चार सरकारी यूनिवर्सिटी सिर्फ कागजों में, राज्यपाल की हाईलेवल कमेटी करेगी इनकी जांच
News In Short
- राज्यपाल ने चार सरकारी विश्वविद्यालयों की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी का किया गठन।
- सरकारी विश्वविद्यालयों में कोर्स, स्टाफ और भवन की भारी कमी, सिर्फ कागजों में ही चल रहे हैं।
- राज्यपाल की कमेटी विश्वविद्यालयों की उपादेयता और आवश्यकता की समीक्षा करेगी।
- कमेटी के संयोजक उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) बनाए गए हैं।
- कमेटी में विश्वविद्यालयों से जुड़े विभागों के किसी भी अधिकारी को नहीं किया गया है शामिल।
News In Detail
Jaipur: प्रदेश में सरकारी विश्वविद्यालयों की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। वाहवाही लूटने के लिए शुरू किए गए 4 सरकारी विश्वविद्यालय सिर्फ कागजों में ही कैद हैं। इनमें न कोर्स है, न स्टाफ है, न ही भवन है। यानी सिर्फ घोषणाएं की गईं हैं। अब राज्यपाल ने इन चारों के औचित्य, यूटिलिटी और आवश्यकता की जांच के लिए एक हाईलेवल कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद इन विश्वविद्यालयों के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।
किन चार विश्वविद्यालयों की होगी जांच?
राजस्थान राजभवन ने जिन चार विश्वविद्यालयों को जांच के दायरे में रखा है, वे हैं विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय जयपुर, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी झुंझुनूं, बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय जयपुर और महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय जोधपुर। इन चारों में से सिर्फ एक विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति हैं। दो में कार्यवाहक व्यवस्था है और एक में तो कुलपति नियुक्त ही नहीं है। यानी शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी के बिना ही ये संस्थान संचालित हो रहे हैं या यूं कहें कि सिर्फ कागज में ही चल रहे हैं।
किसे शामिल किया गया है हाईलेवल कमेटी में?
राज्यपाल ने इस कमेटी को इस तरह से गठित किया है कि उसमें इन विश्वविद्यालयों से जुड़े विभागों (खेल, सामाजिक न्याय, कौशल) के किसी भी अधिकारी को शामिल नहीं किया गया है। यह स्वतंत्र जांच की ओर इशारा करता है। कमेटी के संयोजक उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) बनाए गए हैं, जबकि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय और राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सदस्य होंगे।
यह कमेटी वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इन विश्वविद्यालयों की आवश्यकता, उपादेयता, औचित्य और वास्तविक स्थिति की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपेगी।
विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, जयपुर
विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, जयपुर की स्थापना 2017 में हुई थी। सरकार के ‘स्किल इंडिया’ मिशन का राजस्थानी चेहरा होने का दावा करने वाला यह विश्वविद्यालय नौ साल बाद भी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सका। इसका अपना कोई भवन नहीं है, बल्कि यह जयपुर के शिक्षा संकुल में किराए के भवन से चल रहा है। स्थायी स्टाफ की भारी कमी है। यह विश्वविद्यालय प्राइवेट संस्थानों को मान्यता देने और उनकी डिग्रियों को अनुमोदित करने के काम तक सीमित हो गया है।
स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, झुंझुनूं
स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, झुंझुनूं का मामला शायद सबसे दयनीय है। सरकार ने 2013 में इसके गठन का कानून (एक्ट) तो पारित कर दिया, लेकिन 12 साल बाद भी यह कागजों से बाहर नहीं आ सकी है। झुंझुनूं में जमीन चिह्नित कर ली गई, लेकिन काम नहीं हुआ। इस विश्वविद्यालय में कुलपति तक नियुक्त नहीं किया गया है ।
बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर
सरकार ने 2022-23 के बजट में दिव्यांगों के लिए एक विश्वविद्यालय की घोषणा करते हुए बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर की स्थापना का ऐलान किया था। यह एक सराहनीय कदम था, लेकिन हकीकत बेहद दयनीय है। कुलपति को नियुक्ति तो मिल गई, लेकिन उनके पास काम करने के लिए न कोई स्टाफ है, न कोई भवन, न कोई कोर्स। सूत्रों के अनुसार, कुलपति ने विश्वविद्यालय शुरू करने के लिए सरकार को दर्जनों पत्र लिखे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय, जोधपुर
यह सबसे नवीनतम घोषित विश्वविद्यालय है, जिसकी घोषणा 2023-24 के बजट में की गई थी। महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय, जोधपुर को देखकर लगता है कि सरकार ने पिछली गलतियों से कुछ नहीं सीखा। जोधपुर में एक किराए की बिल्डिंग ले ली गई है, जिसे ‘विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिया गया है। स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं हुई है, केवल कार्यवाहक व्यवस्था है। कुछ लोगों को रखा गया है, लेकिन आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक स्टाफ न के बराबर है।
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