सचिन पायलट की दोनों टांग कांग्रेस में, अब भाजपा के बहकावे में नहीं आएंगे, गहलोत ने आखिर क्यों कही यह बात?
News In Short
- बीजेपी प्रभारी राधामोहन ने सचिन पायलट को बताया बहरूपिया व भगोड़ा विधायक।
- राधामोहन ने कहा कि पायलट की एक टांग कांग्रेस में और दूसरी कहां, किसी को पता नहीं।
- अशोक गहलोत बोले - पायलट की दोनों टांगे कांग्रेस में, बीजेपी के बहकावे में अब नहीं आएंगे।
- गहलोत ने फिर छेड़ा 2020 की मानेसर कांड का मुद्दा, कहा— गलती का अहसास हो गया है।
- गहलोत ने बीजेपी पर चुनाव जीतने के लिए सरकारी संस्थाओं के दुरुपयोग का लगाया आरोप।
News In Detail
Tonk: राजस्थान की राजनीति में शह-मात का खेल अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच गया है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के टोंक दौरे में भाजपा प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल ने सचिन पायलट पर सीधा व्यक्तिगत हमला बोला। इसके जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पायलट का बचाव करते हुए एक बार फिर 2020 के मानेसर कांड को याद किया।
क्या कहा अशोक गहलोत ने?
बीजेपी प्रभारी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी ने पहले पायलट को बहला-फुसलाकर मानेसर भेज दिया था, लेकिन अब सचिन समझ भी गए हैं और संभल भी गए हैं। उन्हें अहसास हो गया है कि एक बार गलती करने का क्या परिणाम होता है।
गहलोत ने स्पष्ट किया कि पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में ही हैं और वे कहीं नहीं जाने वाले। पार्टी अब पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए चुनाव आयोग, ED और अन्य केंद्रीय संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
क्या कहा था राधामोहन दास अग्रवाल ने?
टोंक में आयोजित बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में राधामोहन दास अग्रवाल ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विवादित टिप्पणियां कीं थीं। उन्होंने पायलट को बहरूपिया और भगोड़ा करार देते हुए कहा कि वह न तो टोंक के रहने वाले हैं और न ही राजस्थान के। टोंक की जनता ने अनजाने में उन्हें चुन लिया। उन्होंने कहा कि उनकी एक टांग कांग्रेस में रहती है और दूसरी कहां है, किसी को पता नहीं। उन्होंने दावा किया कि टोंक असल में बीजेपी का गढ़ है। आगामी चुनावों में भाजपा जिले की सभी चारों सीटों पर जीत दर्ज करेगी।
क्या था मानेसर कांड?
मानेसर कांड राजस्थान की राजनीति का वह सबसे बड़ा नाटकीय घटनाक्रम है, जिसने 2020 में अशोक गहलोत सरकार को गिरने की कगार पर पहुंचा दिया था। यह विवाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सत्ता के संघर्ष का चरम बिंदु था।
सचिन पायलट और उनके खेमे के 19 विधायक अचानक राजस्थान छोड़कर हरियाणा के मानेसर में एक लग्जरी होटल (आईटीसी ग्रैंड भारत) में जाकर रुक गए थे। पायलट का आरोप था कि मुख्यमंत्री उन्हें दरकिनार कर रहे हैं और उन्हें काम करने की आजादी नहीं है।
पायलट के इस कदम से गहलोत सरकार अल्पमत में आती दिखी थी। गहलोत ने आरोप लगाया कि बीजेपी पायलट के साथ मिलकर उनकी सरकार गिराने की साजिश रच रही है और विधायकों की खरीद-फरोख्त की जा रही है।
इसी दौरान अशोक गहलोत और सचिन पायलट के रिश्तों में भारी कड़वाहट देखी गई। गहलोत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना नाम लिए पायलट के लिए 'निकम्मा' और 'नकारा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था, जो राजस्थान की राजनीति में आज भी चर्चा का विषय रहते हैं।
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