डॉक्टरों का करिश्मा, महज 14 रुपए के इंजेक्शन ने बचाई नवजात की जान
thesootr Desk | Apr 15, 2026, 19:44 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में जयपुर के जेके लोन अस्पताल में डॉक्टरों ने मात्र 14 रुपए के इंजेक्शन से एक नवजात की जान बचाई, जिसे गंभीर संक्रमण और मेटाबॉलिक बीमारी थी। इसके पहले दो बच्चों की इसी बीमारी से मौत हो चुकी थी।
News In Short
- जयपुर के जेके लोन अस्पताल में 14 रुपए के इंजेक्शन ने नवजात की जान बचाई।
- बच्चे के एब्सोल्यूट न्यूट्रोफिल काउंट (ANC) की गंभीर स्थिति में सस्ता इलाज हुआ कारगर।
- इस दुर्लभ बीमारी का पूरा इलाज महज 56 रुपए में हुआ, जिसमें 4 इंजेक्शन शामिल।
- हाइड्रॉक्सीकोबालामिन इंजेक्शन ने बच्चे का बोन मैरो सक्रिय किया और उसे बचाया।
- डॉक्टरों ने सही समय पर बीमारी की सही पहचान की और बच्चे की जान बचाई।
News In Detail
नवजात के शरीर में संक्रमण से लड़ने की ताकत नहीं बची थी
परिवार बताता है कि इससे पहले वे बच्चे को एक निजी अस्पताल ले गए थे, लेकिन वहाँ हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। आखिरकार उम्मीद की आखिरी किरण लेकर वे जेके लोन पहुंचे। डॉक्टरों ने तुरंत जांच की।बच्चे का एब्सोल्यूट न्यूट्रोफिल काउंट (ANC) यानी शरीर में संक्रमण से लड़ने वाली सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या मात्र 82 थी।
सामान्य नवजात में यह संख्या 1500 से 7000 के बीच होती है। मेडिकल साइंस के अनुसार, अगर ANC 500 से नीचे गिर जाए तो शरीर संक्रमण के खिलाफ लगभग बेजान हो जाता है। और यहां तो यह 82 था। बच्चे की जान पर बन आई थी।
दो बच्चे पहले ही जा चुके थे
डॉक्टरों ने समझी बिमारी
जांच में पता चला कि बच्चे के शरीर में विटामिन B12 को अवशोषित करने वाला एंजाइम ठीक से काम नहीं कर रहा था। इस वजह से बोन मैरो (जहाँ खून बनता है) पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुका था। नतीजा न तो पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएँ बन रही थीं, न सफेद। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके दुनियाभर में अब तक मात्र 60 मामले ही रिपोर्ट हुए हैं। यानी, यह बेहद दुर्लभ है।
14 रुपए के इंजेक्शन ने बचाई जान
कुछ ही दिनों में चमत्कार हो गया। बच्चे का बोन मैरो सक्रीय हो गया। उसका ANC स्तर जो मात्र 82 था, वह बढ़ता गया और 6000 के पार पहुंच गया। बच्चे ने संक्रमण से लड़ना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार आया। कुल मिलाकर इस पूरे इलाज पर मात्र 56 रुपए की लागत आई, 14 रुपए का एक इंजेक्शन और कुल 4 इंजेक्शन। आज वह बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
कभी-कभी सबसे सस्ती दवा ही सबसे बड़ा उपचार होती है
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