15 अप्रैल की डेडलाइन पर टकराव, राज्य चुनाव आयोग ने कहा-पंचायत चुनाव टले तो लटक सकती है अवमानना की तलवार
News In Short
- सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने किया था 15 अप्रैल तक पंचायत-निकाय चुनाव कराने का वादा।
- इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने दिया था 15 अप्रैल तक चुनाव का आदेश। ।
- राज्य सरकार कोर्ट में तय समय में चुनाव करवाने का आश्वासन दे चुकी है।
- राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को चेताया, देरी हुई तो विभाग होगा जिम्मेदार।
- ओबीसी आरक्षण को लेकर रिपोर्ट नहीं मिलने से अटक रहा चुनाव कार्यक्रम।
News In Detail
राजस्थान में पंचायत और नगर पालिका चुनाव को लेकर सरकार की स्थिति अभी साफ नहीं दिख रही है, जबकि अदालत ने 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव करवाने का स्पष्ट आदेश दिया हुआ है। इस बीच, राज्य चुनाव आयोग ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर चेताया है कि यदि समय पर चुनाव नहीं हुए तो अदालती अवमानना की स्थिति बन सकती है।
अब तक ओबीसी आरक्षण तय नहीं
राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने पंचायतीराज विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण अभी तक ओबीसी वार्ड तय नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम घोषित करना संभव नहीं हो पा रहा।
देरी हुई तो विभाग जिम्मेदार
राज्य निर्वाचन आयोग ने पत्र में यह भी साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के मुताबिक 15 अप्रैल तक चुनाव करवाना अनिवार्य है। यदि तय समय पर चुनाव नहीं हुए और अदालत ने अवमानना की कार्रवाई की तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों पर तय की जा सकती है।
ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट से अटका चुनाव कार्यक्रम
अभी तक चुनाव कार्यक्रम घोषित करने में सबसे बड़ी अड़चन वार्डों का ओबीसी आरक्षण नहीं होना बना हुआ है। सरकार को अभी तक राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग से ओबीसी आरक्षण वाले वार्डों की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। आयोग का कहना है कि उसे ओबीसी आरक्षण के लिए जो आंकड़े उपलब्ध कराए, उनमें बहुत खामियां हैं। ऐसे में ओबीसी वार्डों का आरक्षण संभव नहीं है।
बिना ओबीसी आरक्षण के भी हो सकते हैं चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को एक वैकल्पिक रास्ता भी सुझाया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2022 के सुरेश महाजन बनाम मध्यप्रदेश सरकार मामले का हवाला देते हुए कहा है कि यदि ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं होती तो एससी और एसटी आरक्षण के बाद बची सीटों को सामान्य श्रेणी में घोषित कर चुनाव करवाए जा सकते हैं।
चुनाव की डेडलाइन नजदीक, आयोग की चिंता बढ़ी
राजस्थान हाई कोर्ट ने शीला कुमारी बनाम राज्य सरकार मामले में आदेश दिया था कि पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 अप्रैल, 2026 तक पूरी की जाए। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है। हाई कोर्ट के 14 नवंबर के आदेश के खिलाफ दायर अपील में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि चुनाव तय समय सीमा में करवा दिए जाएंगे। अदालत में दिया गया यह आश्वासन अंडरटेकिंग माना जाता है, इसलिए सरकार इसके पालन के लिए बाध्य है।
चुनाव की तैयारी पूरी, बस रिपोर्ट का इंतजार
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव करवाने की लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। 25 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी हो चुकी है। ईवीएम और बैलेट बॉक्स तैयार कर लिए गए हैं। चुनाव कर्मियों की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी है। आयोग का कहना है कि सरकार से वार्ड आरक्षण की रिपोर्ट मिलते ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा।
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