राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव: OBC आरक्षण पर सरकार बोली- 50% सीमा में दिए गए पद
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण का मामला।
- सरकार ने हाई कोर्ट में दिया जवाब- 50% के दायरे में दिया आरक्षण।
- सरकार ने कहा ओबीसी आयोग के डेटा के आधार पर ही पद तय किए।
- पंचायत आरक्षण की लॉटरी निकाय चुनाव की वजह से फिर हुई स्थगित।
राजस्थान सरकार ने निकाय और पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को दिए गए आरक्षण को पूरी तरह से सही ठहराया। राजस्थान हाईकोर्ट में दाखिल अपने जवाब में सरकार ने साफ किया कि उसने OBC आयोग द्वारा सौंपे गए डेटा और लॉटरी प्रक्रिया के आधार पर ही यह आरक्षण तय किया।
सरकार का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच और पंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया प्रस्तावित थी। इससे पहले 13 अगस्त को राज्य के 41 जिलों में जिला प्रमुख पदों के लिए लॉटरी निकाली गई थी, जिसमें से 5 पद OBC वर्ग के लिए आरक्षित हुए थे। हालांकि, कम आरक्षण देने को लेकर उपजे विवाद के चलते अगली लॉटरी टाल दी गई थी। इसके बाद 17 और 18 सितंबर की नई तारीख तय की गई, लेकिन निकाय चुनावों की तैयारियों का हवाला देते हुए इसे एक बार फिर स्थगित कर दिया गया।
सरकार ने कोर्ट में ओबीसी आरक्षण को सही ठहराया
राजस्थान सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि ओबीसी आयोग ने व्यापक स्तर पर डोर-टू-डोर सर्वे कराने के साथ-साथ जनाधार डेटा का गहन विश्लेषण करके ही अपनी सिफारिशें दी हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा के भीतर ही एससी, एसटी और ओबीसी को कुल आरक्षण दिया गया है। इसलिए कानूनी बाध्यताओं के कारण OBC आरक्षण के कोटे को बढ़ाना संभव नहीं है।
क्या है निकाय-पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण का मामला
याचिकाकर्ता राधेराम गोदारा ने याचिका दायर कर कहा है कि जिला प्रमुख पदों के अनुपात में ओबीसी आरक्षण नहीं दिया। प्रदेश में नए जिलों के गठन और पुनर्गठन के बाद जिला प्रमुखों के पद 33 से बढ़कर 41 हो गए। लेकिन,जब कुल पद 33 थे तब भी OBC के लिए 5 सीटें आरक्षित थीं, और पद बढ़कर 41 होने के बावजूद OBC को 5 ही सीटें दी गईं। याचिका में मांग की गई थी कि पदों की संख्या बढ़ने के हिसाब से ओबीसी आरक्षण भी अनुपातिक रूप से बढ़ाया जाए।
सरकार ने बताया आरक्षण का गणित
सरकार ने हाई कोर्ट में अपने जवाब में आरक्षण के आंकड़ों को स्पष्ट करते हुए कहा कि कुल 41 जिला प्रमुख पदों में से:
SC वर्ग: 18.51% आरक्षण के तहत 8 पद आरक्षित किए गए।
ST वर्ग: 17.09% आरक्षण के तहत 7 पद आरक्षित किए गए।
OBC वर्ग: 16% आरक्षण के तहत 5 पद (जालौर, बूंदी, खैरथल-तिजारा तथा महिला OBC के लिए ब्यावर और सीकर) आरक्षित किए गए।
इस प्रकार 41 में से कुल 20 पद आरक्षित हुए हैं, जो कि 48.78% बनता है। सरकार का कहना है कि यह 50% की कानूनी सीमा के भीतर है, इसलिए इसमें अतिरिक्त सीटें नहीं जोड़ी जा सकतीं।
OBC आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक न होने पर सवाल
याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार ने अब तक OBC आयोग की मूल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों के बावजूद OBC को 21% के बजाय केवल 16% आरक्षण दिया जा रहा है। साल 2020 के चुनाव में भी 18% आरक्षण दिया गया था। उस आधार पर भी इस बार जिला प्रमुख के कम से कम 7 पद OBC के खाते में आने चाहिए थे।
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