राजस्थान के 7 जिलों के पेट्रोल पंपों पर कम तेल देने का खुलासा, सीज किए 16 नोजल
News In Short
- 7 संभाग मुख्यालय के पेट्रोल पंपों की औचक जांच में तेल की काम मात्रा पाई गई।
- नियमों का उल्लंघन और कम तेल देने पर विभाग ने 16 नोजल सीज कर जुर्माना लगाया।
- पंपों पर प्रति 5 लीटर ईंधन की बिक्री पर 30 मिलीलीटर तक कम तेल दिया जा रहा था।
- अजमेर में हर महीने 335 लीटर और उदयपुर में 150 लीटर कम तेल देने का अनुमान मिला।
- विभाग की ग्राहकों से अपील, तेल भराते समय मशीन की रीडिंग जरूर देखें ।
News In Detail
राजस्थान (Rajasthan) में पेट्रोल-डीजल भरवाने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक चौंकाने वाली खबर है। विधिक मापविज्ञान विभाग ने प्रदेश के सभी बड़े शहरों में औचक निरीक्षण कर एक ऐसी व्यवस्था का पर्दाफाश किया है जो लगातार जनता की जेब काट रही थी। विभाग की इस औचक कार्रवाई से पेट्रोल पंप संचालकों में हड़कंप मच गया है।
हर 5 लीटर पर 30 ML का खेल
जांच में सामने आया कि तकनीकी हेरफेर के जरिए कई पेट्रोल पंपों पर हर 5 लीटर पेट्रोल या डीजल की बिक्री पर 30 मिलीलीटर तक तेल कम दिया जा रहा था। पहली नजर में यह मात्रा बहुत छोटी लगती है, लेकिन जब इसे पूरे दिन और महीने की कुल बिक्री से जोड़ा जाता है, तो यह आंकड़ा हजारों लीटर का बैठता है।
अजमेर में एक पंप पर महीने में करीब 335 लीटर तेल कम देने का अनुमान सामने आया है। वहीं उदयपुर में प्रति माह 150 लीटर कम पेट्रोल देने का खुलासा हुआ। जोधपुर के पंपों पर हर महीने 126 लीटर तक कम सप्लाई पकड़ी गई। भरतपुर में प्रतिदिन 4 लीटर तक कम तेल देने का मामला खुला, वहीं बीकानेर में 3 नोजल सीज किए गए।
उपभोक्ता को कितना नुकसान?
विभाग ने आम भाषा में समझाया है कि यदि आप अपनी कार में 50 लीटर पेट्रोल भरवाते हैं, तो इस गड़बड़ी के कारण आपको कुल 300 मिलीलीटर पेट्रोल कम मिलेगा। यह 300 मिलीलीटर पेट्रोल किसी भी सामान्य कार या बाइक को 4 से 5 किलोमीटर तक चलाने के लिए पर्याप्त होता है। यानी उपभोक्ता बिना जाने हर बार एक लंबी दूरी के ईंधन का पैसा फालतू दे रहा है।
नियमित जारी रहेगी जांच
विधिक मापविज्ञान विभाग ने साफ किया है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक बार के लिए नहीं है। पूरे राजस्थान में यह अभियान लगातार जारी रहेगा। जिन पंपों पर गड़बड़ी पाई गई है, उनके नोजल सीज करने के साथ-साथ उन पर विधिक मापविज्ञान अधिनियम के तहत जुर्माना भी लगाया गया है।
विभाग ने जनता से जागरूक रहने की अपील की है कि वे पंप पर हमेशा रसीद लें, जीरो रीडिंग जरूर चेक करें और शक होने पर पंप पर मौजूद 5 लीटर के प्रमाणित टेस्ट माप से तेल की शुद्धता और मात्रा की जांच करने के अपने अधिकार का प्रयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
विभाग ने किन-किन जिलों में यह कार्रवाई की है?
विधिक मापविज्ञान विभाग ने राजस्थान (Rajasthan) के 7 प्रमुख संभागीय जिलों - जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा और भरतपुर में यह औचक जांच अभियान चलाया है।
जांच के दौरान पेट्रोल पंपों पर क्या गड़बड़ी मिली?
जांच में पाया गया कि कई पंपों की मशीनों में हेरफेर कर हर 5 लीटर ईंधन पर 30 मिलीलीटर तक कम तेल दिया जा रहा था, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा था।
कम तेल मिलने की शंका होने पर ग्राहक को क्या करना चाहिए?
ग्राहक को तुरंत पेट्रोल पंप पर उपलब्ध 5 लीटर के मानक टेस्ट माप से तेल की मात्रा जांचने को कहना चाहिए। इसके अलावा हमेशा पक्का बिल लेना चाहिए और संतुष्ट न होने पर विभाग में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
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