राजस्थान का पर्यटन मॉडल बदला: विदेशी पर्यटकों के साथ घरेलू सैलानियों पर फोकस
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान का पर्यटन मॉडल अब किले-महलों से आगे बढ़ रहा है।
- घरेलू पर्यटक पर्यटन उद्योग का बड़ा आधार बन चुके हैं।
- वेडिंग, ग्रामीण, वाइल्डलाइफ और वेलनेस टूरिज्म पर जोर दिया जा रहा है।
- सीकर, जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ जैसे शहरों में पर्यटन का दायरा बढ़ा है।
- पर्यटन से होटल, टैक्सी, रेस्टोरेंट, गाइड और स्थानीय कारोबार जुड़े हैं।
जयपुर। राजस्थान का पर्यटन उद्योग अब केवल किले, महल और ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित नहीं रहना चाहता। प्रदेश में पर्यटन का दायरा बढ़ाने के लिए घरेलू पर्यटकों के साथ-साथ वेडिंग, ग्रामीण, वाइल्डलाइफ, वेलनेस, फिल्म और अनुभव आधारित पर्यटन पर ध्यान दिया जा रहा है।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे तनाव, महंगी हवाई यात्रा और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में बनी अनिश्चितता के बीच घरेलू पर्यटक राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले सैलानियों की संख्या बढ़ने के कारण पर्यटन उद्योग अब नए डेस्टिनेशन और नए पर्यटन सर्किट विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
जयपुर में आयोजित राजस्थान डोमेस्टिक ट्रैवल मार्ट के छठे संस्करण में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, होटल कारोबारियों, ट्रैवल एजेंट्स और सरकारी अधिकारियों के बीच चर्चा में भी घरेलू पर्यटन के बढ़ते महत्व पर जोर दिया गया।
विदेशी पर्यटकों के साथ घरेलू सैलानियों की संख्या में बढ़ोतरी
राजस्थान लंबे समय से विदेशी पर्यटकों के पसंदीदा राज्यों में शामिल रहा है। जयपुर के किले और महल, उदयपुर की झीलें, जोधपुर का मेहरानगढ़, जैसलमेर का रेगिस्तान और पुष्कर के धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल विदेशी सैलानियों को आकर्षित करते हैं।
हालांकि, संख्या के लिहाज से घरेलू पर्यटक राजस्थान के पर्यटन बाजार का बड़ा आधार बन चुके हैं। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में प्रदेश में करीब 17.90 करोड़ घरेलू पर्यटक और लगभग 17 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे थे।
वर्ष 2024 में घरेलू पर्यटकों की संख्या 23 करोड़ से अधिक बताई गई, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब 20.72 लाख रही। वर्ष 2025 में घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़कर लगभग 25.25 करोड़ और विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब 19.45 लाख रही।
वर्ष 2026 में जून तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में करीब 10.85 करोड़ घरेलू और 8.45 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। एक अन्य सरकारी अपडेट में जनवरी से जून के बीच कुल पर्यटकों की संख्या लगभग 10.92 करोड़ बताई गई है। अलग-अलग अपडेट में आंकड़ों का अंतर होने के कारण अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।
विदेशी पर्यटक राजस्थान के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
विदेशी पर्यटक राजस्थान के पर्यटन उद्योग में लंबे समय से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। आमतौर पर विदेशी सैलानी कई दिनों के टूर पैकेज के तहत प्रदेश का दौरा करते हैं। इस दौरान वे होटल, हेरिटेज प्रॉपर्टी, गाइड, कैब, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर खर्च करते हैं।
इससे पर्यटन से जुड़े कई कारोबारों को लाभ मिलता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार पर युद्ध, आर्थिक संकट, वीजा नियम, हवाई किराए और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों का असर पड़ सकता है।
इसी वजह से राजस्थान अब विदेशी पर्यटकों के साथ घरेलू बाजार को भी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
घरेलू पर्यटक बना पर्यटन उद्योग का बड़ा सहारा
फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म ऑफ राजस्थान से जुड़े खालिद खान के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद घरेलू पर्यटन ने उद्योग को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
घरेलू पर्यटक धार्मिक यात्रा, वीकेंड ट्रिप, पारिवारिक यात्रा, स्कूल-कॉलेज की छुट्टियों, शादियों, त्योहारों और कॉर्पोरेट कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग समय पर यात्रा करते हैं। इससे पर्यटन कारोबार को पूरे साल मांग मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा महंगी होने के कारण कई भारतीय पर्यटक अब देश के भीतर ही नए स्थानों की तलाश कर रहे हैं। राजस्थान की भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता घरेलू पर्यटन के लिए अवसर पैदा करती है।
अब केवल किले और महल देखना ही पर्यटन नहीं
राजस्थान का पारंपरिक पर्यटन मॉडल मुख्य रूप से ऐतिहासिक इमारतों, किलों, महलों और हवेलियों पर आधारित रहा है। अब इसमें कई नए अनुभव जोड़े जा रहे हैं।
पर्यटन उद्योग की ओर से वेडिंग टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, वाइल्डलाइफ, वेलनेस, फिल्म शूटिंग और एडवेंचर गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है।
इस बदलाव का उद्देश्य पर्यटकों को केवल पर्यटन स्थल दिखाना नहीं, बल्कि उन्हें स्थानीय संस्कृति, भोजन, लोक संगीत, हस्तशिल्प और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव देना है।
सीकर और चित्तौड़गढ़ में बढ़ा घरेलू पर्यटन
जनवरी से जून 2026 के दौरान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सीकर में करीब 1.56 करोड़ घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। जैसलमेर में यह संख्या लगभग 1.18 करोड़ और चित्तौड़गढ़ में करीब 1.33 करोड़ बताई गई।
इसी अवधि में जयपुर में लगभग 81.49 लाख घरेलू पर्यटकों के पहुंचने की जानकारी सामने आई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि घरेलू पर्यटन केवल जयपुर, उदयपुर और जोधपुर जैसे प्रमुख शहरों तक सीमित नहीं है। सीकर में धार्मिक पर्यटन, चित्तौड़गढ़ में ऐतिहासिक पर्यटन और जैसलमेर में रेगिस्तानी पर्यटन के कारण अलग-अलग तरह के सैलानी पहुंच रहे हैं।
इससे राजस्थान के पर्यटन मानचित्र में छोटे और मध्यम शहरों की भूमिका भी बढ़ रही है।
पर्यटन से जुड़े कई कारोबारों को मिलता है रोजगार
पर्यटन उद्योग का असर केवल होटल और रिसॉर्ट तक नहीं रहता। किसी पर्यटक के राजस्थान पहुंचने के बाद टैक्सी चालक, बस ऑपरेटर, होटल कर्मचारी, गाइड, रेस्टोरेंट संचालक, दुकानदार, हस्तशिल्पकार और स्थानीय कलाकारों तक कारोबार पहुंचता है।
पर्यटक स्थानीय बाजारों से कपड़े, हस्तशिल्प, हैंडलूम और जेम्स-ज्वेलरी खरीदते हैं। कई स्थानों पर लोक कलाकारों के कार्यक्रम भी पर्यटक अनुभव का हिस्सा बनते हैं।
पर्यटन विशेषज्ञ संजय कौशिक के अनुसार, पर्यटन को एक बड़े स्थानीय बिजनेस इकोसिस्टम के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे कई छोटे कारोबारी और सेवा क्षेत्र जुड़े होते हैं।
होटल कारोबार में भी बदलाव
घरेलू पर्यटकों की पसंद बदलने के साथ होटल और रिसॉर्ट भी अपने पैकेज में बदलाव कर रहे हैं। अब केवल कमरा और भोजन देने के बजाय स्थानीय भोजन, लोक संगीत, मनोरंजन, एडवेंचर गतिविधियां, वेलनेस और सांस्कृतिक अनुभवों को पैकेज में शामिल किया जा रहा है।
इसके अलावा सोलो ट्रैवल, खासकर महिला पर्यटकों की यात्राओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सुरक्षित और बेहतर अनुभव मिलने पर पर्यटक अपने परिचितों और सोशल मीडिया के माध्यम से किसी डेस्टिनेशन का प्रचार कर सकते हैं।
राजस्थान में पर्यटन के नए अवसर
राजस्थान के पर्यटन उद्योग के सामने अब घरेलू बाजार को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने की चुनौती है। इसके लिए नए पर्यटन स्थल विकसित करने, बेहतर कनेक्टिविटी, साफ-सफाई, सुरक्षा, स्थानीय गाइड और पर्यटक सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी होगा।
यदि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ा जाता है, तो इससे स्थानीय रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति, खानपान और लोक कला को भी व्यापक पहचान मिल सकती है।
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