जंगल के कानून से परे सुल्तान रच रहा रिश्तों की कहानी, जानिए टाइगर का बदला रूप

Ashish Bhardwaj | Jun 22, 2026, 15:40 IST
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टाइगर सुल्तान
Photograph: (the sootr)

राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ सुल्तान का व्यवहार बदला-बदला दिख रहा है। वह अपने स्वभाव के विपरीत परिवार के रखवाले के रूप में दिख रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सरिस्का में नर बाघ एसटी-18 “सुल्तान” अपने परिवार की सुरक्षा में सक्रिय दिखा।
  • बाघिन एसटी-19 और चार शावकों के साथ 100 मीटर के दायरे में छह बाघ दिखे।
  • आमतौर पर अकेला रहने वाला नर बाघ इस बार रक्षक की भूमिका में नजर आया।
  • विशेषज्ञों के अनुसार सुल्तान पिछले दो महीनों से परिवार की निगरानी कर रहा है।
  • अलवर बफर क्षेत्र अब बाघों की लगातार साइटिंग के चलते नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट बन गया है
सुनील जैन@अलवर

आमतौर पर बाघ को अकेले रहने वाले, आक्रामक और अपनी सरहद की रक्षा करने वाले शिकारी के रूप में जाना जाता है। लेकिन, राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में जंगल के कानून से परे रिश्तों की एक अनोखी दास्तान लिखी जा रही है।

यहां के सबसे चर्चित नर बाघ एसटी-18 को पर्यटक सुल्तान के नाम से जानते हैं। इन दिनों वह अपने गुस्सैल स्वभाव के विपरीत संवेदनशील पिता की भूमिका में नजर आ रहा है। सुल्तान अपने परिवार बाघिन एसटी-19 और उनके चार नन्हे शावकों की सुरक्षा के लिए साए की तरह उनके आस-पास मंडरा रहा है।

​महज 100 मीटर के दायरे में छह बाघ

हाल ही में सरिस्का के गंगोड़ी क्षेत्र में पर्यटकों को दुर्लभ नजारा देखने को मिला। वन्यजीव प्रेमी चिन्मय के अनुसार पर्यटक जब जंगल सफारी पर थे तो महज 100 मीटर के छोटे से दायरे में एक साथ छह बाघों की मौजूदगी देखकर सबकी सांसें थम गईं।

​सफारी के दौरान सबसे पहले एक प्राकृतिक नाले में सुल्तान (एसटी-18) आराम फरमाता हुआ दिखाई दिया। पर्यटक अभी इस राजा की झलक देखकर रोमांचित हो ही रहे थे कि उससे कुछ ही दूरी पर बाघिन एसटी-19 अपने चार नन्हे शावकों के साथ झाड़ियों से बाहर आ गई।

चिन्मय कहते हैं कि एक ही फ्रेम में पिता, मां और चार खेलते हुए शावकों को देखना किसी चमत्कार से कम नहीं था। इस अद्भुत दृश्य ने वहां मौजूद पर्यटकों को न सिर्फ रोमांचित किया, बल्कि भावुक भी कर दिया।

​साए की तरह रख रहा है नजर

​वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सुल्तान का यह व्यवहार महज कोई इत्तेफाक नहीं है। पिछले दो महीनों से सुल्तान लगातार अलवर बफर क्षेत्र में सक्रिय है। वह लगातार बाघिन एसटी-19 और शावकों के मूवमेंट्स को ट्रैक कर रहा है।

​बाघों के संसार में अक्सर देखा जाता है कि नर बाघ शावकों के जन्म के बाद उनसे दूरी बना लेते हैं या कई बार वे शावकों के लिए खतरा भी बन जाते हैं। लेकिन सुल्तान यहां एक रक्षक की भूमिका में है।

वह अपने कुनबे से निश्चित दूरी भी बनाए रखता है, लेकिन साथ ही वह इतना करीब रहता है कि जंगल के किसी भी खतरे से अपने बच्चों को बचा सके। वन अधिकारियों के मुताबिक सुल्तान की यह मौन जिम्मेदारी यह साबित करती है कि जंगल में भी पारिवारिक संवेदनाएं और रिश्तों की अहमियत होती है।

​गुस्सैल मिजाज, लेकिन परिवार के लिए समर्पित

सुल्तान को सरिस्का के सबसे सतर्क और कम दिखाई देने वाले बाघों में गिना जाता है। स्वभाव से बेहद गुस्सैल होने के कारण वह आमतौर पर पर्यटकों की गाड़ियों को देखकर जंगल की गहरी झाड़ियों में ओझल हो जाता है।

लेकिन अपने शावकों के जन्म के बाद से उसके व्यवहार में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। उसका बफर क्षेत्र में लगातार बने रहना और शावकों के आस-पास पहरेदारी करना इस बात का सबूत है कि उसके लिए अपने बच्चों की सुरक्षा अपनी प्राइवेसी से कहीं ज्यादा बढ़कर है।

नया हॉटस्पॉट बना अलवर बफर

वन अधिकारियों का कहना है कि एक दौर था जब देश-दुनिया के पर्यटक बाघों की अच्छी साइटिंग (देखने) के लिए रणथंभौर या मध्य प्रदेश के जंगलों का रुख करते थे। लेकिन अब सरिस्का का यह अलवर बफर क्षेत्र अपनी एक नई और बेहद मजबूत पहचान बना चुका है।

यहां लगातार हो रही बाघों की साइटिंग और इस अनोखे सुल्तान परिवार की कहानियों ने पर्यटकों को अपनी ओर खींचा है। ​सरिस्का आए कई पर्यटकों का कहना है कि अब उन्हें बाघ देखने के लिए कहीं और जाने की जरूरत महसूस नहीं होती।

एक वन्यजीव विशेषज्ञ के अनुसार सुल्तान की यह कहानी यह बयां करती है कि जंगल का राजा सिर्फ ताकत और खौफ का प्रतीक नहीं होता, बल्कि वह अपने परिवार का सबसे बड़ा ढाल भी होता है।

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