया परिसीमन माना जा रहा। भाजपा सरकार ने दो नगर निगमों का विलय कर 250 वार्डों को घटाकर 150 में बदल दिया। परिसीमन के इस नए ढांचे के कारण कांग्रेस के वोट चुनिंदा वार्डों में ही भारी बहुमत के साथ एकत्रित हो गए। जबकि भाजपा के वोट सभी वार्डों में इस तरह बंटे कि उसने कम अंतर से भी अधिक संख्या में वार्ड जीत लिए।



कांग्रेस-भाजपा में वोट शेयर का अंतर कम, पर नतीजे अलग

पूरे राजस्थान के 309 शहरी निकायों की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर बेहद मामूली (1 फीसदी से भी कम) रहा,लेकिन नतीजों का फासला काफी बड़ा दिखा....



दलप्राप्त वोटवोट शेयर (%)जीते गए वार्ड
भाजपा37.35 लाख35.18%4,179
कांग्रेस36.35 लाख34.24%3,613
निर्दलीय29.06 लाख27.38%2,273
नोटा (NOTA)1.09 लाख------

वार्डों का बड़ा अंतर

कुल 10,235 घोषित वार्डों में से भाजपा ने कांग्रेस से 566 वार्ड अधिक जीते हैं। केवल 0.94 फीसदी ज्यादा वोट शेयर के दम पर भाजपा 60 निकायों में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में सफल रही। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 27.38% वोट हासिल कर त्रिकोणीय मुकाबलों में कांग्रेस के पारंपरिक वोटों में सेंध लगाई, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला।



छोटे दलों की स्थिति:

हनुमान बेनीवाल की RLP ने 1.00 लाख वोट पाकर जयपुर जिले में 5 वार्ड जीते। AAP, CPM, BSP और BAP का प्रदर्शन बेहद सीमित रहा, जिन्हें NOTA (1.09 लाख वोट) से भी कम समर्थन मिला।



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