साइबर क्रिमिनल VPN से कंट्रोल कर रहे मोबाइल, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

Jageshwar prasad | Sept 01, 2026, 20:33 IST
राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी, इन पोर्न ऐप्स से बचें
राजस्थान पुलिस ने पोर्नोग्राफिक ऐप्स के जरिए होने वाली साइबर ठगी को लेकर एडवाइजरी जारी की है। Night Play, Reloop, Kyss जैसे ऐप्स डाउनलोड करने पर साइबर अपराधी मोबाइल का कंट्रोल हासिल कर बैंक खाते खाली कर देते हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पोर्न ऐप्स के जरिए मोबाइल हैक कर रहे साइबर ठग।
  • Night Play, Reloop, Kyss जैसे ऐप्स से बचें, पुलिस ने चेताया।
  • संदिग्ध एपीके डाउनलोड करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता।
  • एक्सेसिबिलिटी परमिशन मांगे तो न दें, मोबाइल हो सकता है कंट्रोल।
  • सेफ मोड मेंहटाएं संदिग्ध ऐप, साइबर फ्रॉड पर 1930 पर करें शिकायत।

साइबर अपराधी इन दिनों मोबाइल हैकिंग के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब वे पोर्नोग्राफिक ऐप्स के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इस बारे में आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है।



Night Play, Reloop, Kyss जैसे ऐप्स डाउनलोड करने पर मोबाइल हैक हो सकता है। ये ऐप एक्सेसिबिलिटी परमिशन हासिल कर बैंक खाते खाली कर देते हैं। पुलिस ने संदिग्ध ऐप को सेफ मोड में हटाने की सलाह दी है। साइबर फ्रॉड पर 1930 पर शिकायत करें।यह एडवाइजरी महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी की गई है।



कैसे करते हैं ठगी?

साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर अश्लील विज्ञापन डालते हैं। ये विज्ञापन टेलीग्राम, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दिखते हैं। लिंक पर क्लिक करने पर उपयोगकर्ता को फर्जी वेबसाइट पर ले जाया जाता है। वहां उन्हें संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए उकसाया जाता है।



किन ऐप्स से बचें?

पुलिस ने कुछ खास ऐप्स के नाम बताए हैं। इनमें Night Play, Reloop, Kyss, Vimo, Rivo, Nexo और Vixa शामिल हैं। ये ऐप सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर लोगों को लुभाते हैं। इन्हें डाउनलोड करते ही मुश्किल खड़ी हो जाती है।



क्या होता है ऐप डाउनलोड करने पर?

जैसे ही एपीके डाउनलोड होता है, अपराधियों का खेल शुरू हो जाता है। ऐप 'अपडेट' के नाम पर दूसरा पैकेज डाउनलोड कराता है। फिर एक्सेसिबिलिटी परमिशन मांगी जाती है। एक बार परमिशन मिलते ही ऐप मोबाइल पर कंट्रोल हासिल कर लेता है।



वीपीएन से बढ़ता है खतरा

कुछ ऐप मोबाइल में वीपीएन भी इंस्टॉल कर देते हैं। इससे पूरा इंटरनेट ट्रैफिक ठगों के सर्वर से गुजरता है। वे इसका इस्तेमाल बैंक खातों से पैसे निकालने के लिए करते हैं। ये ऐप सामान्य तरीके से अनइंस्टॉल नहीं होते।



क्या सावधानियां बरतें

पुलिस ने कई जरूरी सावधानियां बताई हैं:



  • सोशल मीडिया के संदिग्ध विज्ञापनों से बचें
  • अनजान ऐप्स को एक्सेसिबिलिटी परमिशन न दें
  • ऐप्स हमेशा गूगल प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करें
  • फोन में इंस्टॉल ऐप्स की नियमित जांच करें
  • गूगल प्ले प्रोटेक्ट को चालू रखें
  • बैंक ट्रांजैक्शन पर नजर रखें

सेफ मोड में ऐसे हटाएं संदिग्ध ऐप

यदि कोई ऐप नहीं हट रहा तो फोन को सेफ मोड में शुरू करें। इसके लिए पावर ऑफ विकल्प को दबाकर रखें। सेफ मोड का विकल्प दिखने पर उस पर क्लिक करें। फोन सेफ मोड में शुरू होने के बाद सेटिंग्स में जाकर ऐप को अनइंस्टॉल करें। इसके बाद फोन को सामान्य रूप से रीस्टार्ट करें।



साइबर ठगी होने पर क्या करें?

तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत करें। वित्तीय फ्रॉड होने पर 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें। इसके अलावा 9256001930 और 9257510100 पर भी शिकायत कर सकते हैं।



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