फोन में डॉक्यूमेंट, फोटो-वीडियो रखना पड़ सकता है भारी, पुलिस ने जारी किया अलर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- फोन में सेव डेटा बन सकता है साइबर ठगी की वजह।
- राजस्थान पुलिस ने पासवर्ड और बैंकिंग डेटा पर दी चेतावनी।
- डार्क वेब पर लीक हुआ 1 टीबी डेटा।
- साइबर ठग पहचान चोरी से लेकर ब्लैकमेल तक करते हैं शिकार।
- ठगी से बचने के लिए पुलिस ने जारी की सुरक्षा सलाह।
आपके फोन में सेव डेटा साइबर ठगी की बड़ी वजह बन सकता है। यह चेतावनी खुद राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार देशभर में हर दिन 1.3 लाख से ज्यादा साइबर हमले हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फोन में पासवर्ड, बैंकिंग पिन और निजी दस्तावेज रखना खतरनाक हो सकता है।
हाल ही में कुछ बड़े मामले भी सामने आए हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों ने चिंता बढ़ा दी है।
1 टीबी डेटा हुआ डार्क वेब पर लीक
इस मुद्दे पर अतिरिक्त महानिदेशक साइबर क्राइम वीके सिंह ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक कर्मचारी के ईमेल से करीब 1 टीबी डेटा लीक होने का मामला सामने आया था। यह डेटा डार्क वेब पर पहुंच गया था। यह घटना बताती है कि जरा सी लापरवाही कितना बड़ा नुकसान करा सकती है।
लोग फोन में क्या-क्या रखते हैं सेव
एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि लोग अपने फोन में कितना संवेदनशील डेटा रखते हैं। करीब 61 प्रतिशत लोग अपने निजी दस्तावेज फोन में सेव रखते हैं। 60 प्रतिशत लोग फोटो और वीडियो भी फोन में ही रखते हैं।
इसके अलावा 38 प्रतिशत लोग बैंकिंग जानकारी फोन में सेव करते हैं। 48 प्रतिशत लोग ऑफिस ईमेल भी फोन में खुला रखते हैं। 37 प्रतिशत लोग एआई चैट हिस्ट्री सेव रखते हैं। वहीं 34 प्रतिशत लोग अपने पासवर्ड भी फोन में ही सेव करते हैं।
साइबर ठग किन 4 तरीकों से बनाते हैं निशाना
साइबर ठग मुख्य रूप से चार तरीकों से लोगों को निशाना बनाते हैं। पहला तरीका है पहचान चोरी। आधार, पैन, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारी का दुरुपयोग किया जाता है। इसके जरिए फर्जी सिम, बैंक खाते या लोन तक लिए जा सकते हैं।
दूसरा तरीका वित्तीय धोखाधड़ी है। बैंकिंग ऐप, यूपीआई और ओटीपी तक पहुंच बनाकर खाते से रकम उड़ाई जाती है। तीसरा तरीका ब्लैकमेलिंग है। निजी फोटो, वीडियो और एआई चैट हिस्ट्री के जरिए ब्लैकमेल या डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध किए जाते हैं।
चौथा तरीका कॉरपोरेट जासूसी है। ऑफिस ईमेल और गोपनीय दस्तावेज चुराकर कंपनियों से फिरौती मांगी जाती है। यह चारों तरीके आम लोगों के साथ-साथ कंपनियों के लिए भी बड़ा खतरा हैं।
ठगी होने पर तुरंत करें यह काम
अगर किसी को साइबर ठगी या संदिग्ध गतिविधि का सामना करना पड़े, तो देर नहीं करनी चाहिए। सबसे पहले निकटतम पुलिस थाने या राजस्थान साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए।
शिकायत के लिए एक आसान तरीका भी है। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसकी वेबसाइट है cybercrime.gov.in। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी कॉल किया जा सकता है। राजस्थान पुलिस ने दो अलग हेल्पडेस्क नंबर भी जारी किए हैं। यह नंबर हैं 9256001930 और 9257510100।
राजस्थान पुलिस की जरूरी अपील
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों के लिए कई अहम सुझाव भी दिए हैं। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक वाईफाई पर बैंकिंग जैसे संवेदनशील काम करने से बचना चाहिए। अगर बहुत जरूरी हो तो भरोसेमंद वीपीएन का इस्तेमाल करना चाहिए।
फोन में स्टोरेज एन्क्रिप्शन और स्क्रीन लॉक हमेशा चालू रखने की सलाह दी गई है। ऐप्स को सिर्फ जरूरी परमिशन ही देनी चाहिए। बैंकिंग ऐप और जरूरी दस्तावेज होम स्क्रीन या गैलरी में खुला नहीं रखना चाहिए। इन्हें सिक्योर या हिडेन फोल्डर में रखना बेहतर है।
क्लाउड बैकअप को भी मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित रखना चाहिए। ऐप्स हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करने चाहिए। पुलिस ने फोन में स्क्रीन लॉक और जरूरी सुरक्षा फीचर हमेशा सक्रिय रखने की सलाह भी दी है।
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