पंचायतीराज में 50%, निकाय में 33%, जानें राजस्थान में महिला आरक्षण का फर्क क्यों
समझें क्या है पूरा मामला
- निकाय में 33%, पंचायतराज में 50%, एक ही राज्य में दो अलग महिला आरक्षण।
- 2008 में 50% किया था, 2010 में कोर्ट ने रोका, आज भी असर बरकरार।
- संविधान संशोधन के बिना 50% नहीं, पांच राज्य कर चुके हैं लेकिन राजस्थान नहीं।
- लॉटरी की तैयारी शुरू, स्वायत्त शासन 33% पर, पंचायतीराज 50% पर।
- एससी, एसटी, ओबीसी महिलाओं को भी उसी हिसाब से आरक्षण मिलेगा।
राजस्थान में आगामी शहरी निकाय और पंचायत चुनाव में महिलाओं का आरक्षण अलग-अलग रहेगा। शहरी निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी और पंचायतीराज संस्थाओं में 50 फीसदी आरक्षण मिलेगा।
यह अंतर 2010 के एक हाई कोर्ट के फैसले के कारण है जिसमें शहरी निकायों में 50 फीसदी महिला आरक्षण को रद्द कर दिया गया था। स्वायत्त शासन विभाग ने 33 फीसदी और पंचायतीराज विभाग ने 50 फीसदी आरक्षण के आधार पर लॉटरी की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
2008 में 50% किया था, 2010 में कोर्ट ने रोका
साल 2008 में राजस्थान सरकार ने पंचायतीराज और नगरपालिका एक्ट में संशोधन कर महिलाओं का आरक्षण 33 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने का प्रावधान किया था। लेकिन निकाय चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण को हाई कोर्ट में 2010 में चुनौती दी गई।
हाई कोर्ट ने 19 मई 2010 को सरकार के इस फैसले को निरस्त कर दिया। इसके बाद शहरी निकायों के चुनाव में महिलाओं का आरक्षण 33 फीसदी ही रहा। हालांकि पंचायतीराज एक्ट में संशोधन बना रहा, इसलिए पंचायतीराज चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण पर चुनाव होते रहे।
संशोधन के बिना नहीं होगा 50%
कानूनी जानकारों के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 243-डी में संशोधन किए बिना शहरी निकाय चुनाव में 50 फीसदी महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकता।
बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश और केरल में शहरी निकायों में 50 फीसदी महिला आरक्षण पहले से लागू है, लेकिन राजस्थान में यह अभी भी 33 फीसदी पर ही है।
एससी, एसटी, ओबीसी महिलाओं का आरक्षण भी इसी हिसाब से
शहरी निकाय और पंचायतीराज चुनाव में एससी (Scheduled Caste), एसटी (Scheduled Tribe) और ओबीसी (Other Backward Class) वर्गों की महिलाओं को भी उसी प्रतिशत के अनुसार आरक्षण दिया जाएगा। यानी निकाय चुनाव में इन वर्गों की महिलाओं का आरक्षण 33 फीसदी के हिसाब से और पंचायतीराज में 50 फीसदी के हिसाब से तय होगा।
दोनों विभाग राज्य निर्वाचन आयोग को देंगे ब्यौरा
स्वायत्त शासन विभाग 33 फीसदी महिला आरक्षण के आधार पर लॉटरी तय करेगा जबकि पंचायतीराज विभाग 50 फीसदी के आधार पर। दोनों विभाग संबंधित संस्थाओं का आरक्षण तय कर राज्य निर्वाचन आयोग को ब्यौरा देंगे, इसके बाद चुनाव की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
FAQ
- राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव में महिलाओं को कितना आरक्षण मिलेगा?
शहरी निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा। 2010 में हाईकोर्ट ने 50 फीसदी आरक्षण के सरकारी फैसले को रद्द कर दिया था जिसके कारण निकायों में अभी भी 33 फीसदी ही लागू है। - राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव में महिला आरक्षण अलग क्यों है?
पंचायतीराज एक्ट में 2008 में किया गया संशोधन बना रहा और उसे हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी गई, इसलिए पंचायतीराज चुनाव में 50 फीसदी महिला आरक्षण जारी रहा। - शहरी निकायों में 50 फीसदी महिला आरक्षण के लिए क्या करना होगा?
संविधान के अनुच्छेद 243-डी में संशोधन किए बिना शहरी निकायों में 50 फीसदी महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकता। बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश और केरल में यह पहले से लागू है।
ये भी पढ़ें:-
जयपुर सबसे महंगा, पाली किफ़ायती: राजस्थान निकाय चुनाव का बड़ा बजट
राजस्थान निकाय चुनाव: पार्षद प्रत्याशी 3.5 लाख तक खर्च करेंगे, गाड़ियों पर भी नियम
राजस्थान कैबिनेट की बैठक आज, OBC रिपोर्ट, निकाय चुनाव और UCC पर होगी चर्चा
नगर निकाय चुनाव में पार्षदों से चुने जाएंगे चेयरमैन और मेयर, सरकार ने साफ किया