भाजपा ने 200 निकायों में बनाए प्रमुख, जूली बोले- साम-दाम-दंड-भेद से बनाया बोर्ड

Saurabh Mishra | Sept 22, 2026, 17:14 IST
जूली के आरोपों से गरमाई राजस्थान की सियासत
राजस्थान में 303 निकाय प्रमुखों के नतीजे घोषित हो गए। BJP समर्थित प्रमुखों का आंकड़ा 200 पहुंचा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने चुनाव में धांधली और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान में निकाय प्रमुख नतीजों में भाजपा को बड़ी बढ़त।
  • टीकाराम जूली का आरोप, सत्ता के दम पर बना भाजपा बोर्ड।
  • तिजारा में कांग्रेस की जीत, जूली ने बताया जनादेश।
  • भाजपा 200, कांग्रेस 95 निकाय प्रमुख पदों पर आगे।
  • हरियाणा में कांग्रेस पार्षदों को रोके जाने का मुद्दा उठाया।

जयपुर। राजस्थान में निकाय प्रमुखों के नतीजों में भाजपा ने बड़ी बढ़त बना ली। 309 में से 303 निकायों के नतीजे सामने आ चुके। इनमें भाजपा और उसके समर्थित दो निर्दलीयों को मिलाकर आंकड़ा 200 तक पहुंच गया। कांग्रेस के 95 निकाय प्रमुख बने हैं। 6 जगह निर्दलीय जीते हैं। आप, सीपीएम और आरएलपी के खाते में एक-एक अध्यक्ष पद आया।



इसी बीच नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भजनलाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि भाजपा ने बोर्ड बनाने के लिए सत्ता और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया। भाजपा पहले ही ऐसे आरोपों को खारिज कर चुकी।



नगर निगमों में भी भाजपा आगे रही। अब तक जिन 7 नगर निगमों में मेयर चुने गए, उनमें 6 में भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस सिर्फ बीकानेर में अपना मेयर बना पाई।



जूली ने लगाए राजस्थान सरकार पर धांधली के आरोप

टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निकाय प्रमुखों के चुनाव को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चेयरमैन चुनाव में भाजपा ने बड़े स्तर पर धांधली की।



जूली ने कहा कि भाजपा ने 'साम, दाम, दंड, भेद' की नीति अपनाकर चुनाव को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। उनका दावा है कि इसके बावजूद नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस का समर्थन पहले के मुकाबले बढ़ा है। जूली ने आने वाले उपसभापति और उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर भी दावा किया कि इनमें कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में बेहतर नतीजे आएंगे।



जूली ने कहा- जनता सब देख रही

नेता प्रतिपक्ष जूली ने आरोप लगाया कि निकाय प्रमुखों के चुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जो कुछ हुआ, उसे प्रदेश की जनता ने देखा है। जूली ने दावा किया कि इसका राजनीतिक नुकसान भाजपा को आगे उठाना पड़ेगा।



निकाय प्रमुखों के चुनाव से पहले भी कांग्रेस ने कई जगह अपने पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस और प्रशासन के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि भाजपा ने सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया।



तिजारा के नतीजों को लेकर सरकार को घेरा

जूली ने तिजारा के नतीजे को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर सबसे ज्यादा हमला बोला। उन्होंने इसे जनता के जनादेश की जीत बताया। तिजारा में कांग्रेस के रामअवतार सैनी सभापति चुने गए। चुनाव से पहले यहां बड़ा विवाद हुआ था। कुछ कांग्रेस पार्षदों के हरियाणा में रोके जाने के आरोप लगे थे। कांग्रेस ने दावा किया था कि हरियाणा पुलिस ने उसके 18 पार्षदों को पंचकूला के पास रोककर अज्ञात जगह पहुंचाया। हालांकि पंचकूला पुलिस के एसीपी रामकुमार ने पुलिस की भूमिका से इनकार किया था।



हाईकोर्ट तक पहुंचा था विवाद

तिजारा का मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने चुनाव टालने से इनकार किया और पार्षदों के वोट देने के अधिकार पर जोर दिया। बाद में मतदान का समय बढ़ाया गया। इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी रामअवतार सैनी सभापति चुने गए। जूली ने इसी घटनाक्रम को लेकर कहा कि तिजारा में जनता का जनादेश जीता और सरकार का दबाव काम नहीं आया।



उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का बोर्ड बनवाने के लिए पिछले सात दिनों से सत्ता का गलत इस्तेमाल किया गया। पुलिस और प्रशासन के जरिए दबाव बनाने की कोशिश हुई, लेकिन आखिर में कांग्रेस समर्थित पार्षद मतदान तक पहुंचे।



हरियाणा पुलिस पर भी आरोप

जूली ने दावा किया कि तिजारा के कांग्रेस पार्षदों को मतदान से पिछली रात हरियाणा में रोका गया था। उनका कहना है कि तमाम परेशानियों के बावजूद पार्षद तिजारा पहुंचे और मतदान किया।



कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि पार्षद हिमाचल प्रदेश से लौट रहे थे और रास्ते में हरियाणा पुलिस ने उन्हें रोक लिया। दूसरी तरफ हरियाणा पुलिस के अधिकारी ने इन आरोपों को नकार दिया था। इसलिए इस घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं।



'जनादेश नहीं खरीदा जा सकता'

जूली ने तिजारा की जीत को सिर्फ कांग्रेस की जीत मानने के बजाय इसे जनादेश और संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि पुलिस के जरिए पार्षदों को रोका जा सकता है, उन्हें डराया जा सकता है और उन पर दबाव बनाया जा सकता है, लेकिन जनता के फैसले को खरीदा या दबाया नहीं जा सकता।



जूली ने कहा कि तिजारा में जनता ने अपना फैसला सुना दिया है और आगे पूरे राजस्थान में सरकार को जनता के सवालों का सामना करना पड़ेगा।



जूली के आरोपों के बीच निकाय प्रमुखों के नतीजे भाजपा के पक्ष में ज्यादा रहे हैं। 303 घोषित नतीजों में भाजपा और उसके समर्थित दो निर्दलीयों को मिलाकर 200 निकाय प्रमुख हैं। कांग्रेस के 95 निकाय प्रमुख बने हैं। छह निर्दलीय जीते हैं। आप, सीपीएम और RLP को एक-एक पद मिला है।



इससे पहले वार्ड चुनाव में भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। हालांकि भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर में अंतर काफी कम रहा और कई निकायों में निर्दलीयों ने बोर्ड बनाने का गणित तय किया।



यह खबरें भी पढ़ें...



निकाय चुनाव में तानाशाही और पुलिस का दुरुपयोग कलंक- टीकाराम जूली



BJP पार्षदों के कैंप में पहुंचने पर भड़के टीकाराम जूली, ASP को फटकारा; DG को किया फोन!



जोधपुर निगम चुनाव: 44-44 पर अटकी BJP-कांग्रेस, जानें क्या कहते हैं ज्योतिषीय संयोग?



राजस्थान CET परीक्षा की तारीख बदली, जानें नया शेड्यूल



Tags:
  • राजस्थान
  • राजस्थान सरकार
  • निगम चुनाव
  • टीकाराम जूली