फर्जी कोर्ट ऑर्डर से बेची 3 हजार बीघा सरकारी जमीन, तहसीलदार और उप-पंजीयक समेत 3 सस्पेंड
News In Short
- बोड़ाना गांव में करीब 3 हजार बीघा सरकारी जमीन के फर्जी कोर्ट दस्तावेज बनाकर सोलर कंपनी को बेचा।
- नाचना तहसीलदार रतनलाल, नोख उप-तहसीलदार नाथूलाल मीणा और पटवारी भंवरलाल तत्काल प्रभाव से निलंबित।
- नोख थाने में दर्ज केस में 4 सरकारी कर्मचारियों के अलावा 11 दलाल और फर्जीवाड़े में शामिल किसान नामजद हैं।
- रिकॉर्ड में जमीन अभी भी सरकारी है; उपनिवेशन विभाग सिविल कोर्ट में वाद दायर कर सभी रजिस्ट्रियों को रद्द करवाएगा।
News In Detail
राजस्थान में भू-माफिया और भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र के गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सरकार से लेकर राजस्व महकमे तक हड़कंप मचा दिया है। जैसलमेर और फलोदी सीमा पर स्थित नोख उप-तहसील के बोड़ाना गांव में देश के सबसे बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की आड़ में 30 करोड़ रुपए का जमीन घोटाला किया गया।
फर्जी अदालती आदेश से रची गई साजिश
इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड वह नेक्सस है जिसने राजस्व न्यायालय का एक हूबहू फर्जी और जाली आदेश तैयार कर लिया। इस फर्जी आदेश के सहारे बोड़ाना गांव की करीब 3 हजार बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को खातेदारी (निजी) घोषित करा दिया गया। इसके बाद भू-माफियाओं ने पलक झपकते ही इस पूरी सरकारी जमीन का सौदा एक निजी सोलर कंपनी से 30 करोड़ रुपए में कर डाला और उसकी रजिस्ट्रियां भी करवा लीं।
तीन कड़ियों पर गिरी गाज, पर जैसलमेर के दागी बचे
खुलासे के बाद राजस्व मंडल राजस्थान (अजमेर) और उपनिवेशन आयुक्त एक्शन में आए। विभाग ने प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर तीन अधिकारियों को रतनलाल भवानी (उपनिवेशन तहसीलदार, नाचना नंबर-2), नाथूलाल मीणा (उप-पंजीयक एवं उप-तहसीलदार, नोख) और भंवरलाल (पटवारी, खेरूवाला पटवार मंडल) को तुरंत सस्पेंड कर दिया।
हालांकि, इस कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि एफआईआर में नामजद जैसलमेर जिले में तैनात कुछ अन्य रसूखदार और दागी कार्मिकों पर विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
बेनकाब हुआ नेक्सस
इस महाघोटाले को दबाने की हर स्तर पर कोशिश की जा रही थी, लेकिन नहीं दब पाया। घोटाले में सबसे पहले जाली अदालती आदेश से 3 हजार बीघा जमीन सोलर कंपनी को बेची गई। फिर रजिस्ट्रार ने बिना मुख्य लिंक डॉक्यूमेंट जांचे ही आंखें बंद कर रजिस्ट्री कर दी। इसके बाद सरकारी रिकॉर्ड बुक जारी होने से पहले ही बैक-डेट में जमीन का नामांतरण (म्यूटेशन) खोल दिया गया था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी तहसीलदार और पटवारी ने दफ्तर से गायब रहकर, अपने घर पर बैठकर इस पूरे काले कारनामे के कागजों की तस्दीक की थी।
पुलिस और अदालती कार्रवाई का इंतजार
वर्तमान में नोख थाना पुलिस ने राजस्थान उपनिवेशन विभाग से घोटाले से जुड़े मूल दस्तावेज मांगे हैं ताकि 11 दलालों व किसानों और 4 सरकारी कर्मचारियों समेत सभी 15 आरोपियों को जेल भेजा जा सके।
उपमहानिरीक्षक (पंजीयक व मुद्रांक) भागीरथराम चौधरी के अनुसार, रिकॉर्ड में जमीन आज भी सरकारी ही दर्ज है, इसलिए विभाग जल्द ही सिविल कोर्ट में वाद दायर कर इस फर्जीवाड़े के तहत हुई सभी रजिस्ट्रियों को पूरी तरह निरस्त करवाएगा।
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