जिस दिन संभाला कार्यभार, उसी दिन रिटायर होने से पहले दूसरे विभाग के अफसर का कर दिया तबादला, पूरा मामला जानकार रह जाएंगे हैरान
News In Short
- सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने कोर्ट के आदेश पर 31 मार्च को कार्यभार संभाला।
- उसी दिन राठौड़ को बायोफ्यूल प्राधिकरण से रिटायर भी होना था।
- जाते-जाते राठौड़ ने क्षेत्राधिकार से बाहर दूसरे विभाग में कर दिया तबादला।
- मजेदार बात यह कि तबादला आदेश में मंत्री के निर्देशों का भी दिया हवाला।
- आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं सुरेंद्र सिंह राठौड़।
News in Detail
Jaipur: राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में अजब मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर बायोफ्यूल प्राधिकरण में सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने 31 मार्च 2026 को प्रोजेक्ट डायरेक्टर का प्रभार संभाला। उसी दिन वे रिटायर हो गए। जाते-जाते उन्होंने अन्य विभाग में तैनात अफसर का तबादला आदेश जारी कर दिया। हैरानी की बात यह थी कि यह तबादला उनके क्षेत्राधिकार में ही नहीं था। उनके इस तबादला आदेश से सरकार में खलबली मच गई।
रिश्वत के बाद हटाया था पद से
दरअसल, बायोफ्यूल प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेंद्र सिंह राठौड़ 2022 में रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार हुए थे। उसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। इसी बीच, हाई कोर्ट के आदेश से उन्होंने 31 मार्च 2026 को अपने रिटायरमेंट वाले दिन ही दोबारा प्रोजेक्ट डायरेक्टर का पदभार संभाला था।
रिटायर होकर घर जाने से पहले उन्होंने कौशल, नियोजन व उद्यमिता विभाग के राजसमंद में तैनात सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) को बायोफ्यूल प्राधिकरण में संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर लगाने के आदेश जारी कर दिए। इसके लिए उन्होंने बाकायदा आदेश में ग्रामीण विकास मंत्री के निर्देशों का हवाला दिया। मजेदार बात यह है कि बायोफ्यूल प्राधिकरण ग्रामीण विकास विभाग के अधीन आता है। कौशल, नियोजन व उद्यमिता विभाग अलग से विभाग है।
जांच होगी, लेकिन बिगड़ने वाला कुछ नहीं
आदेश जारी होते ही इसकी भनक दोनों ही विभाग के मुखियाओं तक पहुंची। दोनों विभागों में तबादला आदेश से खलखली मच गई। कौशल, नियोजन व उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा ने एक अप्रैल को आदेश निरस्त करने और इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए। इसमें यह भी आपत्ति की गई कि राठौड़ ने बिना किसी अधिकारिता के आदेश कैसे जारी कर दिए।
रोचक बात यह है कि आदेश जारी करने वाले सुरेंद्र सिंह राठौड़ का जांच के बाद कुछ बिगड़ने वाला नहीं है, क्योंकि वह इस पद पर कांट्रेक्ट पर था। रिटायरमेंट के साथ ही उसकी सेवाएं भी समाप्त हो गई।
2002 में एसीबी ने पकड़ा था, 4 करोड़ नगद मिले
सुरेंद्र सिंह राठौड़ विवादों में रहे हैं। उन्हें 7 अप्रेल, 2022 को एसीबी ने पांच लाख रुपए की रिश्चत लेते हुए पकड़ा था। एसीबी का यह एक्शन 2022 की सबसे बड़ी कार्रवाई माना गई। राठौड़ ने रिश्चत की यह राशि दलाल देवेश शर्मा के जरिए ली थी। राठौड़ ने बायोडीजल लाइसेंस नवीनीकरण और काम निर्बाध रूप से चलाने के बदले 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। 5 लाख रुपये पहली किश्त के रूप में आए थे। गिरफ्तारी के बाद जब एसीबी ने जयपुर में उनके वैशाली नगर, झोटवाड़ा और सहकार मार्ग के ठिकानों पर छापे मारे तो चार करोड़ रुपए नकद व करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले थे।
एसीबी को नोट गिनने के लिए मशीन तक मंगवानी पड़ी थी। हैरानी की बात यह है कि राठौड़ करीब 40 दिन तक जेल में रहा और सरकार ने उसे सस्पेंड भी कर दिया था। कांट्रेक्ट पर होने के कारण सरकार उसे बहाल करके उसी पोस्ट पर लगाने को कानूनी रुप से मजबूर नहीं थी। इसके बावजूद न केवल उसे बहाल किया गया, बल्कि उसी बायोफ्यूल प्राधिकरण के पीडी के रुप में काम करते रहने दिया।
हैरान करने वाले खुलासे
इस मामले में आश्चर्यजनक बात यह है कि राठौड़ कांट्रेक्ट पर होने के बावजूद बायोफ्यूल प्राधिकरण में महत्वपूर्ण कुर्सी पर 17 साल तक जमा रहा। असल में यह आईएएस अधिकारी की पोस्ट है। पकड़े जाने पर राठौड़ ने एसीबी को धमकी दी थी कि वह 1000 करोड़ का आदमी है और एसीबी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। एसीबी को राठौड़ के पास से महंगी विदेशी शराब, जगुआर, फॉर्च्यूनर और थार जैसी गाड़ियां मिली थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने छीन ली थी राहत
राजस्थान हाई कोर्ट ने राठौड़ के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति होने के मामले में दर्ज दूसरी एफआईआर को रद्ध कर दिया था। हाई कोर्ट के आदेश को एसीबी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्ध करते हुए आय से अधिक संपत्ति वाली एफआईआर पर एसीबी को जांच जारी रखने के आदेश दिए थे।
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