जोधपुर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बाल विवाह रद्द होने के बाद भी पत्नी को मिलेगा भरण-पोषण
Jageshwar prasad | May 03, 2026, 12:37 IST
Photograph: (the sootr)
जोधपुर कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि बाल विवाह रद्द होने के बाद भी पत्नी भरण-पोषण की हकदार है। अदालत ने नीट की तैयारी कर रहे पति की बेरोजगारी की दलील को उसके बैंक खातों में हुए भारी लेनदेन के आधार पर खारिज कर दिया।
News In Short
- जोधपुर पारिवारिक न्यायालय के अनुसार, बाल विवाह रद्द होने के बाद भी पत्नी को मिलेगा गुजारा भत्ता।
- कोर्ट ने 7 साल से नीट की तैयारी कर रहे छात्र की बेरोजगारी की दलील को बैंक स्टेटमेंट देखकर ठुकराया।
- पति के बैंक खाते में मात्र दो महीने में 88 हजार रुपए जमा होने से उसकी वित्तीय संपन्नता सिद्ध हुई।
- अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की नजीर का हवाला देते हुए पत्नी के पक्ष में 8,000 रुपए प्रतिमाह का आदेश दिया।
- पीड़िता ने ससुराल पक्ष के पास पत्थर की खान और 95 बीघा जमीन होने का साक्ष्य पेश किया था।
News In Detail
आटा-साटा प्रथा के तहत विवाह और दहेज प्रताड़ना
पति का तर्क
बैंक खातों और सुप्रीम कोर्ट की नजीर ने पलटा फैसला
बैंक स्टेटमेंट का खुलासा: कोर्ट ने पाया कि पति के बैंक खातों में लाखों रुपए का लेनदेन हुआ है। मात्र 65 दिनों में करीब 88 हजार रुपए जमा हुए थे। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि कोई भी विद्यार्थी लगातार 7 वर्षों तक केवल नीट की तैयारी नहीं करता; बैंक स्टेटमेंट उसकी अच्छी वित्तीय स्थिति का प्रमाण है।
कानूनी नजीर: अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सुखदेव सिंह बनाम सुखवीर कौर मामले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि भले ही विवाह निरस्त हो गया हो, लेकिन यदि पक्षकार पति-पत्नी के रूप में साथ रहे हैं, तो पत्नी भरण-पोषण पाने की अधिकारिणी है।
न्यायालय का आदेश
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