स्कूल का खेल मैदान दे दिया पूर्व विधायक की रिसॉर्ट को, हाईकोर्ट ने कलेक्टर के फैसले पर लगाई रोक
News In Short
- सीकर में स्कूल का खेल मैदान दे दिया पूर्व विधायक प्रेमसिंह बाजौर की रिसॉर्ट को।
- प्रिंसिपल ने खेल मैदान को उपयोग नहीं मानते हुए की थी वापस लेने की सिफारिश।
- कुछ दिन बाद कलेक्टर ने मैदान की जमीन पूर्व विधायक बाजौर की कंपनी को दे दी।
- मामला पता चलने के बाद इस मामले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
- हाई कोर्ट ने बच्चों के हित में कलेक्टर के आवंटन आदेश पर लगा दी अंतरिम रोक।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में सीकर जिला कलेक्टर द्वारा स्कूल के खेल मैदान को डेजर्ट सफारी और रिसॉर्ट के लिए आवंटित करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस कड़े रुख ने न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। यह रिसॉर्ट पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजौर के परिवार की है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद सीकर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाजौर से जुड़ा है। साल 2023 में इस स्कूल के खेल मैदान के लिए 2 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई थी, जिससे बच्चों को खेलकूद के लिए उचित स्थान मिल सके। लेकिन हाल ही में विद्यालय के प्रिंसिपल ने एक चौंकाने वाली सिफारिश की। उन्होंने तर्क दिया कि यह मैदान स्कूल से 400 मीटर दूर है, इसलिए इस आवंटन को निरस्त कर देना चाहिए।
प्रिंसिपल की इसी दलील को आधार बनाकर सीकर जिला कलेक्टर ने 5 फरवरी 2026 को स्कूल के खेल मैदान का आवंटन रद्द कर दिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस निरस्तीकरण के मात्र चार दिन बाद ही यह बेशकीमती जमीन बाजौर डेजर्ट सफारी एंड रिसॉर्ट को आवंटित कर दी गई।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और रोक
जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकल पीठ ने अशोक कुमार व अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई। याचिकाकर्ता के वकील केतन धाभाई ने कोर्ट में दलील दी कि स्कूल के प्रिंसिपल को खेल मैदान के आवंटन को निरस्त करने की सिफारिश करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
400 मीटर की दूरी कोई ऐसी बड़ी वजह नहीं है कि बच्चों से उनका खेल का मैदान छीन लिया जाए। बिना किसी वैकल्पिक भूमि की व्यवस्था किए स्कूल की जमीन आनन-फानन में पूर्व विधायक बाजौर की कंपनी को दे दी गई।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के 5 फरवरी के आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार, राजस्व विभाग, जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक स्कूल पहले की तरह ही इस खेल मैदान का उपयोग करता रहेगा।
राजनीतिक कनेक्शन के आरोप
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब यह खुलासा हुआ कि जिस निजी फर्म बाजौर डेजर्ट सफारी को जमीन दी गई, उसका सीधा संबंध पूर्व विधायक और सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर के परिवार से है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी ने मिलकर एक निजी फर्म को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए बच्चों के खेल के मैदान की बलि चढ़ा दी।
जनता और अभिभावकों में आक्रोश
बाजौर के ग्रामीणों और स्कूल के बच्चों के अभिभावकों में इस फैसले को लेकर गहरा रोष था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां सरकार खेलो इंडिया जैसे अभियानों के जरिए खेल को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं जमीनी स्तर पर भू-माफियाओं और रसूखदारों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी स्कूलों के संसाधनों को लूटा जा रहा है।
आगे क्या?
हाईकोर्ट की इस रोक के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है। राजस्व विभाग और जिला प्रशासन को अब कोर्ट में यह साबित करना होगा कि आखिर किन नियमों के तहत एक स्कूल की जमीन को रिसॉर्ट बनाने के लिए निजी हाथों में सौंपा गया।
ये भी पढे़:-
डकैती के दौरान दोनों हाथ कटने के बाद भी डटे रहे थे मानसिंह, 44 साल बाद अब मिलेगा सम्मान
डॉक्टरों का करिश्मा, महज 14 रुपए के इंजेक्शन ने बचाई नवजात की जान
मालपुरा दंगा मामला, 26 साल बाद 10 आरोपी बरी, 5 हत्याओं के मामले में कोर्ट का फैसला
राजस्थान के थार के रेगिस्तान में बड़ी खोज: 'मोग्रस शुष्का' नाम से मिली जंपिंग स्पाइडर की नई प्रजाति