CJP के एक्शन से घबराई सरकार, स्कूलों के लिए जारी फरमान, कांग्रेस उठाएगी मुद्दा
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति एंट्री पर रोक।
- फोटो, वीडियो और इंटरव्यू के लिए लिखित मंजूरी जरूरी।
- हर बाहरी व्यक्ति की विजिटर रजिस्टर में होगी एंट्री।
- शिक्षा विभाग ने बच्चों की सुरक्षा और निजता को बताया वजह।
- कांग्रेस ने आदेश को तानाशाही बताते हुए वापसी की मांग की।
राजस्थान सरकार ने CJP के आंदोलन के बाद सरकारी स्कूल के लिए एक नया आदेश जारी किया है। अब सरकारी स्कूलों में अब बिना अनुमति प्रवेश नहीं मिलेगा। शिक्षा विभाग ने फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर भी सख्त रोक लगाई है। यह आदेश स्कूल समय में बढ़ती अनाधिकृत गतिविधियों को देखते हुए जारी हुआ है। कांग्रेस ने इस आदेश को तानाशाही करार दिया है। पार्टी ने सरकार से आदेश वापस लेने की मांग की है।
यह पूरा मामला अलवर में एक स्कूल की छत टूटने पर हुआ। जहां cjp (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने जाकर आदोलन किया उसके बाद सरकार ने यह आदेश जारी किया। अब इस मामले में कांग्रेस ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
दरअसल हाल ही के दिनों में स्कूल परिसर में बिना अनुमति घुसने और वीडियो बनाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। कई बार शैक्षणिक गतिविधियों और बच्चों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो चुके हैं। इसी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। इसके तहत अब बिना संस्था प्रधान की लिखित अनुमति के कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में नहीं घुस सकेगा। फोटो, वीडियो या इंटरव्यू लेने से पहले भी अनुमति जरूरी होगी। सिर्फ आधिकारिक कामकाज के लिए आए सरकारी अधिकारी ही इस नियम से बाहर रहेंगे।
जूली बोले, यह तानाशाही आदेश है
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस आदेश पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने टूटी छतों और शिक्षकों की कमी का समाधान निकालने की बजाय, इन खामियों को छुपाने का रास्ता चुना है। जूली के मुताबिक अब बिना अनुमति कोई अंदर नहीं जा सकेगा, ताकि स्कूलों की असली हालत बाहर न आए। उन्होंने सरकार से यह आदेश जल्द वापस लेने को कहा है। ऐसा न होने पर सविनय अवज्ञा आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
डोटासरा ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि सरकार स्कूलों की हालत सुधारने की बजाय अपनी नाकामी छिपा रही है। डोटासरा ने पूछा कि अगर स्कूलों में सब कुछ ठीक है, तो डर किस बात का है। उन्होंने कहा कि स्कूल जनता के हैं, किसी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं। उनके मुताबिक अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की निगरानी कमजोर करना पारदर्शिता के खिलाफ है।
आदेश में क्या-क्या शामिल है
शिक्षा विभाग के इस आदेश में कई अहम बिंदु शामिल हैं। इन्हें समझना जरूरी है।
- बिना प्रधानाचार्य की अनुमति के किसी बाहरी व्यक्ति को एंट्री नहीं मिलेगी
- हर आगंतुक को विजिटर रजिस्टर में एंट्री करनी होगी
- शिक्षक या अधिकारी के साथ हुए बिना क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल या ग्राउंड में जाना मना होगा
- बिना लिखित अनुमति फोटो, वीडियो, इंटरव्यू या लाइव स्ट्रीमिंग नहीं होगी
- बच्चों की निजता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही फोटो-वीडियो का इस्तेमाल होगा
- नियम तोड़ने पर प्रधानाचार्य पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को सूचित करेंगे
- सुरक्षा या अनुशासन को खतरा लगने पर प्रधानाचार्य किसी को भी एंट्री से रोक सकेंगे
बच्चों की सुरक्षा पर भी जोर
आदेश में बच्चों की निजता को खास तवज्जो दी गई है। स्कूल प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी बच्चे की फोटो या पहचान बिना अनुमति सार्वजनिक न हो। अगर कोई गतिविधि बच्चे के हित में नहीं है, तो उसे रोका जाएगा। इससे बच्चों की गरिमा और सुरक्षा दोनों बनी रहेगी।
फिलहाल यह मामला सियासी रंग ले चुका है। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम बच्चों की सुरक्षा और स्कूल के अनुशासन के लिए जरूरी है। वहीं कांग्रेस इसे सरकार की नाकामी छुपाने की कोशिश बता रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है।
FAQ
- राजस्थान के स्कूलों में नया नियम क्या है?
अब बिना संस्था प्रधान की लिखित अनुमति के कोई बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में नहीं जा सकेगा। फोटो और वीडियो बनाने पर भी यही नियम लागू होगा। यह आदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जारी किया है। - कांग्रेस स्कूल परिसर में बिना अनुमति के प्रवेश के आदेश का विरोध क्यों कर रही है?
कांग्रेस का कहना है कि यह आदेश स्कूलों की खामियां छिपाने के लिए लाया गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे तानाशाही आदेश बताया है। पार्टी ने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। - सरकारी अधिकारी भी स्कूल परिसर में बिना अनुमति के प्रवेश के आदेश के नियम के दायरे में आएंगे?
नहीं, आधिकारिक कामकाज के लिए अधिकृत सरकारी अधिकारियों को इस नियम से छूट दी गई है। बाकी सभी बाहरी व्यक्तियों को अनुमति लेनी होगी। यह छूट सिर्फ आधिकारिक ड्यूटी तक सीमित है।
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