ओबीसी आरक्षण पर होगा फैसला, 2500 सरपंच व 1750 पार्षद पद हो सकते हैं आरक्षित
समझें क्या है पूरा मामला
- ओबीसी आरक्षण आयोग आज सरकार को सौंपेगा रिपोर्ट।
- 3.80 करोड़ ओबीसी आबादी के आधार पर तय होगा आरक्षण।
- निकाय-पंचायत चुनावों में ओबीसी सीटों का होगा निर्धारण।
- 15 अगस्त तक पूरी होगी आरक्षण प्रक्रिया।
- पहली बार जनसंख्या आधार पर तय होगा ओबीसी आरक्षण।
राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने वाला आयोग बुधवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर सीटों का आरक्षण और जिलेवार लॉटरी प्रक्रिया पूरी होगी। सरकार ने यह पूरी प्रक्रिया 15 अगस्त तक पूरी करने का लक्ष्य रखा है। आयोग ने प्रदेश में ओबीसी की आबादी 3.80 करोड़ आंकी है। यह पहला मौका होगा जब जनसंख्या के आधार पर ओबीसी आरक्षण तय किया जाएगा।
राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर एक अहम कदम उठाया जाने वाला है। ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग अपनी रिपोर्ट बुधवार को राजस्थान सरकार को सौंपेगा। इस रिपोर्ट का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था।
इसी रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण तय होगा। इसके बाद जिलेवार लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार ने इस पूरी कवायद को 15 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
ओबीसी आबादी करीब 3.80 करोड़ आंकी गई
आयोग ने प्रदेश में ओबीसी वर्ग की अनुमानित आबादी 3.80 करोड़ मानी है। यह राज्य की कुल आबादी का 45 फीसदी से ज्यादा है। यह आंकड़ा पहली बार किसी सरकारी रिपोर्ट में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है।
जानकारी के मुताबिक आयोग ने ओबीसी जनसंख्या के आधार पर करीब 2500 सरपंच पदों को आरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके साथ ही लगभग 1750 पार्षद सीटों को भी आरक्षित करने का प्रस्ताव है। प्रधान पदों के लिए 75 से 80 सीटें आरक्षित होने की संभावना जताई गई है।
कितनी पंचायतें और वार्ड होंगे प्रभावित
प्रदेश में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें हैं। इसके अलावा 309 नगरीय निकायों में कुल 10,245 वार्ड हैं। इनमें से करीब 1750 वार्डों को ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
नगरीय निकाय चुनाव 6 और 9 सितंबर को कराने का प्रस्ताव है। वहीं पंचायत चुनाव 13 अक्टूबर से चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे। यानी आने वाले महीनों में प्रदेश में लगातार चुनावी सरगर्मी देखने को मिलेगी।
पिछले चुनावों में कैसा रहा था प्रदर्शन
आयोग के अध्ययन के अनुसार पिछले चुनावों में करीब 40 फीसदी सीटों पर ओबीसी उम्मीदवार जीते थे। हालांकि कुछ बड़े निकायों में यह आंकड़ा घटकर 32 से 33 फीसदी तक सीमित रह गया था।
इसकी एक बड़ी वजह यह रही कि सामान्य वर्ग की सीटों पर भी बड़ी संख्या में ओबीसी उम्मीदवार जीतते रहे हैं। इस आंकड़े को भी आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने में ध्यान में रखा है।
21% से ज्यादा आरक्षण की संभावना कम
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर आयोग ने यह भी माना है कि जिन क्षेत्रों में एससी-एसटी आबादी ज्यादा है, वहां ओबीसी आरक्षण 21 फीसदी से कम रह सकता है। मेवाड़ और पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में ऐसे हालात देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि यह स्थिति पहले भी चुनावों में रही है, इसलिए यह कोई नई बात नहीं है। सूत्रों के मुताबिक आयोग ने कुल आरक्षण सीमा को 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ाने की सिफारिश नहीं की है। इस वजह से ओबीसी आरक्षण के 21 फीसदी से ज्यादा होने की संभावना कम मानी जा रही है।
तीन बार बढ़ चुका है आयोग का कार्यकाल
ओबीसी आयोग का गठन 9 मई 2025 को हुआ था। तब से इसकी रिपोर्ट का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। आयोग का कार्यकाल अब तक तीन बार बढ़ाया जा चुका है।
पहले इसे दिसंबर 2025 तक बढ़ाया गया। इसके बाद 31 मार्च 2026 तक और फिर 30 सितंबर 2026 तक की मोहलत दी गई। रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग ने दो सप्ताह का व्यापक सर्वे कराया, जिसमें 51 हजार कार्मिकों ने हिस्सा लिया। यह प्रदेश में पहला मौका होगा जब ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में आरक्षण तय किया जाएगा।
FAQ
- राजस्थान में OBC आरक्षण रिपोर्ट कब सरकार को सौंपी जाएगी?
OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग बुधवार को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। इसी आधार पर सीटों का आरक्षण और लॉटरी प्रक्रिया तय होगी। सरकार ने यह प्रक्रिया 15 अगस्त तक पूरी करने का लक्ष्य रखा है। - प्रदेश में OBC की अनुमानित आबादी कितनी आंकी गई है?
आयोग ने प्रदेश में OBC की अनुमानित आबादी 3.80 करोड़ मानी है। यह राज्य की कुल आबादी का 45 फीसदी से ज्यादा है। यह आंकड़ा पहली बार आधिकारिक रिपोर्ट में शामिल किया गया है। - निकाय और पंचायत चुनाव कब होंगे?
नगरीय निकाय चुनाव 6 और 9 सितंबर को कराने का प्रस्ताव है। पंचायत चुनाव 13 अक्टूबर से चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे। दोनों चुनावों में OBC आरक्षण इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा।
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