5वीं पास निकला करोड़ों के साइबर नेटवर्क का मास्टरमाइंड, कश्मीर तक फैला था जाल
Ashish Bhardwaj | Aug 05, 2026, 09:07 IST
साइबर ठगी का मास्टरमाइंड
राजस्थान पुलिस ने महज पांचवीं पास एक युवक को अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के मास्टरमाइंड के तौर पर गिरफ्तार किया है। उसने 24 सदस्यों की गैंग तैयार कर रखी थी, जो फर्जी सिम और म्यूल खातों से ठगी करते थे।
समझें क्या है पूरा मामला
- पांचवीं पास शौकीन निकला साइबर ठगी का मास्टरमाइंड।
- 20 साल के आरोपी ने खड़ा किया 24 लोगों का गैंग।
- राजस्थान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठग पकड़ा।
- ठगी की कमाई से खरीदी कार, मकान और जमीन।
- फर्जी सिम और खातों से चलता था ठगी नेटवर्क।
राजस्थान पुलिस ने एक हैरान करने वाला मामला उजागर किया है। पुलिस ने साइबर संग्राम अभियान 3.0 के तहत एक अंतरराज्यीय साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। इस आरोपी ने महज पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बावजूद उसने देश के कई राज्यों में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
आरोपी की उम्र 20 साल है और उसका नाम शौकीन बताया गया है। उसने करीब 24 लोगों की गैंग तैयार कर रखी थी। यह गैंग फर्जी सिम कार्ड, म्यूल बैंक खाते और पूरे ऑनलाइन ठगी नेटवर्क को संचालित करती थी।
गरीबी से करोड़ों की संपत्ति तक का सफर
साइबर ठगी की कमाई से उसने कई बड़ी चीजें खरीदीं। इसमें कार, मकान और कृषि भूमि शामिल है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक सफेद ब्रेजा कार भी बरामद कर जब्त की है। प्रथम दृष्टया यह कार भी साइबर ठगी की रकम से ही खरीदी गई मानी जा रही है।
कैसे चलता था ठगी का पूरा नेटवर्क
इसके अलावा वह एक और तरीका भी अपनाता था। वह महिलाओं के सस्ते सूट-सलवार बेचने के फर्जी विज्ञापन और वीडियो पोस्ट करता था। खुद को कपड़ा फैक्ट्री का मालिक बताकर वह लोगों को ठगता था। ठगी की पूरी रकम म्यूल खातों में मंगवाई जाती थी। पूरा नेटवर्क फर्जी सिम कार्डों के जरिए संचालित होता था।
अपने नाम पर नहीं खरीदता था मोबाइल-सिम
पुलिस को एक बड़ी आशंका भी है। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाला एक बड़ा नेटवर्क भी इसके पीछे सक्रिय है।
पहले भी दर्ज थे मामले, नहीं खुला था राज
बाद में एक और मामले ने इस राज से पर्दा उठाया। चंडीगढ़ में दर्ज साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान उसके नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में पता चला कि वह कई राज्यों में संगठित तरीके से साइबर अपराध कर रहा था। वह फर्जी सिम और म्यूल खाते उपलब्ध कराने का काम भी करता था।
जम्मू-कश्मीर से राजस्थान तक फैला नेटवर्क
अब पुलिस उसके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है। इसके लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। पूरे नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है।
15 अगस्त तक होगी बड़ी कार्रवाई
इसके साथ ही एक और बड़ा लक्ष्य है। पुलिस साइबर ठगी से अर्जित संपत्ति की पहचान कर उसे जब्त करने की कार्रवाई भी करना चाहती है। एसपी ने एक अच्छी खबर भी साझा की। लगातार कार्रवाई के चलते अलवर जिले की रैंकिंग में सुधार हुआ है। पहले साइबर अपराध में यह जिला शीर्ष हॉटस्पॉट माना जाता था। अब यह जिला आठवें स्थान पर आ गया है।
विशेष अभियान में 39 साइबर अपराधी गिरफ्तार
इस दौरान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। कुल 33 साइबर प्रकरण दर्ज किए गए। इसमें 39 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जिले में 191 साइबर हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए थे। इनमें से 177 स्थानों पर पुलिस ने दबिश दी। इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने 37.67 लाख रुपए की ठगी की रकम होल्ड कराई। साथ ही पीड़ितों को 6.55 लाख रुपए वापस भी दिलाए गए।
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