पापा, जीना बहुत मुश्किल हो गया, राजस्थान के रहने वाले जज ने दिल्ली में की सुसाइड
News In Short
- राजस्थान के रहने वाले एक युवा जज ने दिल्ली में की सुसाइड।
- 30 साल के जज अपने दिल्ली स्थित घर में मृत पाए गए।
- फिलहाल, जज की मौत की वजह पारिवारिक कलह सामने आई।
- पिता प्रेमप्रकाश ने अपनी बहू पर लगाए गंभीर आरोप।
- जज की पत्नी भी दिल्ली में न्यायिक सेवा की अधिकारी है।
News In Detail
सुनील जैन @ अलवर
देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके ग्रीन पार्क से एक दुखद मामला सामने आया है, जहां राजस्थान में अलवर के रहने वाले 30 वर्षीय युवा जज ने कथित तौर पर सुसाइड कर ली है। मृतक की पहचान अमन कुमार शर्मा के रूप में हुई है। वह दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) में सचिव के पद पर तैनात थे।
क्या है घटना का पूरा विवरण
पुलिस के अनुसार शुक्रवार रात दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में स्थित अमन कुमार शर्मा के आवास पर उनका शव मिला। सूचना मिलने के बाद डिफेंस कॉलोनी में रहने वाले उनके बहनोई राजेश कुमार ने तुरंत सफदरजंग थाने को इस मामले की जानकारी दी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने अमन को बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती पुलिस जांच इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को अमन के पिता शव को लेकर अपने पैतृक निवास अलवर के लिए रवाना हो गए।
पिता का आरोप: जीना मुश्किल हो गया था
इस दुखद घटना के पीछे पारिवारिक विवाद और मानसिक प्रताड़ना की बात सामने आ रही है। जज अमन कुमार शर्मा के पिता एडवोकेट प्रेमप्रकाश शर्मा ने अपनी बहू (अमन की पत्नी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अमन काफी समय से वैवाहिक कलह के कारण अत्यधिक मानसिक तनाव में थे।
अमन ने सुसाइड से पहले अपने पिता को फोन किया था। अपने पिता को बताया था कि उनके लिए अब जीना मुश्किल हो गया है। पिता का दावा है कि पिछले दो महीनों से अमन को लगातार परेशान किया जा रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि घर में उनकी पत्नी का पूरा नियंत्रण रहता था। हर बात उन्हीं की मानी जाती थी। मृतक की पत्नी भी न्यायिक अधिकारी हैं, जबकि उनकी बहन जम्मू में तैनात एक आईएएस (IAS) अधिकारी हैं।
पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रही है। हालांकि अभी तक किसी बाहरी साजिश या फाउल प्ले के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन सुसाइड के कारणों की पुष्टि के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।
पुलिस ने अमन कुमार शर्मा का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है। कॉल रिकॉर्ड्स और संदेशों की जांच की जा रही है, ताकि आत्महत्या से ठीक पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके। घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि यह पता चल सके कि घटना वाले दिन घर में कौन-कौन आया था। पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि जांच के दौरान पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद की बात सामने आई है।
एक होनहार करियर का दुखद अंत
अमन कुमार शर्मा एक मेधावी न्यायिक अधिकारी थे। वे कड़कड़डूमा कोर्ट में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे। 30 वर्ष की उम्र में इस तरह के कदम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां वे दूसरों को न्याय दिलाने वाली कुर्सी पर बैठते थे, वहीं दूसरी ओर वे स्वयं अपनी व्यक्तिगत जिंदगी में इतने बड़े मानसिक दबाव का सामना कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे परिवार के सदस्यों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या अमन को आत्महत्या के लिए उकसाया गया था या इसके पीछे अन्य कोई कारण थे। फिलहाल, इस घटना ने दिल्ली और राजस्थान के न्यायिक गलियारों को झकझोर कर रख दिया है।
उभरता हुआ न्यायिक करियर
अमन कुमार शर्मा दिल्ली न्यायिक सेवा के एक होनहार अधिकारी थे। उत्तर-पूर्वी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट के अनुसार अमन ने 19 जून, 2021 को दिल्ली न्यायिक सेवा (DJS) जॉइन की थी। उन्होंने अपनी कानून की पढ़ाई (BA, LLB) पुणे के प्रतिष्ठित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से साल 2018 में पूरी की थी।
अपने छोटे लेकिन प्रभावी करियर के दौरान उन्होंने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) और सिविल जज के रूप में विभिन्न आपराधिक और दीवानी मामलों की सुनवाई की थी। वर्तमान में DLSA सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर उनकी तैनाती उनकी कार्यक्षमता को दर्शाती थी।
परिवार में मातम का माहौल
अमन अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी भी न्यायिक सेवा में हैं और जज के पद पर कार्यरत हैं। उनके दो बच्चों में से एक की उम्र अभी नौ महीने से भी कम है।
कोर्ट के एक सूत्र ने बताया, वे एक बहुत ही सौम्य और युवा जज थे। हालांकि, हम उन्हें बहुत करीब से नहीं जानते थे क्योंकि वे कुछ ही मामलों को संभाल रहे थे, लेकिन उनकी कार्यशैली की सराहना होती थी। उनका इस तरह जाना बेहद दुखद है।
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