राजस्थान में UCC का ड्राफ्ट तैयार, कैबिनेट बैठक में हो सकता बड़ा फैसला
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में समान नागरिक संहिता यानी UCC विधेयक का ड्राफ्ट तैयार हो चुका।
- विधि विभाग ने इसका कानूनी परीक्षण पूरा कर लिया।
- अब यह ड्राफ्ट मंजूरी के लिए कानून मंत्री जोगाराम पटेल के पास भेजा गया।
- मंत्री की मंजूरी के बाद यह विधेयक राज्य कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
- सूत्रों के अनुसार गुरुवार को कैबिनेट बैठक में यूसीसी सबसे बड़ा एजेंडा हो सकता।
जयपुर. राजस्थान UCC विधेयक को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट अब कानून मंत्री तक पहुंच गया। यह मंत्री जोगाराम पटेल के पास भेजा गया। विधि विभाग ने बुधवार को कानूनी परीक्षण पूरा कर लिया।
इसके बाद फाइल मंजूरी के लिए मंत्री को भेजी गई। मंत्री की मंजूरी मिलते ही विधेयक कैबिनेट में जाएगा। सरकार इसे जल्द अंतिम रूप देना चाहती है। इस पर पिछले कई महीनों से काम चल रहा था। गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग में इसका अनुमोदन किया जा सकता।
विधि मंत्री तक पहुंचा UCC का ड्राफ्ट
बीते सप्ताह एक बड़ी समिति ने समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट सौंपा था। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई ने की। ड्राफ्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपा गया था।
इसके बाद गृह विभाग ने इसे राज्य के विधि विभाग को भेजा। यह काम सोमवार को हुआ। विधि विभाग में सोमवार देर रात तक जांच चलती रही। मंगलवार को भी परीक्षण जारी रहा। बुधवार को यह प्रक्रिया पूरी हो गई। कानून मंत्री की मंजूरी के बाद इसे गुरुवार को कैबिनेट में अनुमोदन के लिए रखा जा सकता।
200 पेज का होगा UCC विधेयक
राजस्थान UCC विधेयक का ड्राफ्ट करीब 200 पेज का है। इसे तैयार करने में कई राज्यों के कानूनों का अध्ययन हुआ। खासतौर पर उन राज्यों के, जहां यूसीसी पहले ही लागू हो चुकी। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को भी ध्यान में रखा गया।
साथ ही आम जनता से मिले सुझाव भी शामिल किए गए। समिति ने इस पर लंबे समय तक काम किया। मकसद था एक कानूनी रूप से मजबूत मसौदा तैयार करना। दस्तावेज बड़ा होने के कारण विधिक परीक्षण में भी समय लगा।
राजस्थान कैबिनेट की आज मीटिंग
राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक गुरुवार को है। यह बैठक मुख्यमंत्री कार्यालय के मंत्रिमंडल कक्ष में होगी। अध्यक्षता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा करेंगे। इसमें दोनों उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा मौजूद रहेंगे। मंत्रिपरिषद के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार यूसीसी विधेयक सबसे बड़ा एजेंडा हो सकता। कैबिनेट से मंजूरी के बाद ही अगला कदम तय होगा। इसके बाद विधेयक विधानसभा में पेश होने की राह पर बढ़ेगा।
उत्तराखंड-गुजरात से UCC के ड्राफ्ट की तुलना
देश में उत्तराखंड पहला राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता का कानून लागू हुआ है। गुजरात में विधेयक विधानसभा से पारित हो चुक, लेकिन वहां अभी यह कानून नहीं बना। राजस्थान की समिति ने दोनों राज्यों के प्रावधान बारीकी से पढ़े हैं। इसके साथ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को भी आधार बनाया गया। इस तुलनात्मक अध्ययन से एक फायदा हुआ। समिति को यह समझने में मदद मिली कि कहां कानूनी चुनौतियां आ सकती हैं। इससे राजस्थान का ड्राफ्ट पहले से ज्यादा मजबूत माना जा रहा।
आदिवासियों को UCC के दायरे से बाहर रखा जा सकता
सूत्रों के मुताबिक एक अहम फैसला भी लिया गया है। संवैधानिक कारणों से आदिवासी समुदाय को UCC विधेयक के दायरे से बाहर रखा जा सकता। यह फैसला आदिवासियों को मिले विशेष संरक्षण को ध्यान में रखकर लिया जा सकता। इससे जनजातीय समुदाय की परंपराओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची में आदिवासी क्षेत्रों को खास दर्जा मिला। इसी वजह से यह छूट दी जा सकती।
FAQ
- राजस्थान UCC विधेयक अभी किस स्टेज पर है?
UCC के ड्राफ्ट का कानूनी परीक्षण पूरा हो चुका। अब कानून मंत्री जोगाराम पटेल की मंजूरी के बाद कैबिनेट में रखा जाएगा। - राजस्थान UCC विधेयक से आदिवासी समुदाय पर क्या असर पड़ेगा?
संवैधानिक कारणों से आदिवासी समुदाय को इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा जा सकता। यह छूट संविधान के विशेष प्रावधानों के आधार पर दी जा सकती। - भारत में UCC किन राज्यों में लागू है या प्रक्रिया में है?
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून पहले से लागू है। गुजरात में विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है, लेकिन अभी कानून नहीं बना। राजस्थान अब इस दिशा में आगे बढ़ने वाला अगला राज्य हो सकता।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
UCC यानी Uniform Civil Code (यूसीसी-समान नागरिक संहिता), यह एक कानूनी व्यवस्था है। यह सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम लागू करती। इसका दायरा विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे मामलों तक फैला।
इसमें धर्म के आधार पर अलग-अलग कानूनों की जगह समान नियम लागू होते हैं। महिला और पुरुष के अधिकारों में समानता का प्रावधान भी शामिल है। विवाहों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है। बहुविवाह जैसे प्रावधानों पर भी रोक लग सकती।
UCC से क्या बदलेगा?
यूनिफॉर्म सिविल कोड से अलग-अलग समुदायों के पर्सनल लॉ की जगह एक जैसी कानूनी प्रक्रिया लागू होगी। सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक के नियम एक समान होंगे। महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में बराबर अधिकार मिलने की उम्मीद है।
हालांकि इसका यह मतलब नहीं कि धार्मिक रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे। मकसद सिर्फ नागरिक अधिकारों से जुड़े कानूनी नियमों को एक समान बनाना है। धार्मिक परंपराएं पहले की तरह जारी रह सकती हैं। अब सबकी नजर मंत्री की मंजूरी और आगामी कैबिनेट बैठक पर टिकी है।
FAQ
- राजस्थान UCC विधेयक अभी किस स्टेज पर है?
UCC के ड्राफ्ट का कानूनी परीक्षण पूरा हो चुका। अब कानून मंत्री जोगाराम पटेल की मंजूरी के बाद कैबिनेट में रखा जाएगा। - राजस्थान UCC विधेयक से आदिवासी समुदाय पर क्या असर पड़ेगा?
संवैधानिक कारणों से आदिवासी समुदाय को इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया। यह छूट संविधान के विशेष प्रावधानों के आधार पर दी गई। - भारत में UCC किन राज्यों में लागू है या प्रक्रिया में है?
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून पहले से लागू है। गुजरात में विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है, लेकिन अभी कानून नहीं बना। राजस्थान अब इस दिशा में आगे बढ़ने वाला अगला राज्य हो सकता।
यह खबरें भी पढ़ें...
राजस्थान कैबिनेट की बैठक आज, OBC रिपोर्ट, निकाय चुनाव और UCC पर होगी चर्चा
राजस्थान कैबिनेट का फैसला, वन स्टेट-वन इलेक्शन के तहत पंचायत और नगरीय चुनाव
राजस्थान सरकार 11 फरवरी को पेश करेेगी बजट, मंत्री जोगाराम पटेल दी जानकरी
राजस्थान सरकार ने 7 हजार को दी सरकारी नौकरी, 70% को गृह जिले में पहली पोस्टिंग