विदेश से MBBS, FMGE में बार-बार फेल, फिर फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर की इंटर्नशिप
समझें क्या है पूरा मामला
- विदेश से MBBS कर 25-30 लाख में बनवाए फर्जी FMGE प्रमाण पत्र
- राजस्थान SOG ने इस मामले में 3 और डॉक्टरों को किया गिरफ्तार
- फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर मेडिकल कॉलेजों में करने लगे इंटर्नशिप
- FMGE में 3-8 बार फेल हुए फर्जी डॉक्टर, फिर बनवाया फर्जी प्रमाण पत्र
- 100 से अधिक चिह्नित, 30 गिरफ्तार, RMC के पूर्व रजिस्ट्रार भी शामिल
राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने विदेश से MBBS करने के बाद फर्जी FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। SOG ने तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों ने 25 से 30 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए। इसके बाद उन्होंने राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में पंजीयन करवाया और इंटर्नशिप की। SOG को इस गिरोह से जुड़े 100 से अधिक डॉक्टरों का भी पता चला है।
कौन हैं आरोपी?
SOG ने तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है:
आशीष कुमार शर्मा (डीग निवासी): कजाकिस्तान से MBBS, तीन बार FMGE में फेल, 25 लाख में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया।
राजेंद्र कुमार यादव (मुरलीपुरा, जयपुर): चीन से MBBS, 8 बार FMGE में फेल, 29 लाख में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। वह अपनी पत्नी के नारायण हॉस्पिटल में मैनेजमेंट का काम देख रहा था।
नरेश रोलानिया (कोटपूतली-बहरोड़ निवासी): कजाकिस्तान से MBBS, 3 बार FMGE में फेल, 26 लाख में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। वह कोटपूतली के पल्स हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में बिना पंजीयन के मरीजों का इलाज कर रहा था।
कैसे बनवाए फर्जी प्रमाण पत्र?
आरोपियों ने FMGE परीक्षा पास न कर पाने के कारण फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने वाले गिरोह से संपर्क किया। आशीष ने दौसा निवासी शुभम गुर्जर (जो पहले गिरफ्तार हो चुका है) के जरिए 25 लाख रुपए में सर्टिफिकेट बनवाया। राजेंद्र ने बहरोड़ निवासी संदीप से 29 लाख रुपए में और नरेश ने अपने रिश्तेदार नरेंद्र से 26 लाख रुपए में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया।
इन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर उन्होंने RMC में पंजीयन करवाया और राजकीय मेडिकल कॉलेज, करौली, उदयपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की।
क्या है FMGE परीक्षा?
FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) उन भारतीय छात्रों के लिए अनिवार्य है, जिन्होंने विदेश से MBBS की डिग्री हासिल की है। इस परीक्षा को पास किए बिना वे भारत में मेडिकल पंजीयन या प्रैक्टिस नहीं कर सकते। यह स्क्रीनिंग टेस्ट राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) द्वारा आयोजित किया जाता है।
आगे क्या होगा?
SOG ने आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। SOG के ADG विशाल बंसल ने बताया कि 100 से अधिक ऐसे डॉक्टरों को चिह्नित किया गया है।
इनमें से RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, UDC अखिलेश माथुर, LDC फरहान हसन और मुख्य आरोपी भानाराम माली सहित 30 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आगे की जांच जारी है।
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