कुवैत से वतन लौटा राजस्थान का लाल, केंद्रीय मंत्री की पहल और दूतावास के प्रयासों से मिली नई जिंदगी
News In Short
- रोजगार की तलाश में कुवैत गए शेरगढ़ निवासी लखसिंह एक साल बाद सुरक्षित घर लौटे।
- कुवैत में लखसिंह का पासपोर्ट जब्त कर बंधक बनाया और शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना दी।
- पीड़ित के परिचित नकतसिंह की सूचना पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया हस्तक्षेप।
- भारतीय दूतावास के कूटनीतिक प्रयासों से लखसिंह को वतन वापसी की अनुमति मिली।
- लखसिंह की वापसी पर परिजनों ने सरकार का आभार जताया और गांव में खुशियां मनाईं।
News In Detail
Jodhpur: राजस्थान के जोधपुर जिले के शेरगढ़ क्षेत्र में स्थित रायसर गांव के लिए शनिवार का दिन किसी उत्सव से कम नहीं था। करीब एक साल तक कुवैत में बंधक जैसी स्थितियों और अमानवीय प्रताड़ना का सामना करने के बाद गांव का युवक लखसिंह सुरक्षित अपने घर लौट आया था। लखसिंह को देखते ही परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और पूरे गांव में जश्न का माहौल हो गया।
रोजगार के नाम पर मिला धोखा
लखसिंह करीब एक वर्ष पहले अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेहतर भविष्य का सपना लेकर कुवैत गया था। उसे उम्मीद थी कि वहां मेहनत कर वह अपने माता-पिता को एक अच्छी जिंदगी दे पाएगा, लेकिन वहां कदम रखते ही उसके सपने बुरे सपने में बदल गए।
लखसिंह ने बताया कि जिस शेख के पास वह काम कर रहा था, वह उसके साथ जानवरों जैसा व्यवहार करता था। छोटी-छोटी बातों पर बेरहमी से मारपीट की जाती थी और उसे पर्याप्त खाना तक नहीं दिया जाता था। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब नियोक्ता ने लखसिंह का पासपोर्ट अपने पास रख लिया। बिना पासपोर्ट और वैध दस्तावेजों के वह उस घर से बाहर निकलने या भारत वापस आने की स्थिति में नहीं था।
केंद्रीय मंत्री की सक्रियता से बनी बात
लखसिंह ने अपने परिचित नकतसिंह राठौड़ गड़ा तक बड़ी मुश्किल से बात पहुंचाई। नकतसिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से संपर्क किया। मंत्री शेखावत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत विदेश मंत्रालय और कुवैत स्थित भारतीय दूतावास को निर्देश जारी किए।
भारतीय दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बैठाकर लखसिंह का पता लगाया और उसे शेख के कब्जे से मुक्त कराया। पासपोर्ट वापस दिलाने और जरूरी एग्जिट पेपर तैयार करने में दूतावास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके बाद उसकी स्वदेश वापसी का रास्ता साफ हुआ।
गांव में जश्न और सरकार का आभार
शनिवार को जब लखसिंह रायसर गांव की सीमा में दाखिल हुआ, तो ग्रामीणों ने उसका फूलों और मालाओं से स्वागत किया। लखसिंह ने भावुक होते हुए कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं जिंदा वापस लौट पाऊंगा, यह मेरा दूसरा जन्म है। ग्रामीणों ने इस मानवीय कार्य के लिए केंद्र सरकार, भारतीय दूतावास और विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री शेखावत का आभार जताया।
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