महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी, आधी आबादी का सिमट रहा प्रतिनिधित्व
ऐसे समझें पूरा मामला
- राजस्थान में टिकट वितरण में महिलाओं की हिस्सेदारी महज 10% के आसपास सिमटी।
- 33% महिला आरक्षण के शोर के बीच भाजपा और कांग्रेस ने नहीं दिखाई उदारता।
- राजस्थान विधानसभा में 15% का आंकड़ा भी नहीं छू सकीं महिलाएं,
- 2013 में 28 के मुकाबले 2023 में घटकर रह गईं सिर्फ 20 महिला विधायक।
- संसद में केवल 14% महिला प्रतिनिधित्व, वैश्विक रैंकिंग में भारत 151वें स्थान पर।
राजस्थान की राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट राजनीतिक दलों के दावों की पोल खोलती है। एक ओर सितंबर 2023 में संसद से महिला आरक्षण विधेयक पास करके ऐतिहासिक कदम उठाने का दावा किया गया। वहीं प्रदेश में यह दावा दोनों ही प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के टिकट वितरण में हवा-हवाई साबित हुआ है।
चुनावी में महिलाओं की हिस्सेदारी 10% के आसपास
प्रदेश में महिलाओं की आबादी लगभग 49% है। मतदान के मामले में वे पुरुषों से आगे हैं। उनका 2023 के विधानसभा चुनाव में मतदान 74.72% रहा, जो पुरुषों के 74.53% से अधिक था। इसके बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में वे हाशिए पर हैं।
विधानसभा चुनाव 2023 में कुल 1,875 उम्मीदवारों ने भाग्य आजमाया। इसमें से केवल 9.76 प्रतिशत ही महिलाएं थीं।
लोकसभा चुनाव 2024 में प्रदेश की 25 सीटों में से भाजपा और कांग्रेस दोनों ने मिलकर महज 8 महिलाओं को ही टिकट दिया।
यह रही भाजपा और कांग्रेस की स्थिति
महिला सशक्तिकरण का नारा देने वाले दोनों ही प्रमुख दल टिकट देने के मामले में 33% के लक्ष्य से कोसों दूर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
विधानसभा चुनाव 2023: भाजपा ने कुल 200 सीटों में से केवल 20 महिलाओं (10%) को उम्मीदवार बनाया था। इनमें से 9 चुनाव जीतने में सफल रहीं।
लोकसभा 2024: प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने सिर्फ 5 महिलाओं को टिकट दिया। इनमें इंदु देवी जाटव, प्रियंका बालन मेघवाल, मंजू शर्मा, ज्योति मिर्धा, महिमा कुमारी शामिल थीं।
कांग्रेस (Congress)
विधानसभा 2023: कांग्रेस ने 199 सीटों पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस महिलाओं को उम्मीदवार बनाने के मामले में भाजपा से थोड़ा बेहतर तो रही, लेकिन यह भी नाकाफी था। कांग्रेस ने 28 महिलाओं (14%) को चुनावी मैदान में उतारा। इनमें से भी केवल 9 ही जीत दर्ज कर पाईं।
लोकसभा 2024: कांग्रेस ने 25 सीटों में से महज 3 महिलाओं पर भरोसा जताया। इनमें संजना जाटव, संगीता बेनीवाल और उर्मिला जैन भाया रहीं।
आधी आबादी, सिमटता प्रतिनिधित्व
राजस्थान विधानसभा का इतिहास गवाह है कि महिलाएं कभी भी सम्मानजनक आंकड़े तक नहीं पहुंच पाईं। 1952 के पहले चुनाव में जहां एक भी महिला विधायक नहीं थी।
इस चुनाव के तुरंत बाद नवंबर 1953 में हुए बांसवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी की यशोदा देवी निर्वाचित हुई थीं।
इसके बाद जून 1954 के उपचुनाव में कमला बेनीवाल दूसरी महिला विधायक बनी थीं। 2008 और 2013 में सबसे अधिक 28 महिलाएं विधानसभा पहुंची थीं।
2013 में 28, 2018 में 24 और 2023 में 20 महिला विधायक निर्वाचित हुईं। वर्ष 2023 के चुनाव में महिला विधायकों की संख्या घटकर 20 रह गई है, जो कि 2018 (24 महिलाएं) के मुकाबले भी कम है।
राजस्थान विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कभी भी 15% के आंकड़े को पार नहीं कर पाया है।
संसद में भारत की स्थिति
यह समस्या सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी यही ट्रेंड दिखता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में देश भर में कुल 9.6% महिला उम्मीदवार ही मैदान में थीं और 152 सीटें ऐसी थीं जहां किसी भी दल ने महिला प्रत्याशी नहीं उतारा।
भारतीय आबादी में 49% महिलाएं होने के बावजूद वर्तमान लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व केवल 14% के आसपास है। वैश्विक रैंकिंग में इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) के अनुसार, संसदों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में भारत दुनिया के 185 देशों में 151वें स्थान पर है।
ये खबर भी पढे़:-
कोटा-बीकानेर के बाद जोधपुर में सिजेरियन के बाद 8 प्रसूताएं बीमार, 2 आईसीयू में
जंगल के कानून से परे सुल्तान रच रहा रिश्तों की कहानी, जानिए टाइगर का बदला रूप
संविधान और कोर्ट आदेश की अवहेलना पर बर्खास्त हो भजनलाल सरकार, गहलोत ने की मांग
गहलोत पर BJP का हमला, 5 साल में क्यों नहीं सुलझाया पांचना बांध विवाद