एपीओ हो गया था एक्सईएन, फिर भी खोल दिए 2 करोड़ से अधिक के टेंडर

Ashish Bhardwaj | May 25, 2026, 12:26 IST
PWD Tender Photograph: (The sootr)
राजस्थान में पीडब्ल्यूडी के एक एक्सईएन ने एपीओ के बाद टेंडरों में खेल कर दिया। एपीओ होने के बाद उसे अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना चाहिए, लेकिन उसने ठेकेदारों से मिलीभगत कर दो करोड़ रुपए के टेंडर खोल दिए।

News In Short

  • पीडब्ल्यूडी के एक एक्सईएन ने एपीओ के बाद टेंडरों में खेल कर दिया।
  • एक्सईएन पवन कुलश्रेष्ठ को प्रशासनिक आधार पर कर दिया था एपीओ।
  • नियम के अनुसार एपीओ आदेश के एक्सईएन को पदमुक्त हो जाना चाहिए था।
  • एपीओ के बाद भी बना रहा सीट, फिर दो दिन बाद खोल दिए दो करोड़ के टेंडर
  • पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ने मामला उजागर होने के बाद बैठाई है जांच।

News In Detail

​Jaipur: राजस्थान में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में नियमों को ताक पर रखकर अनियमितताएं बरतने का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग के एक एक्सईएन (अधिशासी अभियंता) पर आरोप है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी तरह से अंधेरे में रखते हुए तय समय सीमा के भीतर मिलीभगत करके 12 निजी कंपनियों के दो करोड़ रुपए से अधिक के टेंडर खोल दिए। इस मामले के उजागर होने के बाद उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।



​एपीओ के बाद भी सक्रिय रहे अधिकारी

पीडब्ल्यूडी के जयपुर शहर तृतीय के एक्सईएन पवन कुलश्रेष्ठ को एपीओ (आदेश की प्रतीक्षा में) कर दिया गया था। नियम यह है कि एपीओ किए जाने के बाद कोई भी अधिकारी किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने या टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अधिकृत नहीं होता है।



इसके बावजूद, इस अधिकारी ने 19 मई को एपीओ आदेश जारी होने के बाद भी अपनी सीट पर सक्रियता दिखाई। ​हैरानी की बात यह है कि एपीओ होने के ठीक दो दिन बाद बिना किसी उच्च स्वीकृति के उन्होंने न केवल फाइलों का निपटारा किया, बल्कि दो करोड़ से अधिक की लागत वाले महत्वपूर्ण टेंडरों को भी खोल दिया।



इस जल्दबाजी के पीछे विभाग के कुछ ठेकेदारों और कंपनियों के साथ सांठगांठ की आशंका जताई जा रही है।



​मॉनिटरिंग में चूक और खुली छूट

इस पूरे घटनाक्रम ने विभाग की आंतरिक मॉनिटरिंग और डिजिटल लॉकिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक अधिकारी को आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया या एपीओ कर दिया गया था, तो उनकी डिजिटल आईडी और टेंडर खोलने के अधिकार (Digital Signature/Key) तुरंत ब्लॉक क्यों नहीं किए गए?



​विभागीय सूत्रों का कहना है कि मॉनिटरिंग में हुई इसी बड़ी चूक का फायदा उठाकर अधिकारी को खुली छूट मिल गई। उन्होंने मुख्यालय को सूचित किए बिना आनन-फानन में टेंडर विंडो को एक्सेस किया और चहेती 12 कंपनियों के टेंडरों को मंजूरी की प्रक्रिया में डाल दिया।



किसी को चार्ज नहीं दिया

मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि एपीओ होने के बाद उक्त एक्सईएन ने अपने पद का कार्यभार (चार्ज) किसी अन्य अधिकृत अधिकारी या कनिष्ठ अभियंता को नहीं सौंपा। नियमानुसार पद छोड़ने से पहले चार्ज हैंडओवर करना अनिवार्य होता है।


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इस विषय पर जब कलेक्टरेट और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नए अधिकारी को इस सीट का विधिवत चार्ज नहीं दिया गया था। यानी तकनीकी रूप से बिना किसी आधिकारिक प्रभार के ही पिछले दरवाजे से इन टेंडरों को खोलकर कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।



​उच्च स्तरीय जांच शुरू, ठेकेदारों में खलबली

मामला सीधे तौर पर दो करोड़ रुपए से अधिक के सरकारी फंड और टेंडर आवंटन में पारदर्शिता से जुड़ा है, जिसे देखते हुए पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग के मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।


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संदिग्ध रूप से खोले गए सभी 12 कंपनियों के टेंडरों की प्रक्रिया पर फिलहाल आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है। 19 मई के बाद से संबंधित कार्यालय में हुईं सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन गतिविधियों के रिकॉर्ड और लॉग फाइल्स को जांच टीम ने अपने कब्जे में ले लिया है।



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