4 स्मार्ट सिटी पर 7025 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा सपना

Ashish Bhardwaj | Aug 05, 2026, 10:52 IST
4 स्मार्ट सिटी
राजस्थान के जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर पर 11 साल में 7025 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद एक भी शहर स्मार्ट सिटी नहीं बन सका। अब राजस्थान में 84 शहरों के लिए 9500 करोड़ रुपए का नया प्लान बना है। यह पैसा एशियन डेवलपमेंट बैंक देगा और योजना 2047 तक चलेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान में 84 शहरों के लिए नया स्मार्ट प्लान तैयार।
  • 11 साल में 7025 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा स्मार्ट सिटी सपना।
  • 2047 तक बदलेंगे शहर, एडीबी देगा 9500 करोड़ फंड।
  • सैटेलाइट सिटी और ट्रैफिक सुधार पर होगा बड़ा खर्च।
  • अपशिष्ट प्रबंधन से विरासत संरक्षण तक होंगे काम।

राजस्थान में स्मार्ट सिटी योजना को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर को जून 2015 में स्मार्ट सिटी घोषित किया गया था। इन चारों शहरों को स्मार्ट बनाने पर 11 साल में 7025 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद चार में से एक भी शहर अब तक स्मार्ट सिटी नहीं बन सका।



अब सरकार ने नई शुरुआत की है। 9500 करोड़ रुपए का नया प्लान तैयार किया गया है। यह प्लान 84 शहरों के लिए बनाया गया है और इसमें 5 तरह के काम होंगे।



कौन देगा इतना बड़ा फंड

इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए पैसा एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी एडीबी देगा। इसी वजह से अफसरों ने 9500 करोड़ रुपए का यह नया प्लान तैयार किया है। यह प्लान साल 2047 तक चलेगा।



इस योजना में सिर्फ चार बड़े शहर ही शामिल नहीं हैं। इसमें कई अन्य शहरों को भी जोड़ा गया है। हालांकि अब तक का रिकॉर्ड बताता है कि ज्यादातर फंड बड़े शहर ही ले जाते हैं।



सैटेलाइट सिटी पर रहेगा खास फोकस

नए फंड का बड़ा हिस्सा एक खास मकसद के लिए खर्च होगा। यह पैसा बड़े शहरों के चारों तरफ सैटेलाइट सिटी बसाने पर खर्च होगा। इसके अलावा बड़े शहरों से स्मार्ट कनेक्टिविटी बनाने पर भी खर्च होगा। अपशिष्ट और जल-बाढ़ प्रबंधन भी इसका अहम हिस्सा है।



संबंधित अफसरों का कहना है कि इस परियोजना का बड़ा मकसद है। वे चाहते हैं कि अत्यधिक शहरीकृत शहरों और उनके सैटेलाइट नगरों का विकास हो। इससे शहरों के अनियोजित विस्तार को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा। आखिरी लक्ष्य है कि इन शहरों को रहने लायक बेहतर जगह बनाया जाए।



यातायात सुधार पर होगा बड़ा खर्च

इस पूरे प्लान का एक हिस्सा यातायात सुधार पर केंद्रित है। 7 जिला मुख्यालयों पर यातायात सुधार के लिए 2022 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें जयपुर, जोधपुर, कोटा और भरतपुर का विकास एडीबी के जरिए होगा। वहीं बीकानेर, उदयपुर और अजमेर में यह काम शहरी परिवहन नेटवर्क के जरिए होगा।



बाढ़ प्रबंधन और विरासत संरक्षण पर भी खर्च

प्लान में शहरी सुरक्षा से जुड़े काम भी शामिल हैं। 56 शहरों में बाढ़ प्रबंधन और ड्रेनेज कार्य पर 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसी तरह 56 शहरों में कमांड सेंटर, विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास पर 701 करोड़ रुपए खर्च होंगे।



अपशिष्ट जल और ठोस कचरा प्रबंधन

इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा अपशिष्ट जल प्रबंधन पर खर्च होगा। 67 शहरों में अपशिष्ट जल प्रबंधन और शोधित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग पर 4047 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह पूरे प्लान की सबसे बड़ी राशि है।



इसके अलावा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का काम भी होगा। यह काम 32 शहरों में किया जाएगा। इनमें चार बड़े शहरों के अलावा 28 सैटेलाइट जिले भी शामिल हैं।



स्मार्ट सिटी के 11 चरण पूरे

राजस्थान सरकार की स्मार्ट सिटी योजना अब तक कई चरणों से गुजर चुकी है। इसके 11 चरण पहले ही पूरे हो चुके हैं। अब 84 शहरों के लिए 2047 तक 5 नए चरणों में काम होगा।



एक और बड़ी योजना भी इसमें शामिल है। 'राजस्थान अर्बन लिवेबिलिटी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट' के तहत 3492 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इन शहरों में अपशिष्ट जल प्रबंधन के अलावा और भी कई काम होंगे। इनमें बाढ़ प्रबंधन, ड्रेनेज कार्य, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, विरासत संरक्षण-पर्यटन और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसे काम शामिल हैं।



FAQ

  1. राजस्थान की स्मार्ट सिटी योजना पर अब तक कितना खर्च हुआ है?
    जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर पर 11 साल में 7025 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद इनमें से कोई भी शहर पूरी तरह स्मार्ट सिटी नहीं बन सका।
  2. नए 9500 करोड़ के प्लान में क्या शामिल है?
    इस प्लान में यातायात सुधार, बाढ़ प्रबंधन, विरासत संरक्षण, अपशिष्ट जल प्रबंधन और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे 5 तरह के काम शामिल हैं। यह पैसा एशियन डेवलपमेंट बैंक देगा।
  3. स्मार्ट सिटी योजना नया प्लान कब तक चलेगा?
    यह नया प्लान 2047 तक चलेगा। स्मार्ट सिटी योजना के 11 चरण पहले ही पूरे हो चुके हैं और अब 5 नए चरणों में काम होगा।

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