सीएम का साला बताने वाले प्रमोद शर्मा पहुंचे हाई कोर्ट की शरण में, फिलहाल राहत नहीं
News In Short
- खुद को सीएम का साला बताने वाले प्रमोद शर्मा की मुश्किल में।
- प्रमोद शर्मा हाई कोर्ट की शरण में, फिलहाल नहीं मिली राहत।
- हाई कोर्ट जमीन कब्जे से जुड़े इस मामले में कल शुक्रवार को करेगा सुनवाई।
- प्रमोद शर्मा पुलिस से नोटिस मिलने के बाद से चल रहे अंडरग्राउंड।
- प्रमोद शर्मा ने हाई कोर्ट में एफआईआर को दी है चुनौती।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में खुद को मुख्यमंत्री का साला बताकर प्रभाव जमाने वाले प्रमोद शर्मा अब कानूनी राहत पाने के लिए राजस्थान हाई कोर्ट की शरण में पहुंच गए हैं। उनकी याचिका पर एक मई शुक्रवार को सुनवाई होगी। अब शुक्रवार को ही तय होगा कि प्रमोद शर्मा को अदालत राहत देती है या नहीं।
हाई कोर्ट में क्या हुआ?
प्रमोद कुमार शर्मा ने अपने खिलाफ जयपुर के मानसरोवर थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की याचिका दायर की है। प्रमोद शर्मा ने याचिका में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए एफआईआर रद्द करने की गुहार की है। शर्मा ने मामले में अंतिम फैसला होने तक गिेरफ्तारी पर रोक लगाने को कहा है।
हालांकि गुरुवार को शर्मा को मामले में किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए शुक्रवार एक मई को सुनवाई तय की है।
क्या है पूरा जमीन घोटाला?
सत्ता के रसूख के आधार पर जमीन पर कब्जे से जुड़ा यह मामला करीब एक साल पुराना है। पिछले साल 13 जुलाई 2025 को घनश्याम शर्मा ने मानसरोवर थाने में एफआईआर दर्ज करा कर आरोप लगाया था कि प्रमोद शर्मा समेत 9 लोगों ने उनकी मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित कीमती जमीन पर कब्जा कर लिया है। इन्होंने जमीन के फर्जी कागजात तैयार किए। इसके बाद रसूख का इस्तेमाल कर जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया।
प्रमोद शर्मा का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वह कुछ लोगों के साथ मिलकर जमीनों पर कब्जा जमाते रहे हैं। प्रमोद शर्मा अक्सर खुद को मुख्यमंत्री का साला बताकर अफसरों और जमीन मालिकों पर दबाव बनाता था। मानसरोवर पुलिस ने इस मामले में प्रमोद शर्मा को एक साल बाद नोटिस थमाया। लेकिन, वह गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गए।
शासन की साख की लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि शासन की साख की लड़ाई बन गया है। सरकार के लिए यह साबित करना चुनौती है कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह खुद को सत्ता के कितना ही करीब क्यों न बताए। पुलिस के बढ़ते शिकंजे के बाद प्रमोद शर्मा 15 दिन से भूमिगत है।
जांच एजेंसियों का कड़ा रुख
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच एजेंसी इस बार ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रमोद शर्मा एंड कंपनी के खिलाफ के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटा लिए गए हैं। जल्द ही गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी।
कल का दिन अहम
अब सबकी नजरें हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। कल यह तय होगा कि क्या कोर्ट प्रमोद शर्मा को गिरफ्तारी से कोई अंतरिम संरक्षण देगा। या फिर पुलिस को स्वतंत्र जांच और गिरफ्तारी की खुली छूट मिलेगी?
कानून जानकारों का कहना है कि यदि कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो प्रमोद शर्मा के पास सरेंडर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। यह फैसला न केवल आरोपी का भविष्य तय करेगा, बल्कि राजस्थान में जीरो टॉलरेंस की नीति पर जनता के विश्वास को भी पुख्ता करेगा।
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