सीएम का साला बताने वाले प्रमोद शर्मा को हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, अब गिरफ्तारी की तलवार
News In Short
- खुद को सीएम का साला बताने वाले प्रमोद शर्मा की मुश्किलें बढ़ी।
- प्रमोद शर्मा को हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, याचिका खारिज।
- कोर्ट ने जमीन कब्जे से जुड़ी एफआईआर निरस्त करने से किया इनकार।
- प्रमोद शर्मा पुलिस से नोटिस मिलने के बाद से चल रहे अंडरग्राउंड
- हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने पर पुलिस ने प्रमोद शर्मा पर कसा शिकंजा।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में खुद को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का साला बताकर प्रभाव जमाने वाले प्रमोद कुमार शर्मा अब कानूनी शिकंजे में बुरी तरह घिर चुके हैं। धोखाधड़ी और जमीन पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे प्रमोद शर्मा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने से इनकार कर दिया है।
राजस्थान हाई कोर्ट में क्या हुआ?
प्रमोद कुमार शर्मा ने अपने खिलाफ जयपुर के मानसरोवर थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की याचिका हाई कोर्ट में दायर की थी। सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकीलों ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि पुलिस कार्यवाही और गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
कोर्ट ने इस मामले की संवेदनशीलता और धोखाधड़ी के बड़े स्तर को देखते हुए तत्काल कोई भी अंतरिम राहत या सुरक्षा देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर माना और एफआईआर निरस्त करने संबंधित याचिका को खारिज कर दिया।
प्रमोद शर्मा की याचिका का विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद और शिकायतकर्ता गृह निर्माण समिति की तरफ से सीनियर एडवोकेट माधव मित्र तथा एडवोकेट जया मित्रा ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रमोद शर्मा को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही याचिका को भी खारिज किया जाए। इस पर कोर्ट ने सहमति जताई।
क्या है पूरा जमीन घोटाला?
सत्ता के रसूख के आधार पर जमीन पर कब्जे से जुड़ा यह मामला करीब एक साल पुराना है। पिछले साल 13 जुलाई 2025 को घनश्याम शर्मा ने मानसरोवर थाने में एफआईआर दर्ज करा कर आरोप लगाया था कि प्रमोद शर्मा समेत 9 लोगों ने उनकी मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित कीमती जमीन पर कब्जा कर लिया है। इन्होंने जमीन के फर्जी कागजात तैयार किए। इसके बाद रसूख का इस्तेमाल कर जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया।
प्रमोद शर्मा का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वह कुछ लोगों के साथ मिलकर जमीनों पर कब्जा जमाते रहे हैं। प्रमोद शर्मा अक्सर खुद को मुख्यमंत्री का साला बताकर अफसरों और जमीन मालिकों पर दबाव बनाता था। मानसरोवर पुलिस ने इस मामले में प्रमोद शर्मा को एक साल बाद नोटिस थमाया। लेकिन, वह गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गए।
शासन की साख की लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि शासन की साख की लड़ाई बन गया है। हाई कोर्ट से प्रमोद शर्मा की याचिका खारिज होने के बाद सरकार के लिए यह साबित करना चुनौती है कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह खुद को सत्ता के कितना ही करीब क्यों न बताए। प्रमोद शर्मा अभी अंडरग्राउंड हैं।
अब सरेंडर या गिरफ्तारी ही विकल्प
पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रमोद शर्मा एंड कंपनी के खिलाफ के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटा लिए गए हैं। जल्द ही गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी।
कानून जानकारों का कहना है कि कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब प्रमोद शर्मा के पास सरेंडर करने या पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है।
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