मां-पिता बीमार हैं, पत्नी-बच्चों को संभालना है, 90% तबादला अर्जियों का यही कारण
समझें क्या है पूरा मामला
- तबादले की अंतिम तारीख 10 जुलाई, सवा लाख अर्जियां आईं।
- कुल आवेदकों में से 90% ने बीमार मां-बाप, पत्नी-बच्चे का दिया हवाला।
- सभी आवेदकों की सेट फॉर्मेट में अर्जियां, सिर्फ नाम और दस्तखत बदले।
- मंत्रियों ने कहा- नियमों के आधार पर ही होगा तबादला, भावनाओं से नहीं।
- 20 दिनों में विभिन्न विभागों से सवा लाख से अधिक आवेदन आए।
राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर छूट 10 जुलाई को खत्म होने वाली है। इस मौके का फायदा उठाने के लिए महज 20 दिन में विभिन्न विभागों के सवा लाख से अधिक कर्मचारी मनपसंद जगह पर तबादले की अर्जी दे चुके हैं।
जब आवेदनों की जांच की गई तो चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया। 90 फीसदी से अधिक कर्मचारियों ने या तो बीमार माता-पिता की सेवा का हवाला दिया या पत्नी-बच्चों को संभालने की जरूरत बताई।
इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि ज्यादातर अर्जियां एक ही फॉर्मेट में हैं, बस नाम और दस्तखत बदले हुए हैं।
सवा लाख अर्जियां, एक जैसा फॉर्मेट
जांच में सामने आया कि अलग-अलग विभागों से आई अर्जियों का ढांचा एक जैसा है। सभी में भाषा, शैली और आवेदन प्रारूप समान है। विधायकों से लेकर भाजपा (Bharatiya Janata Party) के टिकट पर चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों के सिफारिशी पत्रों में भी यही पैटर्न दिखा।
इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं इन आवेदनों को एक ही जगह से तैयार कराया जा रहा है।
किस विभाग से कितनी अर्जियां?
स्कूल शिक्षा विभाग (ग्रेड-3 को छोड़कर) से करीब 39,000 कर्मचारियों ने तबादला मांगा है। माध्यमिक एवं कॉलेज शिक्षा से 12,000, पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास से 12,000, राजस्व विभाग से 7,000, पुलिस विभाग से 10,000 और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से 8,000 कर्मचारियों ने आवेदन किए हैं।
वन, कृषि, पशुपालन, पीडब्लूडी (Public Works Department), सिंचाई और स्वायत्तशासी संस्थाओं से मिलाकर करीब 55,000 अर्जियां आई हैं।
मंत्रियों और सचिवालय में रोज लगती है कतार
तबादले के लिए कर्मचारी मंत्रियों के घर, भाजपा नेताओं के दरवाजे और सचिवालय के बाहर रोजाना बड़ी संख्या में कतार लगाते हैं। सिफारिश पत्र का जुगाड़ करने में भी अधिकांश कर्मचारी जुटे हुए हैं।
शिक्षा मंत्री बोले, नियम देखेंगे
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सभी शिक्षक माता-पिता की सेवा का हवाला देकर मनपसंद जगह पर तबादला मांगते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भावनाओं के बजाय नियमों को देखना पड़ेगा। माता-पिता की सेवा जरूरी है, लेकिन जहां सभी स्वस्थ हों वहां यह तर्क नहीं चलेगा।
दो और मंत्री भी हैरान
डेयरी पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि तबादला आवेदनों में सभी की भाषा और प्रारूप एक जैसा है, माता-पिता और बच्चों का जिक्र हर जगह है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने भी माना कि अर्जियों और सिफारिशों का प्रारूप एक जैसा है और लगभग सभी में एक ही हवाला रहता है।
FAQ
- तबादले के लिए सबसे ज्यादा अर्जियां किस विभाग से आई हैं?
स्कूल शिक्षा विभाग से सबसे ज्यादा करीब 39,000 आवेदन आए हैं। वन, कृषि, पशुपालन, PWD और सिंचाई जैसे विभागों से मिलाकर 55,000 अर्जियां आई हैं। पुलिस से 10,000 और चिकित्सा से 8,000 आवेदन हैं। - क्या माता-पिता की बीमारी के आधार पर तबादला मिल सकता है?
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया है कि भावनाओं के बजाय नियमों को देखा जाएगा। माता-पिता की सेवा का हवाला देने से तबादला नहीं होगा जब तक नियमों के तहत मामला नहीं बनता।
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