PM सूर्य घर योजना संकट में, DCR पैनल से घरेलू सोलर हुआ 40 हजार महंगा
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान देश में सबसे ज्यादा सौर ऊर्जा उत्पादन करने वाला राज्य है।
- डीसीआर नियम के कारण सोलर पैनल की लागत लगभग दोगुनी हो गई है।
- नॉन-डीसीआर पैनलों की कमी से कई सोलर प्रोजेक्ट अटक गए हैं।
- जयपुर समेत कई जगह इंस्टॉलेशन का काम पैनल न मिलने से रुका है।
- उद्योग और वेंडर दोनों को नुकसान और निवेश पर संकट बढ़ा है।
राजस्थान देश में सबसे ज्यादा सौर ऊर्जा बनाने वाला राज्य है। लेकिन अभी यहां की सोलर इंडस्ट्री बड़ी मुश्किल में है। केंद्र सरकार ने डीसीआर यानी घरेलू सामग्री से बने सोलर पैनल अनिवार्य कर दिए हैं। इन पैनलों की कीमत सामान्य पैनलों से दोगुनी है और उपलब्धता भी कम है। इससे घरेलू उपभोक्ता से लेकर उद्योग तक सब प्रभावित हैं और हजारों प्रोजेक्ट अधर में लटक गए हैं।
क्या है DCR का नियम
केंद्र सरकार ने देश में सोलर सेल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए डीसीआर (DCR – Domestic Content Requirement) नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर पैनल में लगने वाले सेल भारत में ही बने होने चाहिए।
पहले नॉन-डीसीआर पैनल भी चलते थे जिनमें विदेश से आयातित सेल लगे होते हैं। लेकिन 1 जून से नॉन-डीसीआर पैनलों का ग्रिड कनेक्शन यानी कमीशनिंग बंद कर दी गई। विरोध के बाद पीएम सूर्य घर योजना में थोड़ी राहत मिली, लेकिन कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्टों पर रोक अभी भी जारी है।
दोगुनी कीमत, आधी उपलब्धता
यही असली समस्या है। नॉन-डीसीआर पैनल इस वक्त 15 से 16 रुपए प्रति वॉट में मिलते हैं। लेकिन डीसीआर पैनल की कीमत 30 से 32 रुपए प्रति वॉट तक पहुंच गई है। यानी लगभग दोगुना।
इसका सीधा असर आम घरों पर पड़ रहा है। 3 किलोवाट का घरेलू सोलर सिस्टम लगाने की लागत 35 से 40 हजार रुपए तक बढ़ गई है। प्रति किलोवाट करीब 12 हजार रुपए का बोझ बढ़ा है।
जयपुर में छत तैयार, पैनल नहीं
जयपुर समेत कई शहरों में अजीब स्थिति है। लोगों के घरों पर सोलर का स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है। लेकिन पैनल नहीं मिल रहे, इसलिए इंस्टॉलेशन रुकी हुई है।
राजस्थान सोलर एसोसिएशन के सीईओ नितिन अग्रवाल के अनुसार राज्य में पीएम सूर्य घर योजना के तहत 2200 से अधिक वेंडर रजिस्टर्ड हैं। अकेले जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में करीब 800 वेंडर काम कर रहे हैं। इन सबके सामने संकट खड़ा हो गया है।
वेंडर और ग्राहकों में विवाद
कई वेंडरों ने पहले की कम कीमत पर एडवांस लेकर ऑर्डर बुक किए थे। अब डीसीआर पैनल की कीमत बढ़ गई और सप्लाई भी नहीं है। इधर ग्राहकों के बैंक लोन शुरू हो चुके हैं और बिजली के बिल भी आ रहे हैं।
इस वजह से वेंडर और ग्राहकों के बीच तनाव बढ़ रहा है। कई मामले पुलिस थाने तक पहुंच रहे हैं। वेंडरों का कहना है कि सप्लाई उनके हाथ में नहीं है लेकिन जवाब उन्हें ही देना पड़ रहा है।
5000 मेगावाट के औद्योगिक प्रोजेक्ट अटके
सबसे ज्यादा नुकसान कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल यानी C&I (Commercial and Industrial) सेक्टर को हुआ है। राजस्थान सोलर एसोसिएशन के अनुसार 2 हजार से 5 हजार मेगावाट तक के सोलर प्रोजेक्ट अभी रुके हुए हैं। कई उद्योग नए प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं कर पा रहे क्योंकि डीसीआर पैनल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं।
निवेशकों पर भी संकट
राइजिंग राजस्थान सम्मेलन में सोलर सेक्टर में करीब 28 लाख करोड़ रुपए के एमओयू (MOU – Memorandum of Understanding) हुए थे। इसी को देखते हुए कई निवेशकों ने नॉन-डीसीआर पैनल बनाने वाली एमएसएमई (MSME – Micro, Small and Medium Enterprises) इकाइयों में पैसा लगाया था।
अब कमीशनिंग पर रोक से इन इकाइयों का भविष्य खतरे में है। उद्योग के लोगों का कहना है कि नॉन-डीसीआर यूनिट करीब 50 करोड़ रुपए में लग जाती है, जबकि डीसीआर यूनिट के लिए 500 करोड़ चाहिए। यानी दस गुना ज्यादा निवेश।
उद्योग से जुड़े लोगों की मांग है कि जल्द समाधान नहीं निकला तो बड़ी संख्या में रोजगार भी खतरे में पड़ जाएंगे।
FAQ
- DCR सोलर पैनल क्या होते हैं और इन्हें अनिवार्य क्यों किया गया?
DCR यानी Domestic Content Requirement वाले पैनल वे होते हैं जिनमें भारत में बने सोलर सेल लगे हों। केंद्र सरकार ने देश में सोलर सेल उत्पादन बढ़ाने के लिए इन्हें अनिवार्य किया है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योग मजबूत होगा। - DCR पैनल की अनिवार्यता से आम उपभोक्ता पर क्या असर पड़ा?
DCR पैनल सामान्य पैनलों से दोगुने महंगे हैं। 3 किलोवाट का घरेलू सोलर सिस्टम लगाने में 35 से 40 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कई घरों पर स्ट्रक्चर तैयार होने के बावजूद पैनल न मिलने से इंस्टॉलेशन रुकी हुई है। - पीएम सूर्य घर योजना पर इसका क्या असर है?
इस योजना के तहत राजस्थान में 2200 से अधिक वेंडर काम कर रहे हैं। DCR पैनलों की कम उपलब्धता और ऊंची कीमत से हजारों लाभार्थियों का काम रुका है। वेंडर और ग्राहकों के बीच विवाद बढ़ रहे हैं और कई मामले पुलिस थाने तक पहुंच रहे हैं।
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